राजीव गांधी के हत्यारों को नहीं होगी फांसी की सजा

By: | Last Updated: Tuesday, 1 April 2014 3:47 PM

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राजीव गांधी हत्याकांड मामले में केंद्र सरकार की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें मांग की गई थी कि मामले के तीन दोषियों को सुनाई गई मौत की सजा को आजीवन कारावास में परिवर्तित किए जाने के न्यायालय के फैसले पर फिर से विचार किया जाए. प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी. सतशिवम, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति शिव कीर्ति सिंह की पीठ ने केंद्र सरकार की यह याचिका खारिज कर दी..

 

न्यायालय ने 21 जनवरी को दिए अपने फैसले का उद्धरण देते हुए राजीव गांधी की हत्या की साजिश रचने के दोषी पाए गए तीन अपराधियों की मौत की सजा को बदलकर आजीवन कारावास किए जाने के अपने 18 फरवरी के फैसले को कायम रखा.

 

केंद्र सरकार की याचिका पर न्यायालय ने अपने संक्षिप्त आदेश में कहा, “हमने इस पुनर्विचार याचिका और संबद्ध दस्तावेजों पर बहुत सावधानी पूर्वक विचार किया. हमने इस पुनर्विचार याचिका को सुनवाई योग्य नहीं पाया और इसी वजह से इसे खारिज कर दिया.”

 

तीनों दोषी, वी. श्रीहरन उर्फ मुरुगन, ए.जी. पेरारिवलन उर्फ आरीवू और टी. सुथेंद्रराजा उर्फ संथन इस समय तमिलनाडु की वेल्लूर जेल में बंद हैं. तीनों ने अपनी दया याचिका पर निर्णय आने में हुई अत्यधिक देरी के कारण अपनी-अपनी मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदले जाने की मांग की थी.

 

सुप्रीम कोर्ट ने 21 जनवरी को दिए अपने फैसले में कहा था कि मौत की सजा पाए दोषियों की दया याचिका पर फैसला लेने में बिना किसी कारण के और बिना किसी उचित वजह के हुई अत्यधिक देरी को उनकी मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदले जाने का पर्याप्त आधार है.

 

इस मामले में 1998 में एक विशेष अदालत ने सभी 26 आरोपियों को मौत की सजा सुनाई थी. सर्वोच्च न्यायालय ने बाद में 1999 में चार आपराधियों, मुरुगन, संतन, पेरारिवालन और नलिनी की मौत की सजा को बरकरार रखा जबकि अन्य आपराधियों की मौत की सजा घटाकर विभिन्न अवधि की जेल की सजा में बदल दिया था.

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Web Title: राजीव गांधी के हत्यारों को नहीं होगी फांसी की सजा
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