राम जेठमलानी को बीजेपी ने किया निलंबित

राम जेठमलानी को बीजेपी ने किया निलंबित

By: | Updated: 25 Nov 2012 08:46 PM


नई
दिल्ली:
बीजेपी ने प्रख्यात
अधिवक्ता एवं अपने राज्यसभा
सांसद राम जेठमलानी को
पार्टी की प्राथमिक सदस्यता
से निलम्बित कर दिया.




माना जा रहा है कि बीजेपी
अध्यक्ष नितिन गडकरी का
इस्तीफा मांगने एवं सीबीआई
प्रमुख की नियुक्ति पर
पार्टी के निर्णय के खिलाफ
बोलने के लिए यह कार्रवाई की
गई है.

उनके निष्कासन पर
बीजेपी की संसदीय बोर्ड की
बैठक में आज फैसला हो सकता है.
सूत्र बता रहे हैं कि आज
बीजेपी के संसदीय बोर्ड की
बैठक में उन्हें छह साल के
लिए पार्टी से बाहर का रास्ता
दिखाया जा सकता है.

पार्टी
के प्रवक्ता सैयद शाहनवाज
हुसैन ने संवाददाताओं से कहा,
"पार्टी अध्यक्ष ने राम
जेठमलानी को तत्काल प्रभाव
से निलम्बित कर दिया. उनके
निलंबन की प्रक्रिया के लिए
मामले को पार्टी के संसदीय
बोर्ड को सौंप दिया गया है."

निलम्बन
की घोषणा से कुछ समय पूर्व
जेठमलानी ने संवाददाताओं से
कहा, "मेरे खिलाफ कार्रवाई
होती है तो मैं उसका स्वागत
करता हूं, लेकिन किसी में
मुझे निलम्बित करने का दम
नहीं है."

आपको बता दें कि
रविवार की शाम रामजेठमलानी
ने बीजेपी को बाहर निकालने की
चुनौती दी थी जिसके बाद
पार्टी ने उन्हें निलंबित कर
दिया.

पार्टी से निलंबित
करने की कार्रवाई को बीजेपी
के नेता सही फैसला बता रहे
हैं. बिहार के पशुपालन मंत्री
और राज्य में बीजेपी के बड़े
नेता गिरिराज सिंह तो
जेठमलानी के निलंबन को
पार्टी के हित में बता रहे
हैं.

दूसरी पार्टियां
हालांकि इसे बीजेपी का
अंदरूनी मामला बता रही है
लेकिन बीजेपी के नसीहत भी दे
रही है.

क्या है मामला


भाजपा
अध्यक्ष नितिन गडकरी को लिखे
पत्र में जेठमलानी ने कहा था,
"मैं यह पढ़कर आश्चर्यचकित हो
गया कि भाजपा ने रंजीत सिन्हा
की सीबीआई प्रमुख के तौर पर
नियुक्ति को जल्दबाजी का
फैसला करार देकर
प्रधानमंत्री एवं कांग्रेस
पार्टी की आलोचना की है."

जेठमलानी
ने शनिवार को कहा, "मुझे खेद है
कि यह आलोचना तथ्यों की पूरी
तरह अनदेखी करने एवं सीबीआई
निदेशक पद के लिए सबसे ज्यादा
लालायित प्रतिद्वंद्दी के
उकसाने के कारण हुआ है जिसे
कल नियुक्ति हो जाने के कारण
कैट से अपनी याचिका को वापस
लेना पड़ा था."

जेठमलानी
ने कहा कि सिन्हा की नियुक्ति
से राष्ट्रीय आपदा आने से बच
गई. उल्लेखनीय है कि भाजपा
नेता अरुण जेटली एवं सुषमा
स्वराज ने सिन्हा की नियुक्त
पर प्रधानमंत्री मनमोहन
सिंह की आलोचना की थी. भाजपा
नेताओं ने नियुक्ति रद्द कर
लोकपाल पर संसद की प्रवर
समिति की अनुशंसा के आधार पर
करने की मांग की थी.




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