राहुल के खिलाफ सिखों के प्रदर्शन के बीच ज्ञानी जैल सिंह के प्रेस सचिव तरलोचन सिंह ने लगाए संगीन आरोप

By: | Last Updated: Thursday, 30 January 2014 6:50 AM
राहुल के खिलाफ सिखों के प्रदर्शन के बीच ज्ञानी जैल सिंह के प्रेस सचिव तरलोचन सिंह ने लगाए संगीन आरोप

नई दिल्ली. सिख दंगों को लेकर एक बार फिर राजनीति सरगर्मी बढ़ी हुई है. आरोप-प्रत्यारोप के दौर में एक नया आरोप सामने आया है. सिख दंगों के दौरान ज्ञानी जैल सिंह देश के राष्ट्रपति थे. ज्ञानी जैल सिंह के प्रेस सचिव रहे तरलोचन सिंह का कहना है कि दंगों को लेकर ज्ञानी जैल सिंह ने राजीव गांधी और उस वक्त के गृह मंत्री को लगातार फोन किया लेकिन उन लोगों ने फोन नहीं उठाया.

 

गौर करने वाली बात यह है कि तरलोचन सिंह एनडीए सरकार के दौरान अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष रह चुके हैं. गुजरात दंगों को लेकर वह बीजेपी की तरफ से पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी का बचाव करते रहे हैं.

 

इधर आज 84 के सिख दंगों पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के बयान को लेकर अकाली दल और दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन हो रहा है.

 

कांग्रेस मुख्यालय पर प्रदर्शन करने वालों की मांग है कि राहुल गांधी के बयान के बावजूद कांग्रेसियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है. सिख संगठनों के प्रदर्शन के चलते कांग्रेस मुख्यालय 24 अकबर रोड और राहुल गांधी के दफ्तर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये गये हैं. कांग्रेस दफ्तर के बाहर भी प्रदर्शन हुआ है.

 

राहुल गांधी के खिलाफ अकाली दल और दिल्ली SGPC के लोग करेंगे प्रदर्शन, राहुल ने कहा था- 84 के दंगे में कुछ कांग्रेसी शामिल हो सकते हैं 

 

सिख दंगों को लेकर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के बयान को लेकर अभी भी हंगामा जारी है. अकाली दल और दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के कार्यकर्तं कांग्रेस दफ्तर पर राहुल गांधी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. 

 

अब तक क्या है पूरा मामला?

 

सिख दंगों को लेकर ताजा विवाद तब शुरू हुआ जब टाइम्स नाउ को दिए इंटरव्यू में राहुल गांधी ने कुछ कांग्रेस के नेताओं के हाथ होने की बात कही थी.  इसके बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने 1984 के दंगों की एसआईटी जांच की मांग कर दी.

 

कांग्रेस उपाध्यक्ष ने 1984 के दंगों में कांग्रेस नेताओं का हाथ होने की बात क्या कबूली, विपक्ष कांग्रेस के खिलाफ गोलबंद होने लगा है. कल तक राहुल पर आपत्तिजनक टिप्पणी को बढ़ाने वाले केजरीवाल ने उपराज्यपाल से मुलाकात करके एसआईटी जांच की मांग कर दी है. केजरीवाल कैबिनेट में भी इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे.

 

अब तक दो आयोग और आठ कमेटियों का गठन हो चुका है. अब केजरीवाल लोकसभा चुनाव से पहले एक और जांच की मांग कर रहे हैं. बीजेपी और अकाली दल ने तो इसका समर्थन भी कर दिया है.

 

दंगों के आरोपों के घेरे में सज्जन कुमार और जगदीश टाइटलर जैसे बड़े कांग्रेसी नेता भी हैं जिनके खिलाफ जांच चल रही है. पिछले लोकसभा चुनाव के वक्त भी 1984 दंगों पर राजनीति तेज थी. तब पी. चिदंबरम पर जरनैल सिंह नाम के शख्स ने जूता उछाल दिया था.

 

केजरीवाल दंगा पीड़ितों से मिलने पहुंचे जो जंतर मंतर पर धरना दे रहे हैं. केजरीवाल के वादे के बावजूद दंगा पीड़ितों को केंद्र के फैसले का इंतजार है.

 

 

पिछले साल केजरीवाल भी दंगा पीड़ितों के समर्थन में धऱना दे चुके हैं. पीडितों का केस लड़ रहे वकील एसएच फुल्का भी आप में शामिल हो चुके हैं. फुल्का का दावा है कि दस दिन पहले वो केजरीवाल को जांच के लिए चिट्ठी लिख चुके हैं.

 

धरना, विरोध प्रदर्शन एक तरफ और जांच कमेटी, आयोग दूसरी तरफ. 1984 के दंगा पीड़ितों को अब तक इंसाफ नहीं मिल पाया है लेकिन राहुल गांधी के बयान 1984 दंगा फिर सुर्खियों में है. बड़ा सवाल ये कि क्या राहुल ने बयान देकर केजरीवाल और बीजेपी को मुद्दा दे दिया है.