राहुल ने सही कहा, मोदी पाकसाफ नहीं: तारिक अनवर

राहुल ने सही कहा, मोदी पाकसाफ नहीं: तारिक अनवर

By: | Updated: 23 Mar 2014 11:17 AM
नई दिल्ली: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी :राकापा: के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री तारिक अनवर ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के हालिया बयान से सहमति जताते हुए कहा है कि कथित तौर पर ‘सरकार द्वारा प्रायोजित’ 2002 के दंगों के लिए मोदी को पाकसाफ नहीं कहा जा सकता और ऐसे नजरिए वाले व्यक्ति का प्रधानमंत्री बनना देश के लिए ठीक नहीं रहेगा.

 

अनवर ने साक्षात्कार में कहा, ‘‘मैं (राहुल के बयान से) बिल्कुल सहमत हूं. मामला ऊपरी अदालत के विचाराधीन है. अभी जकिया जाफरी भी हाईकोर्ट गई हैं. उन्होंने कहा कि एसआईटी की ओर से मोदी को दी गई क्लीन चिट सही नहीं है. हम भी ऐसा ही मानते हैं.’’

 

उन्होंने कहा, ‘‘उस वक्त प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि मोदी ने राजधर्म का पालन नहीं किया है. हाल में उस वक्त के भाजपा अध्यक्ष रहे वैंकेया नायडू ने भी कहा कि अटल जी मोदी को हटाना चाहते थे, लेकिन पार्टी में दबाव के कारण ऐसा नहीं हो सका...मोदी को पाकसाफ नहीं कहा जा सकता.’’ पिछले दिनों राहुल ने पीटीआई को दिए साक्षात्कार में कहा था कि 2002 के दंगों को लेकर मोदी को क्लीनचिट देना ‘जल्दबाजी’ है और इस हिंसा को लेकर नैतिक एवं कानूनी जवाबदेही बनती है.

 

केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री अनवर ने 1984 के सिख विरोधी दंगे और गुजरात दंगे में फर्क करते हुए कहा, ‘‘लोग अक्सर 1984 और 2002 के दंगों की तुलना करते हैं. 1984 का दंगा अचानक भड़का था, जबकि 2002 का दंगा सरकार द्वारा प्रायोजित था. कांग्रेस के नेतृत्व ने 1984 के लिए माफी मांगी, लेकिन मोदी ने आज तक माफी नहीं मांगी.’अनवर ने मोदी की विचारधारा को लेकर उन पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘मोदी जी के दिमाग में आरएसएस का सॉफ्टवेयर डाला गया है और वह आरएसएस के रिमोट से संचालित होता है. सब जानते हैं कि आरएसएस की क्या विचारधारा है. यह देश विभिन्न धर्मों, जातियों, संस्कृति और भाषाओं वाला देश है. ऐसे में यहां अगर मोदी जैसे लोग प्रधानमंत्री बनते हैं तो यह देश के लिए ठीक नहीं होगा.’’ उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी तथा कुछ दूसरे वरिष्ठ नेताओं की कथित नाराजगी का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि भाजपा ‘वनमैन शो’ पार्टी बन गई है.

 

केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘यह हमेशा कहा जाता था कि भाजपा अनुशासित पार्टी है और उसमें आंतरिक लोकतंत्र है. परंतु अब मोदीजी को जिस तरह पेश किया जा रहा है उससे लगता है कि व्यक्ति पार्टी से ज्यादा महत्वूर्ण है. यह स्थिति देश के लोकतंत्र के लिए अच्छी नहीं है.’’ अनवर ने उन अटकलों को खारिज कर दिया कि लोकसभा चुनाव के बाद स्थिति बदलने पर राकांपा राजग का हिस्सा बन सकती है.

 

उन्होंने कहा, ‘‘1999 में भी ऐसी स्थिति पैदा हुई थी और उस वक्त अटलजी ने साथ आने की पेशकश की थी, लेकिन शरद पवार जी ने इसे ठुकरा दिया. आगे भी हम किसी कीमत पर राजग का हिस्सा नहीं बनेंगे. हम संप्रग के साथ रहेंगे, चाहे वह सत्ता में रहे अथवा विपक्ष में रहे.’’

 

आयकर रिटर्न की ई-फाइलिंग: करदाताओं को मिलेगा डिजिटल हस्ताक्षर

नयी दिल्ली, 23 मार्च :भाषा: इलेक्ट्रानिक तरीके से भरे गये रिटर्न की प्रति :हार्ड कापी: डाक से भेजे जाने में होने वाली समस्या को दूर करने के इरादे से आयकर विभाग ने करदाताओं की पहचान के सत्यापन के लिये इलेक्ट्रानिक हस्ताक्षर की व्यवस्था शुरू करने का फैसला किया है.

 

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड :सीबीडीटी: ने नई प्रणाली अगले वित्त वर्ष के अंत मार्च 2015 से लागू करने का निर्णय किया है. मामले से जुड़े आधिकारिक सूत्रों ने प्रेट्र से कहा कि सीबीडीटी ई-रिटर्न :आईटीआर 5: के लिये नई व्यवस्था क्रियान्वित करने से पहले कानूनी स्थिति तथा प्रौद्योगिकी जरूरतों को पूरा करने के लिये कानून और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से संपर्क करेगा.

 

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘यह अभी देखा जाना है कि करदाताओं द्वारा इलेक्ट्रानिक या डिजिटल हस्ताक्षर प्राप्त करने की प्रक्रिया क्या होगी. इससे उन करदाताओं पर अतिरिक्त खर्च या प्रक्रियागत बोझ पड़ सकता है जो आयकर रिटर्न आनलाइन भरने का विकल्प अपनाते हैं.’’ डिजिटल हस्ताक्षर का उपयोग फिलहाल कंपनियां कर रही हैं. यह एक बयान होता है जो भेजने वाले की पहचान का सत्यापन करता है. डिजिटल हस्ताक्षर की स्थिति में शुल्क का भुगतान कर इसे सृजित किया जाता है और इसका नियमित नवीनीकरण होता है. यही कारण है कि इसे नौकरीपेशा और अन्य श्रेणी के करदाताओं पर एक बोझ के रूप में देखा जा रहा है.

 

इतना ही नहीं विभाग की उक्त समयसीमा के अंदर स्रोत पर कर कटौती :टीडीएस: वाले दस्तावेज की अपने आधिकारिक वेब पोर्टल के जरिये ई-फाइलिंग की व्यवस्था शुरू करने की भी योजना है. फिलहाल इसका उपयोग करदाता इलेक्ट्रानिक रिटर्न भरने के लिये करते हैं. मौजूदा नियमों के अनुसार ई-रिटर्न दाखिल करने वाले करदाताओं को उसकी एक प्रति डाक से आयकर विभाग के बेंगलूर स्थित सेंट्रल प्रोसेसिंग सेंटर :सीपीसी: को भेजनी होती है.

 

डाक से भेजे गये आईटीआर 5 प्राप्त करने के बाद सीपीसी कर रिटर्न दाखिल करने वालों को इलेक्ट्रानिक तरीके से प्राप्ति की सूचना देता है.

 

हालांकि कई मामलों में डाक विभिन्न कारणों से सीपीसी तक नहीं पहुंच पाता और फलस्वरूप कर विभाग करदाता के रिटर्न को खारिज कर दिया जाता है. इस स्थिति में समस्या उत्पन्न होती है.

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