लक्षमण रेखा पार न करे यूपीए सरकार: ममता बनर्जी

लक्षमण रेखा पार न करे यूपीए सरकार: ममता बनर्जी

By: | Updated: 15 Sep 2012 05:14 AM


नई
दिल्‍ली/कोलकाता:
बड़े
फैसले लेकर प्रधानमंत्री
मनमोहन सिंह ने सहयोगियों का
सिरदर्द मोल लिया है. इस वक्त
की बड़ी खबर यही है कि मनमोहन
सरकार संकट में है. सरकार
जहां अपने फैसले पर अड़ी है,
वहीं सहयोगी तृणमूल
कांग्रेस (टीएमसी) ने सरकार
को मंगलवार तक का अल्‍टीमेटम
दे दिया है.




तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष
ममता बनर्जी ने यूपीए को
समर्थन देने के मुद्दे पर
मंगलवार को कोई बड़ा फैसला
करने के संकेत दिए हैं.




एफडीआई, डीजल और रसोई गैस के
मुद्दे पर केंद्र के फैसले के
खिलाफ ममता बनर्जी ने आज
कोलकाता में रैली की.
उन्होंने कहा है कि वो
मंगलवार को जनता के हित में
फैसला सुनाएंगी.




सरकार की सबसे बड़ी सहयोगी
ममता ने कहा,  'हम सरकार
गिराने के पक्ष में नहीं हैं.
लेकिन उन्‍हें गठबंधन की
लक्षमण रेखा भूलनी नहीं
चाहिए.  हम किसी भी जनविरोधी
फैसले पर राजी नहीं हैं. हमने
सरकार को सोचने के लिए 72 घंटे
की डेडलाइन दी है.  अगर आप
फैसले वापस लेते हैं तो
अच्‍छा है और नहीं तो
परिणामों के लिए तैयार रहें.'


इससे पहले ममता ने एक बार
फिर शनिवार को फेसबुक के जरिए
सरकार पर निशाना साधा. 
उन्‍होंने कहा कि आर्थिक
सुधार का ये मतलब नहीं कि सब
कुछ बेच दिया जाए.

ममता ने
फेसबुक पर लिखा, 'हां हमें
सुधारों की जरूरत है, लेकिन
सुधार का मतलब कुछ लोगों को
खुश करने के लिए सब कुछ बेचना
नहीं है. मैं सब कुछ बेच देने
के किसी फैसले का समर्थन नहीं
करती. ये सरकार के एक हिस्‍से
को ठीक लगता है. हमारे देश में
सामाजिक सुरक्षा की योजनाएं
नहीं हैं न ही आम आदमी के
हितों की हिफाजत के लिए
इंतजाम हैं. हम आम आदमी की
लड़ाई के लिए तैयार हैं. अपनी
जिंदगी कुर्बान कर सकते हैं,
लेकिन समझौता नहीं कर सकते.'


गौरतलब है कि लोकसभा में
टीएमसी के 19 सांसद हैं.

ममता
बनर्जी ही नहीं अब तो सरकार
को बाहर से समर्थन दे रही
बीएसपी अध्यक्ष मायावती ने
भी समर्थन पर विचार की बात
कहकर मनमोहन सिंह का सिरदर्द
बढ़ा दिया है. समाजवादी
पार्टी जो कि सरकार को बाहर
से समर्थन दे रही है उसने
पहले से ही विरोध में मोर्चा
खोला हुआ है.

यानी कि इस
वक्‍त मनमोहन के ये तीन 'एम'
महासिरदर्द बन गए हैं. सवाल
ये कि क्या मनमोहन सिंह ने
सरकार को दांव पर लगा दिया है?

मनमोहन
सरकार ने 24 घंटे में जो तीन
बड़े फैसले लिए हैं, उससे ये
लगने लगा है कि उन्‍होंने
सरकार को दांव पर लगा दिया है.




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