लगातार लुढक रही विकास दर क्या संभल पाएगी?

लगातार लुढक रही विकास दर क्या संभल पाएगी?

By: | Updated: 30 Aug 2012 10:41 PM


नई दिल्ली: देश
की विकास दर के आंकड़े आज आने
वाले हैं. सवाल ये है कि
लुढकती जा रही विकास दर क्या
संभल पाएगी. अप्रैल-जून 2011
में  विकास दर 7.7% थी तो
जुलाई-सितंबर 2011 में 6.9% रही.
अक्टूबर-दिसंबर 2011 में यह 6.1%
रही, जबकि जनवरी-मार्च 2012 में
5.3% रही.




विकास दर के इन आंकड़ों को
अगर आप अब तक हल्के में लेते
थे और नज़रअंदाज़ कर देते थे
तो अब ऐसा करना छोड़ दीजिए.
क्योंकि मामूली दिखने वाले
विकास दर के ये आंकड़े आपकी
जिंदगी पर बहुत भारी असर डाल
रहे हैं. इन आंकड़ों में आई
गिरावट से पता चल रहा है कि
देश की अर्थव्यवस्था में सब
कुछ ठीकठाक नहीं है.




क्या महंगाई कम होगी?




आम आदमी महंगाई से परेशान है.
लेकिन महंगाई पर लगाम कसना
सरकार के लिए आसान नहीं है.
सरकार का घाटा बढ़ रहा है. उस
पर दबाव है कि वो अपना घाटा कम
करने के लिए डीजल और रसोई गैस
के दाम बढ़ाए. जाहिर है डीज़ल
और रसोई गैस के दाम देर-सवेर
बढ़े तो आपका आना-जाना और
खाना-पीना और महंगा हो जाएगा.




क्या नौकरी मिलेगी?




बेरोजगारों के सामने सबसे
बड़ा सवाल. अर्थव्यवस्था की
हालत बिगड़ने की वजह से नई
नौकरियां मुश्किल से मिल रही
हैं. महंगाई ज्यादा होने की
वजह से मांग घट रही है यानी
कंपनियां कम सामान बना रही
हैं. कर्ज महंगा है. विदेशी
निवेश भी कम है. नई
फैक्टरियां नहीं लग रहीं और
नई फैक्टरियां नहीं लगने का
मतलब है कि नौकरियां नहीं मिल
रहीं. यानी विकास दर कम तो
नौकरियाँ भी कम.




नौकरी का क्या होगा?




अगर आप प्राइवेट सेक्टर में
काम करते हैं, तो विकास दर कम
होने पर आपकी नौकरी पर भी आंच
आ सकती है. या संभव है कि
तनख्वाह उतनी नहीं बढ़े
जितनी बढ़नी चाहिए. क्योंकि
विकास दर कम होने पर उद्योगों
को पैसों की तंगी झेलनी पड़
सकती है.




क्या ईएमआई कम होगी?




अपने घर का सपना देख रहे हर
आदमी के लिए सबसे बड़ा सवाल.
आम आदमी को उम्मीद है कि
ब्याज दर कम होगी, लेकिन
रिजर्व बैंक ब्याज दर नहीं
घटा रहा और आपका बैंक भी नहीं
घटाएगा. क्योंकि रिजर्व बैंक
को डर है कि ब्याज दर घटाने से
महंगाई बढ़ सकती है.
 
जानकारों
की राय





हालांकि, जानकारों का
अनुमान है कि मौजूदा
कारोबारी साल की पहली तिमाही
में भी विकास दर पिछली तिमाही
की तरह ही पांच दशमलव तीन
फीसदी के आसपास ही रहेगी.




पिछले नौ सालों में देश की
अर्थव्यवस्था फिलहाल सबसे
बदतर दौर से गुज़र रही है.
ऊंची ब्याज दर, ऊंची महंगाई
दर और गिरती विकास दर की वजह
से अर्थव्यवस्था का चक्का
जाम होने की पूरी आशंका जताई
जा रही है. 




देश के प्रधानमंत्री को भले
ही उम्मीद है कि मौजूदा
कारोबारी साल में देश की
आर्थिक विकास दर साढ़े छह
फीसदी से ज्यादा रहेगी, लेकिन
ज्यादातर जानकार उनसे सहमत
नहीं हैं. 




यूपीए सरकार पर एक के बाद एक
लग रहे घोटाले के आरोपों की
वजह से देश में निवेश का
माहौल बिगड़ा हुए है. जीएएआर
जैसे विवादास्पद फैसलों की
वजह से भी विदेशी निवेशक भारत
में ज्यादा दिलचस्पी नहीं ले
रहे हैं.




कई अंतरराष्ट्रीय रेटिंग
एजेंसियों ने भारतीय
अर्थव्यवस्था की रेटिंग
गिराकर विदेशी निवेशकों की
घबराहट बढ़ा दी है. रही-सही
कसर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की
नीतियों ने पूरी कर दी है.




देश की अर्थव्यवस्था को
गहराई से समझने वाले कुछ
जानकार ये भी मानते हैं कि
सिर्फ विकास दर ही सबकुछ नहीं
है. देश की अर्थव्यवस्था को
मज़बूत बनाने के लिए कुछ और
बातों पर गौर करना भी ज़रूरी
है.




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