लोकसभा चुनाव : त्रिपुरा में दोपहर तक 60 फीसदी मतदान

लोकसभा चुनाव : त्रिपुरा में दोपहर तक 60 फीसदी मतदान

By: | Updated: 07 Apr 2014 11:30 AM
अगरतला. लोकसभा चुनाव के प्रथम चरण के मतदान के तहत त्रिपुरा में सोमवार अपराह्न दो बजे तक राज्य के 60 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया. एक अधिकारी ने बताया कि राज्य की दो में से एक संसदीय सीट त्रिपुरा (पश्चिम) के लिए मतदान हो रहा है. अब तक किसी भी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है.

 

त्रिपुरा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी आशुतोष जिंदल ने आईएएनएस से कहा, "सुबह सात बजे मतदान की शुरुआत होते ही राज्य के 1,605 मतदान केंद्रों में से ज्यादातर पर मतदाताओं की लंबी कतार देखी जा रही है. मौसम साफ रहने की वजह से मतदाताओं को सुबह ही मतदान केंद्रों पर पहुंचने में आसानी रही."

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उन्होंने कहा कि मतदान शाम पांच बजे तक चलेगा, लेकिन मतदाताओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए निर्धारित समय को बढ़ाया जा सकता है.

 

जिंदल ने कहा, "कुछ मतदान केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में तकनीकी गड़बड़ी के कारण कुछ देर के लिए मतदान में देरी हुई, लेकिन इंजीनियरों ने जल्द ही ईवीएम बदल दिया, फिर मतदान सामान्य रूप से शुरू हो गया."

 

जनजातियों के लिए सुरक्षित त्रिपुरा (पूर्वी) लोकसभा सीट के लिए मतदान 12 अप्रैल को होंगे.

 

जिंदल के अनुसार, सोमवार को हो रहे मतदान में करीब 12 लाख मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे. त्रिपुरा (पश्चिम) संसदीय क्षेत्र से एक महिला सहित 13 उम्मीदवार मैदान में हैं.

 

त्रिपुरा की इस सीट पर पिछले लोकसभा चुनाव-2009 में मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के खगन दास ने कांग्रेस के सुदीप रॉय बर्मन को हराया था.

 

इस बार यहां से माकपा के शंकर प्रसाद दत्ता, कांग्रेस के अरुणोदय साहा, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष सुधींद्र चंद्र दासगुप्ता, तृणमूल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रतन चक्रवर्ती, त्रिपुरा प्रगतिशील ग्रामीण कांग्रेस (टीपीजीएस) के अध्यक्ष सुबाल भौमिक तथा आम आदमी पार्टी (आप) से सलिल साहा भी मैदान में हैं.

 

वर्ष 1952 में पहली बार हुए लोकसभा चुनाव से अब तक त्रिपुरा की इस लोकसभा सीट से 11 बार वाम प्रत्याशियों की ही जीत हुई है, जबकि चार बार कांग्रेस प्रत्याशी जीते हैं.

 

सत्तारूढ़ माकपा ने इस बार निवर्तमान सांसद दास और बाजुबन रेआंग (त्रिपुरा पूर्व) को चुनाव मैदान में नहीं उतारा है.

 

माकपा ने कांग्रेस नीत केंद्र सरकार पर कमजोर शासन, महंगाई और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए अपने विकास को कार्य को चुनाव का मुद्दा बनाया है.

 

इधर, विपक्ष सत्तारूढ़ वाम मोर्चा के कुशासन, बेरोजगारी और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध को मुद्दा बना रही है.

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