लोकसभा में उठा गेहूं की बर्बादी का मुद्दा

लोकसभा में उठा गेहूं की बर्बादी का मुद्दा

By: | Updated: 07 May 2012 03:04 AM


नई
दिल्‍ली:
संसद में आज फिर
मध्य प्रदेश में गेहूं की
बर्बादी का मुद्दा गूंजा.
लोकसभा में विपक्ष की नेता
सुषमा स्वराज ने आरोप लगाया
कि सरकार की लापरवाही के कारण
किसानों को गेहूं रखने के लिए
बोरियां तक नहीं मिल पा रही
हैं.

लोकसभा में विपक्ष की
नेता सुषमा स्वराज के
मुताबिक, 'जब तक हमारे पास
बोरियां उपलब्‍ध थीं तब तक
हमने किसानों का पंजीयन
कराया और उन्‍हें पैसे भी दे
दिए लेकिन एक दिन अचानक
बोरियों की उपलब्‍धता खत्‍म
हो गई. बोरियां न होने के कारण
पूरी व्‍यवस्‍था बैठ गई.
गेहूं खुले में मंडियों में
पड़ा हुआ है और किसान रात भर
जागकर पहरेदारी कर रहा है. दो
बार पानी गिर चुका है और पूरा
का पूरा गेहूं खराब हो रहा है.
मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह
चौहान दिल्‍ली आए और
उन्‍होंने खाद्य मंत्री से
बात की और उन्‍होंने मेरे
सामने आश्‍वासन दिया कि 46,000
गठानें पांच मई तक पहुंचा दी
जाएंगी. लेकिन अभी तक हम
इंतजार ही कर रहे हैं.'

सुषमा
स्‍वराज के आरोपों के बाद
वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी
ने सफाई देते हुए जल्द बोरे
के इंतजाम की बात कही है.

प्रणब
मुखर्जी ने कहा, 'हमने पड़ोसी
देशों से अनाज रखने वाली
बोरियां जल्‍द भेजने की मांग
की है. हमने राज्‍य सरकारों
से कहा है कि खराब बोरियों का
इस्‍तेमाल तुरंत बंद कर दें.'

सवाल
उठता है कि सरकारों की नींद
तब क्यों खुलती है जब नुकसान
हो जाता है. जिस गेहूं से
हजारों लोगों को रोटी मिल
सकती थी जब वो बर्बाद हो गया
तब सरकार कदम उठाने की बात कह
रही है.

स्‍टार न्‍यूज़
की खबर का असर

मध्य प्रदेश
के इंदौर में गेहूं की
बर्बादी की खबर स्टार न्यूज
पर दिखाए जाने के बाद राज्य
सरकार हरकत में आई है. राज्य
के खाद्य मंत्री पारस जैन ने
न सिर्फ इंदौर की अनाज मंडी
का जायजा लिया, बल्कि किसानों
की समस्याएं भी सुनीं. साथ ही
ये दावा भी किया गेहूं को
भरने के लिए बोरियों का
इंतजाम करा लिया गया है.

उधर,
कांग्रेस सांसद
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने
गेहूं के रखरखाव का इंजताम न
कर पाने के लिए राज्य सरकार
को आड़े हाथों लिया है.

गौरतलब
है कि मध्य प्रदेश सरकार ने
गेहूं के भंडारण के लिए
बोरियों की कमी का रोना रोया
था.

किसानों का गुस्‍सा
मध्य
प्रदेश में इन दिनों किसान
संकट में है. गेहूं की भारी
पैदावार हुई है और सरकार
गेहूं खरीद नहीं पा रही है.
वजह गेहूं भरने के लिए
बारदाने या बोरों की कमी है.
किसान अपनी नाराजगी दिखाने
के लिए गेहूं जमीन पर फेंक
रहे हैं.

यहां के अशोकनगर
की तहसील रोड पर आज सुबह करीब
150 किसानों ने
ट्रैक्‍टर-ट्रॉलियों के साथ
कलेक्टर के घर के सामने
प्रदर्शन किया और गेहूं की
बोरियों को जमीन पर बिखेर
दिया. किसानों का कहना है कि
गेहूं की सरकारी खरीदी के
लिये उनको कई दिनों तक इंतजार
करना पड़ता है, जिसके चलते
पैसा और समय खर्च होता है.

तकरीबन
यही हाल सभी जिलों का है. इस
बार मध्य प्रदेश में गेहूं की
बंपर पैदावार हुई है. यही
पैदावार किसान और सरकार
दोनों के लिए मुसीबत बन गई है.
इस बार प्रदेश में 80 लाख
मीट्रिक टन गेहूं की पैदावार
होने की उम्मीद है. ये पिछली
बार से 30 लाख मीट्रिक टन अधिक
है. मगर इसे रखने और भरने की
दिक्कत हो रही है. सरकार के
पास अनाज रखने के लिए बोरे
नहीं हैं.

उधर, सरकार का
कहना है कि अब तक किसानों से 45
लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा
जा चुका है. इसके लिए किसानों
को 6200 करोड रुपये दिए जा चुके
है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह
बारदानों की कमी के लिये
केंद्र की सरकार को
जिम्मेदार बता रहे है. उनका
दावा है कि बारदानों की तीन
लाख गठानों के लिए साढे पांच
अरब रुपये दे दिए गए हैं. अब
राज्‍य सरकार किसानों से ही
कह रही है कि वो अपना बोरा लाए,
जिसे खरीद लिया जाएगा.

लगता
है किसानों की किस्मत बदलने
वाली नहीं है. फसल कम आए तो
परेशानी और बंपर आए तो भी
परेशानी.




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