वाड्रा ने किया जमीनों की डील में फर्जीवाड़ा: खेमका

By: | Last Updated: Saturday, 10 August 2013 12:34 AM
वाड्रा ने किया जमीनों की डील में फर्जीवाड़ा: खेमका

हरियाणा के शिकोहपुर में
जमीन खरीदने से लेकर, डीएलएफ
को कर्मिश्यल लाइसेंस बेचने
के मामले में सोनिया गांधी के
दामाद राबर्ट वाड्रा पर नये
आरोप लगे हैं.

हरियाणा सरकार के आईएएस
अधिकारी अशोक खेमका ने अपनी
रिपोर्ट राज्य सरकार को
सौंपी है. यह रिपोर्ट 21 मई को
सौंपी गयी थी लेकिन अभी तक
हरियाणा सरकार इसका सिर्फ
अध्ययन ही कर रही है.

वाड्रा
विवाद में आईएएस अफसर का
तबादला

रिपोर्ट में राबर्ट वाड्रा
की कंपनी पर वित्तीय
अनियममितताओं , दस्तावेजों
में गडड़बड़ी के गंभीर आरोप
लगाए गये हैं. साथ ही साथ
हरियाणा सरकार पर भी नियमों
की अनदेखी कर वाड्रा को लाभ
पहुंचाने की बात कही गयी है.

तबादले
की वजह जानने का हक है: अशोक
खेमका
| हरियाणा
सरकार की सफाई से संतुष्ट
हूं: खेमका

रिपोर्ट कहती है कि 12 फरवरी 2008
को राबर्ट वाड्रा की कंपनी
स्काईलाइट हास्पीटिलिटी ने
हरियाणा के शिकोहपुर में 3.53
एकड़ जमीन किसी ओंकारेशवर
कंपनी से 7.5 करोड़ में खरीदी
लेकिन खेमका के अनुसार
वाड्रा की कंपनी ने 7.5 करोड़
का जाली चैक जारी किया जो
कागजों में ही था. कंपनी की
माली हालत खराब थी. उसका पेड
अप कैपिटल सिर्फ एक लाख रुपये
का था.

वाड्रा
की कंपनी ने 65 दिन में कमाए 58
करोड़
| आखिर
क्यों हुआ खेमका का तबादला?

कारपोरेशन बैंक ने भी माना कि
ऐसा कोई चैक जारी किया ही
नहीं गया था. यहां तक कि
रजिस्ट्रेशन के 45 लाख रुपये
भी ओंकारेशवर कंपनी ने ही
दिये. सवाल उठाया गया है कि
जिस कंपनी के पास बैंक में
सिर्फ एक लाख रुपये हो वो 7.5
करोड़ का चैक कैसे जारी कर
सकती थी. इसी तरह 7.5 करोड़ का
ओवरड्राफ्ट किस नियम के तहत
दिया जा सकता था. रिपोर्ट में
इस सब को फर्जी बताया गया है.

खेमका
के तबादले पर हरियाणा सरकार
की सफाई
| नियम
के मुताबिक लिए चारों पद:
हरियाणा सरकार

रिपोर्ट में कहा गया है कि
इसी ओकारेशवर कंपनी को आगे
चलकर करोड़ों का मुनाफा हुआ.
इस कंपनी को अप्रैल और जून 2008
में ग्रुप हाउसिंग लाइसेंस
दिये गये. इस कंपनी की पूंजी 2005
में सिर्फ छह हजार रुपये थी
जो 2011 में बढ़कर 80 करोड़ से
ज्यादा हो गयी. जाहिर है कि
वाड्रा की मदद करने का भारी
मुनाफा इस कंपनी को मिला.

ईमानदार
छवि के रहे हैं अशोक खेमका
| वाड्रा
जमीन विवाद की जांच कब होगी?

रिपोर्ट के अनुसार चूंकि
सौदा हुआ ही नहीं, पैसों का
लेन देन हुआ ही नहीं, एडवांस
में न तो कुछ दिया गया और न ही
आगे कुछ देने का वायदा किया
गया लिहाजा पूरा सौदा की
फर्जी था. खेमका के अनुसार
रजिस्ट्रेशन एक्ट और आईपीसी
के तहत यह गंभीर आपराधिक
मामला बनता है. इसके लिए
अधिकतम सात साल कैद की सजा का
प्रावधान है.

अशोक
खेमका के ट्रांसफर पर नया
ट्विस्‍ट
| आखिर
किसको हुआ लैंड यूज़ बदलने से
फायदा?

रिपोर्ट के अनुसार कंपनी
एक्ट के तहत भी वाड्रा पर
मामला बनता है. उन्होंने
कंपनी के निदेशक होते हुए गलत
दस्तावेज पेश किये. इसके लिए
दो साल तक की कैद की सजा का
प्रावधान है.

तबादला
नियम के मुताबिक हुआ: अशोक
खेमका

खेमका कहते हैं कि दो महीने
बाद ही वाड्रा ने यह जमीन 58
करोड़ रुपये में डीएलएफ को दे
दी. इससे पहले डीएलएफ ने
वाड्रा को 25 करोड़ का एडवांस
दिया.

खेमका
ने कैसे बिगाड़ा वाड्रा का
खेल

रिपोर्ट के अनुसार डीएलएफ को
फर्जी चैक की जानकारी थी
लेकिन उसने इसे नजरअंदाज
किया. डीएलएफ के साथ वाड्रा
की कंपनी ने 5 अगस्त 2008 को
समझौता किया.

हरियाणा
की लैंड डील मामले में रॉबर्ट
वाड्रा को क्‍लीन चिट

इस 3.53 एकड़ में से 2.7 एकड़ जमीन
का कर्मिशयल लाइसेंस डीएलएफ
को बिना रजिस्ट्रेशन के
हस्तांतरित कर दिया गया. यह
अवैध था और इससे हरियाणा
सरकार को भी राजस्व की हानि
हुई.

वाड्रा
केस से लेना देना नहीं: खेमका

| खेमका
को धमकी भरे फोन की जांच
करेगी पुलिस

हैरानी की बात है कि डीएलएफ
ने दो बार ऐसे लाइसेंस के लिए
अर्जी डाली थी लेकिन वो
निरस्त हो गयी थी लेकिन
वाड्रा की कंपनी ने लाइसेंस
के लिए अप्लाई किया तो उसे
तुरंत मिल गया. ऐसा होते ही
उनकी जमीन की कीमत कई गुना बढ
गयी. वाड्रा को तो प्रति एकड़
15 करोड़  78 लाख रुपये का
प्रीमियम मिला वो भी जमीन
खऱीदने के महज दो महीनों के
भीतर.

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के शिकार 10 ईमानदार
अधिकारियों की कहानी

कुल मिलाकर रिपोर्ट में जमीन
सौदों में भारी फर्जीवाड़े
की बात कही गयी है. वाड्रा और
डीएलएफ ने नियमों की तो
अनदेखी की लेकिन हरियाणा
सरकार के जमीन के
रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस
देने के महकमे ने भी नियमों
को ताक पर रखा ताकि सोनिया
गांधी के दामाद को करोड़ों का
लाभ पहुंचाया जा सके.
रजिस्ट्रेशन एक्ट, कंपनी
एक्ट और आईपीसी के तहत
आपराधिक मामला बनता है.
रिपोर्ट कहती है कि ऐसे अपराध
के तहत कुल नौ साल तक की कैद की
सजा हो सकती है.

अफसरों
की नाक में सरकारों की नकेल
कसती रही है!

अब आगे क्या, बीजेपी समेत
विपक्षी दल हरियाणा सरकार पर
इस रिपोर्ट पर सफाई देने को
कहा है. यह दबाव आने वाले
दिनों में संसद में भी देखने
को मिल सकता है. आखिर ढाई
महीनों से हरियाणा सरकार इस
रिपोर्ट पर क्यों सोती रही.
अब अगर इस रिपोर्ट को सरकार
खारिज करती है तो खेमका नये
दस्तावेजों के साथ सामने आ
सकते हैं. वैसे भी जितने तथ्य
इस रिपोर्ट में दिये गये हैं
उसे सिरे से नजरअंदाज करना
हरियाणा सरकार के लिए बड़ा
मुश्किल होगा.

http://www.youtube.com/watch?v=UJ5FKyh3J9k

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