विकास के नारे के साथ लड़ाई की शुरुआत लेकिन अब ये हिंदू- मुस्लिम और सांप्रदायिकता तक क्यों पहुंची?

By: | Last Updated: Saturday, 5 April 2014 12:31 PM

नई दिल्ली. सहारनपुर से कांग्रेस उम्मीदवार इमरान मसूद ने बीजेपी के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के बारे में मारने काटने का बयान दिया था. मसूद के जवाब में राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने धमकी भरे लहजे में बयान दिया है कि चुनाव बाद पता चलेगा कि टुकड़े किसके होंगे.

 

कल ही बीजेपी महासचिव अमित शाह ने भी बदले की बात कही थी. मोदी ने विकास के नारे के साथ लड़ाई की शुरुआत की थी लेकिन अब ये लड़ाई सांप्रदायिकता तक पहुंच गई है. सवाल उठता है कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है ?

 

अमित शाह ने कहा कि ये चुनाव पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सम्मान का चुनाव है, जिन्होंने अपमान किया है उनसे बदले का चुनाव है. सवाल ये है कि किससे बदले की बात कही है अमित शाह ने. सूत्र बता रहे हैं कि अमित शाह के बयान का चुनाव आयोग संज्ञान ले सकता है. मोदी के खासमखास अमित शाह के बयान को कांग्रेस सांप्रदायिक बताकर गिरफ्तारी की मांग कर रही है. लेकिन मोदी को धमकाने वाले कांग्रेस के उम्मीदवार इमरान मसूद को राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के जवाब पर भी गौर कीजिए.

 

सहारनपुर से कांग्रेस उम्मीदवार इमरान मसूद ने मोदी के बारे में मारने काटने का बयान दिया था. मसूद के जवाब में राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने धमकी भरे लहजे में बयान दिया है कि चुनाव बाद पता चलेगा कि टुकड़े किसके होंगे. वसुंधरा ने ये बयान राजस्थान के करौली में कल दिया था. दरअसल वसुंधरा ने सहारनपुर से कांग्रेस उम्मीदवार इमरान मसूद के मोदी को ‘मारने काटने’ के बयान का जवाब दिया. लेकिन इस बयान पर जेल काट चुके मसूद अब दूसरे बयान से सुर्खियों में हैं. उन्होंने मोदी और वसुंधरा से जान का खतरा बताया है.

 

 

जहरीले बयान तो थम नहीं रहे लेकिन चुनाव प्रचार की शुरुआत ऐसी नहीं थी. सोनिया का हमला भी सुन लीजिए. देश बांटने का आरोप लगाने वाली सोनिया गांधी ने दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम से मुलाकात की और मुस्लिम वोट न बंटने देने की अपील की और इसका एलान भी हो गया.

 

 

सोनिया और शाही इमाम की मुलाकात के बाद खुद मोदी के मुंह से भी विकास का नारा पीछे छूट गया. सवाल उठने लगे कि क्या मोदी गुलाबी क्रांति के बहाने हिंदुत्व का मुद्दा उठा रहे हैं ?

 

इससे भी बड़ा सवाल ये कि आखिर विकास और सुशासन से शुरू हुई 2014 की लड़ाई आखिर हिंदू मुस्लिम और सांप्रदायिकता तक क्यों पहुंची?

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Web Title: विकास के नारे के साथ लड़ाई की शुरुआत लेकिन अब ये हिंदू- मुस्लिम और सांप्रदायिकता तक क्यों पहुंची?
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