विकास या गोरखालैंड: दार्जिलिंग के वोटरों के सामने मुश्किल विकल्प

By: | Last Updated: Monday, 31 March 2014 6:02 AM
विकास या गोरखालैंड: दार्जिलिंग के वोटरों के सामने मुश्किल विकल्प

कलिंपोंग: गोरखालैंड के वादे पर भरोसा कर पश्चिम बंगाल के इस पहाड़ी क्षेत्र के लोगों ने 2009 में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) प्रत्याशी को वोट दिया था. इस चुनाव में भी पृथक राज्य का सपना अधूरा ही है और लोग राज्य में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस का विकास का वादा और बीजेपी को फिर से मौका देने के बीच झूल रहे हैं.

 

जहां तृणमूल कांग्रेस ने नामचीन फुटबॉल खिलाड़ी भाइचुंग भूटिया को उतारा है. भूटिया विकास और प्रगति का वादा कर रहे हैं तो गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) समर्थित बीजेपी के सुरिंदर सिंह अहलूवालिया ने गोरखालैंड का नारा फिर से बुलंद किया है.

 

दार्जिलिंग लोकसभा क्षेत्र पश्चिम बंगाल की 42 सीटों में से एक है जिसमें कलिंपोंग और खार्सियांग अनुमंडल शामिल हैं. चुनाव आयोग के आंकड़े के मुताबिक, 1,215,464 मतदाता हैं.

 

कलिंपोंग में डेयरी चलाने वाले लोक बहादुर खड़गा ने आईएएनएस से कहा, “इस चुनाव में मैं नहीं जानता कि किसे चुना जाए. यदि भुटिया जीतते हैं तो कम से कम राज्य सरकार विकास के लिए फंड तो जारी करेगी. लेकिन इसका मतलब गोरखालैंड का सपना कभी पूरा नहीं हो पाएगा.”

 

पहाड़ी क्षेत्र में 17 अप्रैल को मतदान होंगे. गोरखालैंड आंदोलन से खड़गा 1986 से जुड़े हैं. उन्होंने कहा कि जीजेएम ने पृथक राज्य के मुद्दे को केवल राजनीतिकरण किया है और खुद को राज्य सरकार के हाथों बेच दिया.

 

खड़गा ने कहा, “जीजेएम के नेताओं ने लोगों का इस्तेमाल किया. कई बार उन्होंने जीटीए के खिलाफ प्रदर्शन करने की घोषणा की, जबकि दूसरी ओर उनलोगों ने इसे स्वीकार कर लेंगे. लोग मूर्ख नहीं हैं.”

 

जीटीए दार्जिलिंग पर्वतीय इलाके के लिए अर्ध स्वायत्तशासी प्रशासनिक निकाय है जिसका गठन 2012 में जीजेएम और ममता बनर्जी सरकार के बीच समझौते के बाद किया गया. 2009 में लोगों ने बीजेपी के जसवंत सिंह को चुना था. इस बार बीजेपी ने अहलूवालिया को उतारा है.

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