विरासत की सियासत पर एक नजर

By: | Last Updated: Tuesday, 1 April 2014 4:45 PM

नई दिल्ली. वंशवाद का सबसे ज्यादा आरोप लगता है नेहरू गांधी परिवार पर. देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का परिवार आज भी देश का सबसे शक्तिशाली परिवार है. नेहरू ने अपनी विरासत इंदिरा गांधी को सौंपीं. इंदिरा के निधन के बाद राजीव गांधी को विरासत मिली. राजीव गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस का नेतृत्व करने की विरासत सोनिया गांधी संभाल रही हैं. सोनिया कांग्रेस अध्यक्ष हैं और रायबरेली से चुनाव लड़ रही हैं. जबकि बेटे राहुल गांधी कांग्रेस उपाध्यक्ष हैं और अमेठी से कांग्रेस उम्मीदवार हैं.  बहुमत आता है तो कांग्रेस की तरफ से पीएम पद के सबसे बड़े दावेदार भी.

 

वहीं गांधी नेहरू परिवार का एक और सदस्य भी यूपी से ताल ठोंक रहा है. इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी की पत्नी मेनका गांधी पीलीभीत से बीजेपी के टिकट पर मैदान में हैं. जबकि उनके बेटे वरूण गांधी सुल्तानपुर से बीजेपी की टिकट पर चुनाव मैदान में हैं.

 

सुल्तानपुर अमेठी और रायबरेली के बिल्कुल पास की सीट है तो वंशवाद में विरासत की जंग यूपी के अवध क्षेत्र में जोरों पर होगी.

 

बिहार की राजनीति का बड़ा नाम लालू प्रसाद यादव. लालू तो चारा घोटाले में सजा मिलने के बाद अयोग्य घोषित हो चुके हैं लेकिन उनका परिवार लोकसभा में पहुंचने की दौड़ में है. बेटी मीसा पाटिलपुत्र सीट से आरजेडी की टिकट पर चुनाव मैदान में हैं और जाहिर तौर पर वो लालू की विरासत के नाम पर वोट मांग रही हैँ. लालू की पत्नी राबड़ी देवी सारण सीट से आरजेडी की प्रत्याशी हैं दिलचस्प ये है कि लालू यादव के कारण ही राजनीति में सक्रिय हुए साधु यादव अपनी बहन राबड़ी के सामने निर्दलीय मैदान में हैं.

 

बिहार की राजनीति में रामविलास पासवान आजकल बड़ा नाम ना हों लेकिन फिर भी बिहार के चार फीसदी मतों की ठेकेदारी रखते हैं. बिहार में कुल सात सीटें हिस्से में आई हैं.

 

सात सीटों में हाजीपुर सीट से लोकजनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष राम विलास पासवान खुद लड़ रहे हैं. जमुई की सीट को उन्होंने अपने बेटे चिराग पासवान के नाम कर दिया है. जबकि समस्तीपुर सीट से उनके भाई रामचंद्र पासवान चुनाव मैदान में हैं. 

 

उत्तर प्रदेश की राजनीति में यादव परिवार ताल ठोंक कर खड़ा है. नेताजी यानी मुलायम सिंह यादव ने समाजवाद के नाम पर जो पार्टी खड़ी की उसकी बुनियाद अब उनके भाई रामगोपाल और शिवपाल यादव हैं. समाजवादी पार्टी की इमारत को अखिलेश यादव और डिंपल यादव और ऊंचा कर रहे हैं.

 

 

मुलायम मैनपुरी और आजमगढ़ से चुनाव लड़ रहे हैं वहीं डिंपल यादव कन्नौज से एसपी उम्मीदवार हैं. अखिलेश यादव यूपी के मुख्यमंत्री हैं ही. वहीं परिवारवाद की ये इमारत और आगे बढ़ रही है. फिरोजाबाद लोकसभा सीट से एसपी नेता प्रोफेसर राम गोपाल यादव अपने बेटे अक्षय यादव का राजनीति में पदार्पण करवा रहे हैं. वहीं बदायूं से मुलायम के भतीजे धर्मेंद्र यादव चुनाव मैदान में हैं. यानी यादव परिवार 5 जगहों से चुनाव लड़ रहा है. 

 

हरियाणा की राजनीति में भी वंशवाद की बेल खूब फल रही है. हरियाणा के मुख्यमंत्री हैं कांग्रेस नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा. पिता मुख्यमंत्री हों तो बेटे को लोकसभा टिकट देने की प्रथा चल ही पड़ी है तो बेटे दीपेंदर हुड्डा को रोहतक से कांग्रेस प्रत्याशी बनाया गया है. दीपेंद्र दो बार कांग्रेस सांसद रह चुके हैँ.

 

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय लोकदल चलाते हैं अजित सिंह. अजित सिंह देश के प्रधानमंत्री रहे चौधरी चरण सिंह के बेटे हैं और उनकी राजनैतिक विरासत संभालते हैं. खुद वो अपनी बागपत सीट से उतर रहे हैं. वहीं अजित सिंह के बेटे जयंत चौधरी मथुरा से आरएलडी के उम्मीदवार बने हैं. पिछली बार वो मथुरा से ही जीते थे.

 

विवादित ढांचे के ढहने के दौरान यूपी के सीएम हुआ करते थे कल्याण सिंह. कभी यूपी की राजनीति में इस चमकते चेहरे का रूतबा तो घटा लेकिन विरासत आगे बढाने की लालसा नहीं. कल्याण सिंह के बेटे राजबीर सिंह एटा से चुनाव मैदान में हैं.

 

 

मोदी भले ही कांग्रेस पर शहजादे के नाम से वार करते रहे हैं पर बीजेपी के पास अपने शहजादे भी हैँ. हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के बेटे अनुराग ठाकुर हमीरपुर लोकसभा सीट से दोबारा मैदान में हैं.

 

राजस्थान में वसुंधरा राजे की सरकार बन चुकी हैं. वसुंधरा राजे और मजबूत हुई हैं तो उनके बेटे दुष्यत सिंह लोकसभा चुनावों में बीजेपी के प्रत्याशी बन चुके हैं. उन्हें झालावाड़ से खड़ा किया गया है.

 

कुछ ऐसा ही हाल छत्तीसगढ़ में भी है. यहां रमन सिंह मुख्यमंत्री हैं. बीजेपी ने उनके बेटे अभिषेक को राजनादगांव लोकसभा क्षेत्र से उतर दिया है.

 

सुपर वंशवाद वाली सीट

 

बीजेपी के राष्ट्रीय स्तर के नेता प्रमोद महाजन हुआ करते थे. उनका तो निधन हो गया लेकिन उनकी विरासत को आगे बढ़ा रही हैं पूनम महाजन. जिन्हें बीजेपी ने मुंबई नॉर्थ सेंट्रल लोकसभा सीट से सुनील दत्त की बेटी प्रिया दत्त के खिलाफ मैदान में उतारा है. दिलचस्प ये है कि इसी सीट से एसपी ने महाराष्ट्र में विधायक अबु आजमी के बेटे अबु फरहान आजमी को मैदान में उतारा है. 

 

हरियाणा के हिसार में दो कद्दावर लालों के लाल मैदान में हैं. देवीलाल के परपोते और अजय चौटाला के बेटे दुष्यंत चौटाला हिसार से इंडियन नेशनल लोकदल की तरफ से मैदान में हैं. वहीं उनके सामने हैं भजनलाल के बेटे कुलदीप बिश्नोई. बिश्नोई की पार्टी हरियाणा जनहित कांग्रेस का बीजेपी से गठबंधन है. हिसार से पिछला चुनाव भी कुलदीप बिश्नोई ने जीता था. 

 

पंजाब की राजनीति के माहिर खिलाड़ी हैं कैप्टन अमरिंदर सिंह. पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं  इस बार कांग्रेस ने उन्हें अरुण जेटली के खिलाफ अमृतसर से उतारा है. लेकिन अमरिंदर ही नहीं उतरे उनकी पत्नी परनीत कौर भी मैदान में हैं. तीन बार पटियाला से कांग्रेस सांसद रह चुकी और केंद्र में विदेश राज्य मंत्री रह चुकीं परनीत कौर को चौथी बार भी टिकट मिली है.

 

पंजाब की भटिंडा सीट पर भी विरासत की जबरदस्त जंग चल रही है. एक तरफ खड़ी हैं अकाली दल बीजेपी गठबंधन की प्रत्याशी हरसिमरत कौर बादल. पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की बहू और उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल की पत्नी. मनप्रीत सिंह बादल की पत्नी हैं हरसिमरत कौर. लेकिन उन्हें चुनौती दे रहे हैं कांग्रेस-पी.पी.पी. गठबंधन प्रत्याशी मनप्रीत सिंह बादल जो रिश्ते में हरसिमरत कौर के देवर लगे हैं.

 

पूर्वी दिल्ली हॉट सीट

 

पूर्वी दिल्ली सीट पर लगातार 2 बार से कांग्रेस सांसद संदीप दीक्षित कांग्रेस प्रत्याशी बने हैं. दिल्ली की कुर्सी पर पिछले 15 साल से शीला दीक्षित काबिज थीं संदीप दीक्षित उन्हीं के बेटे हैं. लेकिन यहां आम आदमी पार्टी ने उनके मुकाबले उतारा है महात्मा गांधी के पोते राजमोहन गांधी को.

 

दिल्ली के मुख्यमंत्री हुआ करते साहिब सिंह वर्मा. अब उनकी विरासत के आगे बढ़ा रहे हैं प्रवेश सिंह जिन्हें बीजेपी ने पश्चिमी दिल्ली से टिकट दिया है. दिसंबर 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में महरौली से विधायक चुने गए थे प्रवेश.

 

बिहार के हजारीबाग से बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा ने अपने बेटे जयंत सिन्हा को टिकट दिलवाया है.

 

देश में वित्तमंत्री का ओहदा संभाल रहे हैं पी चिदंबरम. लेकिन राजनीति कि विरासत को उन्होंने आगे बढ़ा दिया है अपने बेटे कार्ती चिदंबरम को आगे बढ़ा कर. कार्ती को कांग्रेस ने शिवगंगा लोकसभा क्षेत्र से टिकट दिया है. 

 

मुरली देवड़ा कांग्रेस के पुराने नेता हैं उनके बेटे हैं मिलिंद देवड़ा जिन्हें दक्षिण मुंबई सीट से फिर से उतारा है कांग्रेस ने.

 

कभी शिवसेना के धाकड़ नेता हुआ करते थे नारायण राणे आजकल कांग्रेस के साथ हैं. कांग्रेस ने उनको इनाम देते हुए उनके बेटे निलेश राणे को रत्नागिरी सिंधुदुर्ग सीट से टिकट दिया है.

 

वहीं तृणमूल कांग्रेस की तरफ से ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को टिकट दिया गया है डायमंड डार्बर सीट से.

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