व्यापम घोटाला: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के गले की फांस बनें ये नेता

By: | Last Updated: Saturday, 21 June 2014 5:02 AM
व्यापम घोटाला: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के गले की फांस बनें ये नेता

नई दिल्ली: एमपी के द ग्रेट भर्ती घोटाले के चक्रव्यूह में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बुरी तरह घिरे नजर आ रहे हैं. उनकी कैबिनेट का एक पूर्व मंत्री हाईकोर्ट की निगरानी में जांच कर रही एसटीएफ के हत्थे चढ़ चुके हैं तो उनके पूर्व सहायक प्रेम प्रसाद का नाम भी आ गया है. इसके अलावा आरएसएस के करीबी खनन कारोबारी सुधीर शर्मा की गिरफ्तारी की मांग भी उठ रही है. कुल मिलाकर सांसत में है शिवराज सिंह का तीसरा कार्यकाल और विपक्ष मांग रहा है इस्तीफा.

 

 

ये तीन चेहरे मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार और उसके मुखिया शिवराज सिंह चौहान के गले की फांस बन गए हैं. मध्य प्रदेश के सबसे बड़े भर्ती घोटाले में पूर्व उच्च और तकनीकि शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा गिरफ्तार हैं, खुद मुख्यमंत्री के सहायक प्रेम प्रसाद पर फर्जीवाड़े का आरोप लग चुका है और तीसरी तस्वीर में दिख रहे सुधीर शर्मा पर लटक रही है गिरफ्तारी की तलवार.

 

जून को विदेश दौरे से लौटे शिवराज की भर्ती घोटाले पर प्रतिक्रिया के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहा था मीडिया लेकिन शिवराज ने सिर्फ इतना कहकर चुप्पी साध ली कि कानून अपना काम करेगा. दरअसल उनकी गैरमौजूदगी में रविवार को उनके कैबिनेट में उच्च शिक्षा मंत्री रह चुके लक्ष्मीकांत शर्मा को भर्ती घोटाले के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था और शर्मा के रसूख को देखते हुए ये बेहद चौंकाने वाली खबर थी.

 

शिवराज की फांस नंबर -1

लक्ष्मीकांत शर्मा- लक्ष्मीकांत वर्मा को एसटीएफ ने 15 जून को भोपाल में उनके घर से गिरफ्तार किया तो मध्यप्रदेश की राजनीति में हलचल मचना तय था. लक्ष्मीकांत वर्मा उमा भारती कैबिनेट से लेकर शिवराज सिंह की कैबिनेट तक लगातार 10 साल तक मध्य प्रदेश के मलाईदार विभागों के मंत्री रह चुके थे और माना जा रहा था कि एसटीएफ उन पर हाथ डाल पाए ये आसान नहीं है. इससे खुद विपक्ष भी चौंक गया.

 

मध्यप्रदेश की राजनीति में 52 साल के लक्ष्मीकांत शर्मा के कद का अंदाजा इस बात से ही लग जाता है कि उन्हें बीजेपी में डार्क हॉर्स यानी छुपा रुस्तम कहा जाता है. एक बार तो खुद शिवराज सिंह के विकल्प के तौर पर भी उनका नाम आगे आ चुका है. लक्ष्मीकांत शर्मा का ये कद और साल 2003 से 2013 के बीच खनन मंत्रालय से लेकर उच्च और तकनीकि शिक्षा मंत्रालय जैसे अहम विभाग में उनकी नियुक्ति के पीछे बड़ी वजह है उनकी RSS से करीबी .

 

लक्ष्मीकांत शर्मा जब भी लोगों के सामने आते हैं तो उनके माथे पर लंबा तिलक उनके गहरे धार्मिक झुकाव का प्रचार करता नजर आता है. 16 जून, 2014 को जिस वक्त उन्हें गिरफ्तार किया गया था उस वक्त भी उन्होंने एसटीएफ के अधिकारियों को लंबा इंतजार करवाया था – वजह ये बताई गई थी कि वो पूजा कर रहे हैं. यहां तक कि जब एसटीएफ के अधिकारी उन्हें अपने साथ ले जाने लगे तो उन्होंने धार्मिक किताबें साथ ले जाने की जिद की थी.

 

इसकी भी वजह है. लक्ष्मीकांत शर्मा ने मद्य प्रदेश के सिरोंज जिले में एक पुजारी के तौर पर जिंदगी की शुरुआत की थी – इस दौरान आरएसएस कार्यकर्ताओं से हुआ संपर्क उनके काम आया और फिर उन्हें सिरोंज जिले के ही सरस्वती शिशु मंदिर में टीचर की नौकरी मिल गई. महज 400 रुपये की तनख्वाह पाने वाले लक्ष्मीकांत शर्मा ने स्कूल से संघ को साधा और संघ के जरिए बीजेपी को. बीजेपी में आने के बाद लक्ष्मीकांत शर्मा 1993 में ही सिंरोज से पहली बार विधायक चुने गए थे. लेकिन असल फायदा तब मिला जब बीजेपी सत्ता में आई

 

साल 2003 में जब उमाभारती के नेतृत्व में बीजेपी सरकार बनी तो उन्हें खननमंत्री बनाया गया. उमा के बाद बाबूलाल गौर मुख्यमंत्री बने तो उनकी कैबिनेट में भी मंत्री रहे शर्मा. शिवराज सिंह चौहान ने भी उन्हें अपनी कैबिनेट में शामिल किया. शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें उच्च और तकनीकि शिक्षा मंत्रालय सौंपा. इसके अलावा लक्ष्मीकांत से पास संस्कृति और जनसंपर्क मंत्रालय भी था. लेकिन वो इस बार चुनाव नहीं जीत पाए .

 

जितने अहम विभाग उतने विवाद. खनन मंत्री रहते हुए लक्ष्मीकांत शर्मा का नाम मध्य प्रदेश के खनन घोटाले में भी आया था. और जब उन्हें शिक्षा मंत्रालय मिला तो व्यासायिक परीक्षा मंडल आरोप है कि वो पहले से वहां चल रहे फर्जीवाड़े में शामिल हो गए.

 

आरोप है कि इस मामले में पहले से गिरफ्तार लक्ष्मीकांत शर्मा ओएसडी ओ पी शुक्ला को खुद डेपुटेशन पर लाए थे. ओपी शुक्ला भर्ती घोटाले में कमाए पैसों के साथ गिरफ्तार हुए. दूसरे गिरफ्तार आरोपी व्यासायिक परीक्षा मंडल के नियंत्रक पंकज त्रिवेदी की नियुक्ति के पीछे भी शर्मा का ही आशीर्वाद था. पंकज तो उनके बंगले पर अक्सर देखा भी जाता था और आरोप है कि पंकज ही शर्मा से फर्जी भर्ती वाले कैंडीडेट की लिस्ट लाया करता था.

 

एसटीएफ ने गिरफ्तारी से पहले दो बार लक्ष्मीकांत शर्मा से पूछताछ की थी लेकिन इस दौरान घोटाले से ज्यादा शर्मा अपने संपर्कों का हवाला देते रहे. गिरफ्तारी के बाद उन्होंने ये भी कहा कि वो बड़े लोगों के लिए कुर्बानी दे रहे हैं.

 

मंत्री रहते हुए लक्ष्मीकांत शर्मा ने शिवराज सिंह चौहान को साध रखा था और अब आरोप लग रहा है कि आरएसएस से करीबी और सिर पर सीएम के हाथ ने ही उन्हें भर्ती का फर्जी खेल खेलने का मौका दिया और किसी ने कोई कार्रवाई नहीं की

 

मध्य प्रदेश का भर्ती घोटाला दरअसल दो हिस्सों में बंटा हुआ है. पहला तो ये कि मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी प्रवेश परीक्षाओं में धांधली हुई. वहीं दूसरा सरकारी नौकरियों के लिए हुई परीक्षाओं में भी गड़बड़ी करके नाकाबिल लोगों को नौकरी दी गई. पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा को फिलहाल शिक्षकों की भर्ती के लिए हुई परीक्षा में फर्जीवाड़े के आरोप में गिरफ्तार किया गया लेकिन इस बार का चुनाव हार चुके शर्मा पर मेडिकल और इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षाओं के फर्जीवाड़े का भी आरोप है.

 

शिवराज की फांस नंबर -2

सुधीर शर्मा- शिवराज सिंह चौहान के गले की फांस बन गया है भर्ती घोटाले में आया एक और बड़ा नाम – खनन कारोबारी सुधीर शर्मा. वही सुधीर शर्मा जिस पर खनन घोटाले के दौरान छापा पड़ा था और उसकी डायरी ने कई बड़े चेहरों पर सवालिया निशान लगा दिया था. आरएसएस से सुधीर की करीबी शिवराज सिंह चौहान के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है.

 

आरोप है कि सुधीर शर्मा भर्ती घोटाले का बड़ा खिलाड़ी है लेकिन उसकी भूमिका से पर्दा उठना अभी बाकी है. मामले में गिरफ्तार हो चुके आरोपियों ने पूछताछ में इस मामले से उसके तार जुड़े होने की बात जरूर कबूल कर ली है. ये भी कहा जा रहा है कि व्यापम के पंकज त्रिवेदी को उच्च शिक्षा विभाग से परीक्षा मंडल में लाने का फैसला भी लक्ष्मीकांत शर्मा ने सुधीर शर्मा के कहने पर ही किया था

 

दरअसल लक्ष्मीकांत शर्मा की तरह ही कभी स्कूल टीचर रहा सुधीर शर्मा आरएसएस का बेहद करीबी है. आरएसएस की मीटिंगों में उसकी मुलाकात लक्ष्मीकांत शर्मा से हुई. मंत्री बनने के बाद लक्ष्मीकांत शर्मा उसे डेपुटेशन पर खनन मंत्रालय में ओएसडी बनाकर ले आए. देखते देखते सुधीर शर्मा खनन का बड़ा कारोबारी बन गया जो अब हेलिकॉप्टर का मालिक भी है. माना जा रहा है कि सुधीर शर्मा भर्ती घोटाले के कई बड़े राज से पर्दा उठा सकता ह

 

शिवराज की फांस नंबर -3

प्रेम प्रसाद- मध्य प्रदेश के फर्जी भर्ती घोटाले की आंच अब सीधे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के दफ्तर तक भी पहुंचने लगी है. और उसकी वजह बना है ये चेहरा. ये हैं प्रेम प्रसाद जो खुद शिवराज सिंह चौहान के ओएसडी रह चुके हैं. आरोप है कि प्रेम प्रसाद ने अपनी बेटी अनीता कुमारी को मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाने के लिए लक्ष्मीकांत शर्मा के रैकेट का इस्तेमाल किया.

 

दरअसल जांच के दौरान एसटीएफ को भर्ती घोटाले में गिरफ्तार व्यावसायिक परीक्षा मंडल के सिस्टम एनालिस्ट नितिन महिंद्रा के कंप्यूटर से एक एक्सल सीट मिली है जिसमें अनीता कुमारी नाम के आगे प्रेम प्रसाद का नाम लिखा है. जांच के मुताबिक व्यापम के मुख्य परीक्षा नियंत्रक और आरोपी पंकज त्रिवेदी ने प्रेम प्रसाद की मुलाकात सीएम के पीए के तौर पर नितिन महिंद्रा से करवाई थी जिसके बाद उसके दाखिले का इंतजाम किया गया.

 

शिवराज सिंह चौहान ने प्रेम प्रसाद को ओएसडी पद से हटा दिया है और फिलहाल प्रसाद अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत की कोशिश में जुटे हैं.

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: व्यापम घोटाला: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के गले की फांस बनें ये नेता
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017