शारदा चिट फंड कंपनी पर जारी है बंगाल में हंगामा

शारदा चिट फंड कंपनी पर जारी है बंगाल में हंगामा

By: | Updated: 25 Apr 2013 01:15 AM


कोलकाता:
शारदा चिट फंड कंपनी को
लेकर हाहाकार मचा हुआ है.
सोनमर्ग से गिरफ्तार कंपनी
के सीएमडी सुदीप्तो सेन औऱ दो
अधिकारियों को बीती रात
पुलिस कोलकाता लेकर आई तो
एयरपोर्ट पर ठगे गए लोगों ने
जमकर हंगामा किया.

लोगों
को राहत देने के लिए ममता ने
पांच सौ करोड़ का राहत फंड
बनाया है. कोलकाता में
विधाननगर कोर्ट के बाहर
सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. आज
आरोपियों की पेशी होगी.




सवाल ये है कि जिस घोटाले का
आरोप ममता के सांसदों पर लग
रहा है उसकी भरपाई जनता के
पैसे से क्यों होनी चाहिए?




शारदा चिट फंड ग्रुप के
सीएमडी सुदीप्तो सेन और इनके
दो सहयोगियों अरविंद सिंह
चौहान और देबजानी मुखर्जी को
चार दिन की ट्रांजिट रिमांड
पर जम्मू-कश्मीर के गांदरबल
से कोलकाता लाया गया.




कोलकाता एयरपोर्ट से बाहर
निकलने पर निवेशकों ने इनके
खिलाफ जमकर नारेबाजी की. आज
इन तीनों आरोपियों को
कोलकाता के विधान नगर कोर्ट
में पेश किया जाएगा.




इस बीच 20 हजार करोड़ रुपये के
इस कथित चिट फंड घोटाले को
लेकर ममता बनर्जी की सरकार
बड़ी मुसीबत में फंस गई है.
वजह ये है कि शारदा चिट फंड
कंपनी के सीएमडी सुदीप्तो
सेन ने सीबीआई को चिट्ठी
लिखकर सत्ताधारी तृणमूल
कांग्रेस के दो राज्यसभा
सांसदों श्रींजॉय बोस और
कुणाल घोष पर ब्लैक मेल करने
का आरोप लगाया है.

चिट्ठी
में सुदीप्तो ने लिखा है,"
टीएमसी सांसद कुणाल घोष और
श्रींजॉय बोस प्रतिदिन
पत्रिका के जरिए शारदा चिट
फंड कंपनी के खिलाफ अभियान
चलाए हुए थे...मुझे लगा कि इसका
जवाब देने के लिए मुझे भी
मीडिया में आना पड़ेगा...उसी
समय मैंने चैनल-10 खरीदा..कुणाल
धोष और श्रींजॉय बोस ने शारदा
कंपनी के खिलाफ खबर ना दिखाने
के एवज में मुझसे हर महीने 60
लाख रुपए लिए...साथ ही मुझे
कुणाल धोष को 15 लाख रुपये हर
महीने की सैलरी पर चैनल-10 का
सीईओ बनाना पड़ा...राज्य
सरकार से मुझे मदद दिलाने के
नाम पर पिछले दो साल में
श्रींजॉय बोस मुझसे करीब 20
करोड ले चुके हैं...बाद में
दोनों ने दबाव डालकर केवल 55
लाख में चैनल-10 बेचने का सौदा
कर दिया."

सुदीप्तो की
लिखी इस चिट्ठी के सार्वजनिक
होने के बाद ममता बनर्जी को
सरकार के बचाव में सामने आना
पड़ा. कहना पड़ा की अगर
टीएमसी सांसद दोषी होंगे तो 
उन्हें बक्शा नहीं जाएगा.
हालांकि इस दौरान पीड़ितों
के लिए 500 करोड़ रुपये के
रिलीफ फंड बनाने का एलान कर
ममता ने एक नए विवाद को भी
जन्म दे दिया.

सवाल उठ रहे
हैं कि टीएमसी सांसदों की
मिलीभगत से किए गए घोटाले की
भरपाई के लिए वो सरकारी खजाने
को कैसे खाली कर सकती हैं? इस
बीच आरोपी टीएमसी सांसदों ने
भी खुद को बेदाग बताया है.

शारदा
चिटफंड कंपनी के वाइस
प्रेसीडेंट सोमनाथ दत्ता के
साथ अपनी तस्वीर को लेकर
तृणमूल कांग्रेस की सांसद
शताब्दी रॉय को भी सफाई देनी
पड़ी है. ये तस्वीर 2009 के
लोकसभा चुनाव की है तब सोमनाथ
शताब्दी राय के सहयोगी थे.

शारदा
चिट फंड घोटाले ने लेफ्ट को
भी ममता सरकार पर हमला बोलने
का मौका दे दिया है. सीपीआई ने
मांग की है कि कोर्ट की
निगरानी में इस घोटाले की
सीबीआई जांच होनी चाहिए.

इस
बीच पूरे पश्चिम बंगाल में
चिंट फंड घोटाले में लुट चुके
निवेशकों का धरना प्रदर्शन
जारी है. निवेशकों को जहां
मौका मिल रहा है वो शारदा के
एजेंट और दफ्तरों पर अपना
गुस्सा उतार रहे हैं.




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