संसद के सेंट्रल हॉल में देखने को मिले कुछ दुर्लभ क्षण

संसद के सेंट्रल हॉल में देखने को मिले कुछ दुर्लभ क्षण

By: | Updated: 20 May 2014 01:56 PM
नयी दिल्ली. संसद के केन्द्रीय कक्ष में आज कुछ दुर्लभ क्षण आये जब स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार भाजपा के रूप में कोई दल लोकसभा चुनाव में सबसे बड़े गैर कांग्रेसी दल के तौर पर उभरा और उसके सांसदों ने यहां एकत्रित हो कर नरेंद्र मोदी को संसदीय दल का नेता चुना.

 

रोचक बात है कि तीन बार गुजरात के मुख्यमंत्री रहे मोदी पहली बार संसद के केन्द्रीय कक्ष में थे जहां उनकी पार्टी के नेताओं और राजग के 29 सहयोगी दलों के नेताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया.

 

कार्यक्रम में माहौल उस समय बेहद भावुक हो गया जब पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की आंखें नम हो गयीं और ऐसा ही मोदी के साथ भी हुआ.

 

संसद में प्रवेश से पहले मोदी ने ‘लोकतंत्र के मंदिर’ के सम्मान में यहां की सीढ़ियों पर मत्था टेका. उन्होंने बाद में लोकतंत्र की महिमा का बखान करते हुए कहा कि इसी व्यवस्था में गरीब परिवार से आया व्यक्ति देश के सर्वोच्च पद पर पहुंच सकता है.

 

गौरतलब है कि 1984 में 2 सीट प्राप्त करने वाली भाजपा को 1998 और 99 में 182 सीटों तक पहुंचाने में विशेष योगदान देने वाले लालकृष्ण आडवाणी सहित सभी वरिष्ठ नेताओं ने इस लोकसभा चुनाव में भाजपा को अपने बूते बहुमत दिलाने के लिए मोदी का अभिवादन किया.

 

भाजपा को इतनी बुलंदियों तक पहुंचाने के लिए मोदी का आभार व्यक्त करते हुए आडवाणी ने कहा कि ‘नरेन्द्र भाई ने कृपा की है :पार्टी संसदीय दल का नेता बनना स्वीकार करके: और उनके जीवन में यह दिन ऐतिहासिक है.

 

आडवाणी के बयान से भावुक हो गये मोदी ने रंधे हुए गले से कहा, ‘‘आडवाणीजी ने एक शब्द कहा और मैं आडवाणी से प्रार्थना करंगा कि वे इस शब्द का इस्तेमाल न करें. उन्होंने कहा है कि ‘नरेंद्र भाई ने कृपा की है’. क्या मां की सेवा कभी कृपा हो सकती है? कतई नहीं हो सकती.’’

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