सचिन: विश्वकप फाइनल की हार सबसे निराशाजनक पल, सभी खिलाड़ियों की ओर से ले रहा हूं 'भारत रत्न'

By: | Last Updated: Sunday, 17 November 2013 5:29 AM

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<b>मुंबई:</b> देश का सर्वोच्च
नागरिक सम्मान पाने वाले
पहले खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर
ने आज कहा कि वह पूरे खेल जगत
की ओर से यह सम्मान ले रहे हैं
और उन्हें उम्मीद है कि उनके
बाद बाकी खिलाड़ियों के लिये
भी दरवाजे खुलेंगे. सचिन ने
कहा,” क्रिकेट की पिच मेरे लिए
मंदिर जैसी है, क्रिकेट का 24
साल का सफर मेरे लिए सपने
जैसा रहा, क्रिकेट से विदा
होने का कोई खेद नहीं.”
क्रिकेट को अपनी ‘आक्सीजन’
बताते हुए चैम्पियन
बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने
आज कहा कि उन्हें अहसास हो
गया था कि अब खेल को अलविदा
कहने का समय आ गया है लेकिन वह
भविष्य में किसी रूप में
क्रिकेट से जुड़े रहेंगे .<br />
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वेस्टइंडीज के खिलाफ कल 200वां
और आखिरी टेस्ट खेलकर 24 बरस के
अंतरराष्ट्रीय कैरियर को
अश्रुपूरित विदाई देने वाले
तेंदुलकर ने आज संन्यास के
बाद पहली प्रेस कांफ्रेंस
में लगभग एक घंटे तक खुलकर
मीडिया के हर सवाल का सहजता
से जवाब दिया .
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उन्होंने संन्यास के अपने
फैसले पर कहा ,‘‘ मेरे
संन्यास को लेकर वषरें से
सवाल उठ रहे थे और मैं हमेशा
कहता आया था कि जिस दिन यह
अहसास होगा कि मुझे खेलना रोक
देना चाहिये, मैं खुद ऐलान
करूंगा . मेरे शरीर ने संदेश
दे दिया था कि अब वह और बोझ
नहीं ले सकता . अ5यास में
प्रयास करना पड़ रहा था और यह
अहसास होते ही मैने फैसला ले
लिया जिसका मुझे कोई खेद नहीं
है .’’ उन्होंने कहा ,‘‘ 24 साल
तक देश के लिये खेलते हुए
मैने अलग अलग चुनौतियों का
सामना किया लेकिन परिवार,
कोचों, दोस्तों और साथी
खिलाड़ियों की मदद से यह सफर
स्वर्णिम रहा . मुझे कल रात तक
यकीन नहीं हो रहा था कि अब
कहीं नहीं खेलूंगा . लेकिन
मुझे कोई खेद नहीं है . यह सही
वक्त था और मैने अपने सफर का
पूरा मजा लिया .’’<br />तेंदुलकर
से जब पूछा गया कि कल जब
भावनाओं का ज्वार उमड़ रहा था
तो क्या उन पर भी जज्बात हावी
थे, उन्होंने कहा, ‘‘संन्यास
का मेरा फैसला सही था. मेरे
परिवार में सभी भावुक हो रहे
थे. मैं भावुक तब हुआ जब साथी
खिलाड़ियों ने मुझे विदाई दी.
भावुक तब हुआ जब मैं विकेट के
पास गया. असल में मैं तब विकेट
से बात कर रहा था. ’’ उन्होंने
कहा, ‘‘अब वह पल देखता हूं तो
थोड़ा भावुक हो जाता हूं
लेकिन मुझ पर भावनाएं ज्यादा
हावी नहीं थी क्योंकि मैंने
सही फैसला किया. जब मैं यह सोच
रहा था कि अब मैं कभी भारत का
प्रतिनिधित्व नहीं कर
पाउंगा तब मैं कुछ भावुक हो
रहा था. ’’<br />उन्होंने कहा,
‘‘मैं आगे भी निश्चित रूप से
क्रिकेट से जुड़ा रहूंगा. मैं
पहले भी युवाओं की मदद करता
रहा हूं. मैं अंडर . 19, रणजी
ट्राफी में खिलाड़ियों के
साथ बात करता रहा हूं. मुझे
युवाओं से बात करना, अपना
ज्ञान बांटना पसंद है. मैं इस
तरह की बातचीत का लुत्फ उठाता
हूं और आगे भी ऐसा करता
रहूंगा. मुझे युवाओं की मदद
करना पसंद है. ’’ तेंदुलकर ने
इसके साथ ही कहा कि उन्होंने
अभी अपने भविष्य के लिये कोई
योजना नहीं बनायी है.
उन्होंने हल्के फुल्के
अंदाज में कहा, ‘‘मैंने 24 साल
तक क्रिकेट खेली और अभी मुझे
संन्यास लिये हुए 24 घंटे ही
हुए है. कम से कम मुझे इस पर
विचार करने के लिये 24 दिन का
समय तो दीजिए. उसके बाद ही
विचार करूंगा कि आगे क्या
करना है.’’<br />24 बरस के
अंतरराष्ट्रीय कैरियर को कल
अलविदा कहने वाले तेंदुलकर
को भारत रत्न दिये जाने के
बाद यह बहस छिड़ गई है कि महान
हाकी खिलाड़ी ध्यानचंद और
विश्व चैम्पियन शतरंज
खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद भी
इसके हकदार थे . खेल मंत्रालय
ने ध्यानचंद के नाम की
अनुशंसा की थी लेकिन सरकार ने
तेंदुलकर को यह सम्मान देने
का फैसला किया .<br />इस बारे में
पूछने पर तेंदुलकर ने आज
संन्यास के बाद अपनी पहली
प्रेस कांफ्रेंस में कहा ,‘‘
मुझे लगता है कि यह पुरस्कार
मैं सभी की ओर से ले रहा हूं .
हमारे देश में कई महान
खिलाड़ी हुए हैं जिनके
योगदान को भुलाया नहीं जा
सकता . मेरे जरिये दरवाजा खुल
गया है और मैं आगे भी दुआ
करूंगा कि उन सभी महान
खिलाड़ियों को इस तरह की
सराहना मिले . यह पुरस्कार
खास है और खास लोगों को
मिलेगा तो बहुत खुशी होगी .’’
<br />उन्होंने भारत रत्न अपनी
ही नहीं बल्कि देश की हर मां
को समर्पित किया . उन्होंने
कहा ,‘‘ मैने कल कहा था कि यह
भारत रत्न सम्मान मेरी मां को
समर्पित है लेकिन मैं उसमें
यह जोड़ना चाहूंगा कि सिर्फ
मेरी ही नहीं बल्कि देश ही हर
मां को यह समर्पित है . बच्चे
को पालने में मां बाप कितने
बलिदान करते हैं और कभी जताते
भी नहीं .’’ तेंदुलकर ने कहा
कि यह सम्मान वास्तव में पूरे
देश का सम्मान है .<br />उन्होंने
कहा ,‘‘ मैं काफी गौरवान्वित
महसूस कर रहा हूं . क्रिकेट
में 24 साल तक मेरे योगदान के
लिये यह पुरस्कार दिया गया है
. मैने हर बार बेहतर प्रदर्शन
की कोशिश की और लोगों की
सराहना से मुझे अगली बार और
बेहतर करने की प्रेरणा मिली .
यह पुरस्कार वास्तव में
समूचे देश का है .’’ उन्होंने
भारत रत्न पाने वाले
प्रोफेसर सीएनआर राव को भी
बधाई दी . उन्होंने कहा ,‘‘ मैं
प्रोफेसर राव को भी बधाई देना
चाहता हूं और यह मेरे लिये
फख्र की बात है कि मुझे उनके
साथ यह सम्मान मिला है . उनका
योगदान अतुलनीय है .’’   <br />रिकाडरें
के बादशाह सचिन तेंदुलकर ने
अपने 24 साल के चमकदार करियर
में कई उपलब्धियां हासिल की
लेकिन कुछ ऐसे भी पल आये जब
उन्हें बहुत निराशा हुई और
ऐसा ही एक क्षण विश्व कप 2003 का
फाइनल था जिसमें भारत फाइनल
में आस्ट्रेलिया से हार गया
था. भारत ने विश्व कप 2003 में
बेहतरीन प्रदर्शन किया
लेकिन जोहानिसबर्ग में खेले
गये फाइनल में उसे
आस्ट्रेलिया से 125 रन से हार
का सामना करना पड़ा था. यह वह
पल था जिसने तेंदुलकर को अपने
करियर में सबसे अधिक निराश
होना पड़ा लेकिन इसके आठ साल
बाद 2011 में उन्हें घरेलू
मैदान वानखेड़े में विश्व कप
उठाने का सबसे यादगार पल भी
मिला था. अपना 200वां टेस्ट मैच
खेलकर कल संन्यास लेने वाले
तेंदुलकर ने आज यहां खचाखच
भरे संवाददाता सम्मेलन में
कहा, ‘‘मेरे लिये सबसे यादगार
क्षण 2011 में विश्व कप जीतना
रहा. मेरा ख्वाब था कि मैं
विश्व कप विजेता टीम का
हिस्सा बनूं. मैने इसके लिये 22
साल तक इंतजार किया और मेरा
सपना पूरा हुआ. वह बहुत खास
क्षण था. ’’ तेंदुलकर ने इसके
साथ ही कहा कि कल जब उन्होंने
संन्यास लिया तो अपने
प्रशंसकों का प्यार देखकर वह
गदगद हो गये और यह उनके लिये
विशेष पल था. अपने करियर में
15921 रन बनाने वाले इस स्टार
बल्लेबाज ने कहा, ‘‘कल का दिन
मेरे लिये बहुत खास था. लोगों
ने जिस तरह से अपने जज्बात
जाहिर किये उसके लिये मेरे
पास शब्द नहीं है. मैं इसके
लिये उनका बहुत आभारी हूं. ’’
तेंदुलकर ने हालांकि कहा कि
उन्हें इस बीच निराशाओं का भी
सामना करना पड़ा. उन्होंने
कहा, ‘‘मैं अपने करियर के
निराशाजनक पल की भी बात करना
चाहूंगा. हम विश्व कप 2003 के
फाइनल में हार गये थे. हम
अच्छा खेल रहे थे और इतने
करीब पहुंचने के बावजूद भी
विश्व कप नहीं जीतने से काफी
निराशा हुई थी. ’’ <br />
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