सपा के चुनावी वायदों की कीमत 66 हजार करोड़

सपा के चुनावी वायदों की कीमत 66 हजार करोड़

By: | Updated: 07 Mar 2012 12:20 AM


लखनऊ:
यूपी की नई सरकार को कहीं
महंगे ना पड़ जाएं जनता से
किए चुनावी वादे.




छात्रों को लैपटॉप और टैबलेट
बांटने के वादे को अमल में
लाने के लिए ही चाहिए होंगे
करोंड़ो रुपए? आखिर आएंगे
कहां से इतने पैसे?

वादे
पर किया गया ये एक और वादा है
या फिर वाकई समाजवादी पार्टी
वादों पर संजीदा है.




यूपी में पार्टी सत्ता मिलने
से जितना खुश है शायद जनता से
किये वादों को लेकर उतनी ही
परेशान भी.




20 जनवरी को जारी घोषणा पत्र
में पार्टी ने बढ़चढ़कर
चुनावी वादे किए थे लेकिन ये
नहीं बताया गया था कि इन्हें
पूरा करने के लिए कहां से
आएंगे करीब 66 हजार करोड़ रुपए.

 
एसपी के वादों की कीमत

इंटर
पास छात्रों को लैपटॉप और
हाईस्कूल पास को टैबलेट
बांटने का वायदा किया गया था.
साल 2011 में इंटर के 15 लाख 90 हजार
ऐसे छात्र थे और इसी साल
हाईस्कूल पास छात्र थे 22 लाख 93
हजार. अब अगर एक लैपटॉप की
कीमत 10,000 रुपए और टेबलेट का
दाम 1000 रुपए भी लगाया जाए तो एक
साल में ही खर्च की रकम पहुंच
जाएगी 1819 करोड़ रुपए.

वादा
तो अनाज के न्यूनतम समर्थन
मूल्य में 50 फीसदी बढ़ोतरी का
भी है जिसे निभाने में छह
हजार करोड़ रुपये हर साल खर्च
करने पड़ेंगे. किसानों का 50
हजार रुपये तक का कर्ज माफ
करने के वादे पर एकमुश्त 11
हजार करोड़ रुपये खर्च करने
पड़ेंगे.

किसानों और
बुनकरों को मुफ़्त बिजली
देने के लिए हर साल करीब 1650
करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा.
फसलों की मुफ्त सिंचाई के
वादे पर अमल के लिए नई सरकार
को हर साल उस 589 करोड़ रुपए का
राजस्व गंवाना पड़ेगा.

25
साल से ज़्यादा उम्र के
बेरोजगारों को हर महीने 1000
रुपये भत्ते का वादे पर सरकार
को 1000 करोड़ रुपए तक खर्च करने
पड़ सकते हैं.

यूपी की तरफ
देखें तो ये सब रकम कोई
मामूली नहीं है खासकर तब
सरकारी खजाने का हाल बुरा हो
और राजकोषीय घाटा बढ़ता जा
रहा हो. और ना ही इतने पैसे
जुटाने के लिए किसी योजना का
खाका रखा गया हो. कहीं ऐसा ना
हो कि वादों के चक्कर में
प्रदेश की जनता को कर्ज के
बोझ से लाद दिया जाए.

वादे
तो और भी हैं, जैसे 8वीं तक के
छात्रों को मुफ़्त किताबें,
लड़कियों को स्नातक तक मुफ्त
शिक्षा, पांच लाख तक की
सालाना आमदनी वालों को
बच्चों की फीस में छूट,
किसानों के लिए चार फीसदी
ब्याज पर कर्ज देना, 65 साल से
ज्यादा उम्र के किसानों को
पेंशन, वकीलों के लिए पेंशन
योजना, अधिवक्ता कल्याण कोष
के लिए 200 करोड़ रुपये, वकीलों
और किसानों के लिए पांच लाख
रुपये का इंश्योरेंस और
ठेले-गुमटी लगाने वालों को
सड़क के किनारे पक्की
दुकानें

ध्यान रहे, ये तो
रहे नए वादे जिन्हें पूरा
करना ही होगा, उन योजनाओं का
खर्च कहां से आएगा जो पहले से
चल रही हैं.




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