सरकार के खिलाफ ढ़ीले पड़े बाबा रामदेव के तेवर?

सरकार के खिलाफ ढ़ीले पड़े बाबा रामदेव के तेवर?

By: | Updated: 09 Aug 2012 08:17 AM


नई
दिल्ली:
रामलीला मैदान पर
आज रामदेव के तेवरों में
सरकार के खिलाफ वो तीखापन
नहीं दिख रहा जो उनके पहले के
आंदोलनों में देखने को मिलता
रहा है.

आमतौर पर सरकार के
खिलाफ बोलने वाले रामदेव का
रुख सरकार को लेकर काफी नरम
दिख रहा है.




रामलीला मैदान से बाबा
रामदेव ने जिस अंदाज में अपने
आंदोलन की शुरुआत की है उससे
ये सवाल उठने लगे हैं कि क्या
सरकार के खिलाफ आग उगलने वाले
बाबा रामदेव ढीले पड़ गए हैं.


पहले से ही तय नहीं था कि
बाबा के आंदोलन का स्वरूप
क्या होगा. माना जा रहा था कि
रामदेव इस बार सरकार के खिलाफ
लंबी लड़ाई लड़ेंगे लेकिन
सिर्फ तीन दिन के सांकेतिक
अनशन की बात करके बाबा ने एक
तरीके से सरकार को राहत दे दी
है.

माना जाता रहा है कि
बाबा कांग्रेस के खिलाफ कड़ा
रुख रखते हैं. कई मौकों पर
बाबा इस तरह के संकेत भी देते
रहे हैं लेकिन आज बाबा ने
अपने तरकश से जितने भी तीर
निकाले सब में अपनी ओर से ये
साफ करते रहे कि उनका आंदोलन
कांग्रेस के खिलाफ नहीं है.

अन्ना
हजारे और उनकी टीम के लोग
जनलोकपाल से कम पर राजी नहीं
हैं. बाबा पहले इसमें अपनी
हामी भरते रहे हैं लेकिन आज
उन्होंने ये कहकर अपना रुख
लचीला कर दिया कि लोकपाल किसी
भी रूप में लाओ चलेगा.

रामदेव
ने लोकपाल पर तो लचीला रूख
अपनाया ही अन्ना से भी किनारा
करते दिखे. कभी दोनों साथ
मिलकर आंदोलन करने की बात
करते थे लेकिन आज रामदेव ये
कहने से नहीं चूके कि हर
मुद्दे पर अन्ना को उनका साथ
नहीं मिलेगा.

अन्ना और
उनकी टीम के सदस्य पीएम पर
हमला करने का कोई मौका नहीं
छोड़ते लेकिन आज बाबा रामदेव
ने पीएम की ईमानदारी पर कोई
सवाल नहीं उठाए. इस मुद्दे पर
भी बाबा रामदेव ने अन्ना और
उनकी टीम से अलग लाइन ली है.

अब
इन्हीं वजहों के चलते ये माना
जा रहा है कि बाबा के तेवर
ढीले पड़ गए हैं. देखना होगा
कि बाबा का अगला कदम क्या
होता है.




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