सरकार के खिलाफ सड़क पर ममता की हुंकार

सरकार के खिलाफ सड़क पर ममता की हुंकार

By: | Updated: 26 May 2012 07:38 AM


कोलकाता/नई
दिल्‍ली:
पेट्रोल की बढ़ी
कीमतों के खिलाफ शनिवार को
यूपीए सरकार की अहम सहयोगी
तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष
ममता बनर्जी ने हुंकार भरी.




ममता ने कोलकाता में जादवपुर
से हाजरा तक पदयात्रा करीब आठ
किलोमीटर की पदयात्रा की.
उनके साथ बड़ी तादाद में
तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ता
शामिल हुए.




पद यात्रा के बाद रैली करके
ममता बनर्जी ने पेट्रोल के
दाम बढ़ाने पर अपनी नाराज़गी
जताई.




जिस मनमोहन सरकार में ममता
बनर्जी खुद शामिल हैं उसी के
खिलाफ उन्‍होंने कोलकाता की
सड़कों पर मोर्चा खोला





ममता के इस तेवर पर मनमोहन
सरकार क्या करेगी? इसका तो
पता नहीं, लेकिन कांग्रेस के
सांसद अधीर चौधरी ने जिस
अंदाज में ममता पर हमला बोला
है उससे कई सवाल खड़े हो रहे
हैं.

अधीर चौधरी ने कहा था
कि ममता को अगर बढ़ोतरी
बर्दाश्त नहीं हैं तो फिर
केंद्र में वो अपना समर्थन
वापस क्यों नहीं ले लेतीं.

कांग्रेस
सांसद अधीर चौधरी ने ममता
बनर्जी को जिस अंदाज में
चुनौती दी उसके बाद राजनीतिक
पंडित सोचने के मजबूर हो गए
कि क्या अब कांग्रेस ममता को
खोने के लिए तैयार हो चुकी है?

गौरतलब
है कि यूपीए के तीन साल पूरे
होने के मौके पर ममता बनर्जी
डिनर पार्टी में शामिल नहीं
हुई थी, लेकिन मुलायम सिंह
यूपीए सरकार के साथ कंधे से
कंधे मिलाकर खडा रहे.

लोकसभा
में ममता बनर्जी के 19 सांसद
हैं, जबकि मुलायम सिंह के 21
सांसद हैं. लालू यादव अपने
चार सांसदों के साथ पहले से
ही सरकार के दरवाजे पर खड़े
हैं.

सूत्रों के मुताबिक
यूपीए सरकार को भरोसा है कि
अगर ममता बनर्जी के 19 सांसद
सरकार से हट जाते हैं तो उसकी
भारपाई मुलायम सिंह और लालू
यादव के 25 सांसद कर देंगे. यही
वजह है कि अधीर चौधरी जैसे
सांसद अब ममता को खुलकर
चुनौती दे रहे हैं.

हालांकि
कांग्रेस सासंद अधीर चौधरी
ने इस चुनौती को पार्टी की
राय नहीं बताया है. लेकिन
बड़ा सवाल खड़ा होता है कि अब
ममता क्या करेंगी? क्या
पेट्रोल के मुद्दे पर
उन्होंने सरकार के खिलाफ जो
संघर्ष शुरू किया है वो
सड़कों पर ही खत्म हो जाएगा?
या फिर उसकी धमक संसद में भी
सुनाई पड़ेगी.

बीजेपी
सांसद कीर्ति आजाद के
मुताबिक, 'तृणमूल कांग्रेस
काफी ताकतवर है और ममता खुद
एक बड़ी लीडर हैं. मैं तो उनसे
हाथ जोड़कर प्रार्थना करता
हूं कि वे एनडीए में शामिल हो
जाएं और हमारे साथ मिलकर
सरकार चलाएं.'

बीजेपी ममता
बनर्जी की तारीफ में यूं ही
पुल नहीं बांध रही हैं. अटल
बिहारी वाजपेयी के समय ममता
एनडीए का हिस्सा रह चुकी हैं.
अब बीजेपी फिर से उन्हें अपने
पाले में लाना चाहती हैं,
लेकिन ममता की धुर-विरोधी
सीपीएम का दावा है कि ममता को
समझ पाना इतना आसान नहीं हैं.

ममता
बनर्जी की राजनीतिक नीति और
नीयत पर सीपीएम सवालिया
निशान लगा रही है, लेकिन उनके
विरोध का ये अंदाज कोई नया
नहीं हैं. इससे पहले भी
उन्‍होंने किराना में
एफडीआई और एनसीटीसी के
मुद्दे पर सरकार के खिलाफ
खुला मोर्चो खोला था.

जिस
दिन सरकार ने पेट्रोल के दाम
में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की थी
उसी दिन ममता ने साफ कर दिया
कि वो यूपीए सरकार की मनमानी
बर्दश्त नहीं करेंगी.




संबंधित खबरें




पेट्रोल
के दाम बढ़ने से ममता बनर्जी
नाराज






समर्थन
वापस क्‍यों नहीं लेती
तृणमूल कांग्रेस











फटाफट ख़बरों के लिए हमे फॉलो करें फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर और डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App
Web Title:
Read all latest India News headlines in Hindi. Also don’t miss today’s Hindi News.

First Published:
Next Story योगी सरकार का बड़ा फैसलाः कानपुर, मेरठ और आगरा में चलेगी मेट्रो