सरकार ने दिया जाट समुदाय को ओबीसी कोटे से आरक्षण, नौ राज्यों में नौ करोड़ लोगों को फायदा

By: | Last Updated: Monday, 3 March 2014 4:48 AM
सरकार ने दिया जाट समुदाय को ओबीसी कोटे से आरक्षण, नौ राज्यों में नौ करोड़ लोगों को फायदा

नई  दिल्ली: सरकार ने जाट समुदाय को अन्य पिछड़े वर्ग के कोटा के तहत आरक्षण को रविवार को मंजूरी दे दी. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई. दूसरी ओर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के सुझाए गए भ्रष्टाचार रोधी विधेयकों को लेकर अध्यादेश का रास्ता अपनाने से केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इनकार कर दिया. साथ ही तेलंगाना विधेयक में संशोधनों को भी हरी झंडी दे गई.

 

चुनाव से ऐन पहले किए गए इस फैसले पर कांग्रेस ने हालांकि इन आरोपों से इनकार किया कि सरकार जाटों को लुभाने की कोशिश कर रही है. सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने कहा कि हर चीज को चुनाव के लेंस से नहीं देखना चाहिए. यह मांग काफी लंबे समय से हो रही थी, जिसे कैबिनेट ने मंजूर किया है.

 

देश के नौ उत्तर भारतीय राज्यों में बसे जाट समुदाय के लोग लंबे समय से अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) के तहत आरक्षण की मांग कर रहे थे. कई बार इसे लेकर हिंसक आंदोलन भी हुए. हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश और देश के कुछ अन्य हिंदी भाषी राज्यों में जाटों की मौजूदगी है.

 

उल्लेखनीय है कि संसद के हाल ही में संपन्न शीतकालीन सत्र में सरकार ने भ्रष्टाचार रोधी अहम विधेयकों को पारित कराने की कोशिश की थी. लेकिन हंगामे के कारण ऐसा नहीं हो सका. उसके बाद अटकलें थीं कि सरकार इन्हें लेकर अध्यादेश लाएगी. सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने कहा कि कैबिनेट ने भ्रष्टाचार रोधी विधेयकों पर अध्यादेश लाने के बजाय उन पर पूर्ण चर्चा का समर्थन किया है. कैबिनेट बैठक से पहले यूपीए के मंत्रियों और कांगे्रस नेताओं के बीच व्यापक सलाह-मशविरा हुआ. केंद्रीय मंत्री एके एंटनी, सुशील कुमार शिंदे और अहमद पटेल बैठक से पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से उनके आवास पर मिले. शनिवार को शिंदे और कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने राष्ट्रपति से मुलाकात की थी.

 

मंत्रिमंडल ने साथ ही फैसला किया कि सीमांध्र क्षेत्र को पांच सालों तक विशेष दर्जा प्राप्त रहेगा. सरकार ने हाल में पारित आंध्र प्रदेश पुनर्गठन विधेयक में दो संशोधनों को भी मंजूरी दे दी. पहला संशोधन पोलावरम ऊर्जा परियोजना के कारण विस्थापित लोगों के पुनर्वास से संबंधित है, दूसरा एनटीपीसी जैसी इकाइयों के उत्पादित बिजली तेलंगाना और सीमांध्र के बीच बांटने से संबंधित है. दो घंटे चली मंडिमंडल की बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की उस घोषणा को मंजूरी दी गई जिसमें उन्होंने 13 जिलों वाले सीमांध्र क्षेत्र को पांच साल तक विशेष दर्जा प्रदान करने की बात कही थी.

 

केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने बताया कि मंत्रिमंडल ने योजना आयोग को निर्देश दिया कि वह प्रधानमंत्री की ओर से की गई घोषणा के तहत सीमांध्र के 13 जिलों को विशेष दर्जा देने के निर्णय को क्रियान्वित करे. उन्होंने बताया कि योजना आयोग प्रशासनिक इकाई है और केंद्रीय सहायता उसके जरिए प्रदान की जाएगी. प्रस्ताव में सीमांध्र के लिए कर प्रोत्साहन जैसे छह सूत्री विकास पैकेज शामिल हैं.

 

रमेश ने बताया कि राज्य के वित्तीय आधार को मजबूती प्रदान करने के लिए इसमें रायलसीमा के चार जिले और उत्तर तटवर्ती आंध्र के तीन जिले शामिल होंगे. विधेयक में उत्तराधिकारी राज्य आंध्र प्रदेश के पिछड़े क्षेत्रों के लिए विशेष विकास पैकेज का प्रावधान है जिसमें विशेष तौर पर रायलसीमा और उत्तर तटवर्ती आंध्र प्रदेश के जिले शामिल हैं. विकास पैकेज ओड़िशा में केबीके (कोरापुत बोलंगीर कालाहांडी) विशेष योजना और मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड विशेष पैकेज की तर्ज पर होगा.  मंत्रिमंडल ने इसके साथ ही एक संशोधन लाने का फैसला किया जिसके तहत केंद्रीय इकाइयों के उत्पादित 85 फीसद बिजली दोनों राज्यों को जनसंख्या के हिसाब से बांटी जाएगी. विधेयक में यह प्रस्ताव है कि बिजली का बंटवारा पिछले पांच साल के ऊर्जा खपत के आधार पर होगा. रमेश ने कहा कि नौकरशाहों को बांटने के लिए समिति सोमवार से काम शुरू  कर देगी और सीमांध्र के लिए नई राजधानी का चुनाव करने के लिए एक समिति का जल्द ही गठन किया जाएगा.

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