सामाजिक नाइंसाफी की घुटन में पानी और अनाज के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं कर्नाटक के दलित

By: | Last Updated: Wednesday, 29 January 2014 1:15 PM
सामाजिक नाइंसाफी की घुटन में पानी और अनाज के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं कर्नाटक के दलित

नई दिल्ली: जब देश गणतंत्र दिवस की 65 वीं वर्षगांठ मना रहा था, ठीक उसी वक्त देश की राजधानी से सैकड़ों किलोमीटर दूर कर्नाटक के एक गांव में कुछ दलित परिवार ऊंची जाति के दबंगों के सामने पानी और अनाज के लिए गिड़गिड़ा रहे थे. केंद्रीय मंत्री के.एच. मुनियप्पा के निर्वाचन क्षेत्र में आने वाले इस गांव के दबंगों ने इन दलित परिवारों का सामाजिक बहिष्कार कर रखा है.

 

डेली मेल के मुताबिक भूख-प्यास से तड़पते अपने परिवारों के लिए गांव के सवर्ण दबंगों से रहम की भीख मांगते इन दलितों का कुसूर बस इतना था कि उन्होंने मकर संक्रांति तय वक्त से पहले मना ली थी और एक सरकारी स्कूल में मिड-डे मील बनाने वाले के पद के लिए अप्लाई किया था. ये सरकारी स्कूल कोलार जिले के कग्गनाहल्ली गांव में है.

 

सरकारी स्कूल में खानसामे की नौकरी के लिए आवेदन करने पर सवर्णों ने गांव के दलितों को जमकर अपमानित किया. उन्हें ताकीद की गई कि ऐसा करने की वो कल्पना भी न करें, क्योंकि स्कूल में सवर्ण जाति के बच्चे पढ़ते हैं और उनके बच्चों के लिए एक दलित खानसामा मिड-डे मील पकाए, ये बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

 

कर्नाटक की राजधानी बैंगलोर से मात्र 100 किलोमीटर दूर मौजूद ये इलाका काफी पिछड़ा  हुआ है. खास बात ये कि कोलार निर्वाचन क्षेत्र एक आरक्षित सीट है और इस इलाके का केंद्र में प्रतिनिधित्व करने वाले मुनियप्पा खुद भी दलित जाति के नेता हैं.

 

गांव के ऊंची जाति के दबंगों ने एलान किया है कि जो भी इन दलित परिवारों से संपर्क रखेगा, उसे 501 रुपये का जुर्माना भरना पड़ेगा. जो परिवार इन दलितों को पानी देगा उससे 1001 रुपये का जुर्माना वसूला जाएगा. गांव में मौजूद दुकानों के मालिकों को ताकीद की गई है कि वो इन दलितों को अनाज, सब्जी समेत रोजमर्रा इस्तेमाल की कोई भी चीज न बेंचे. इन दलितों का सामाजिक बहिष्कार करते हुए सवर्णों ने चेतावनी दी है कि गांव में जिसने भी इन चेतावनियों का पालन नहीं किया, उसे भी गांव-समाज से बाहर कर दिया जाएगा. 

 

सवर्ण दबंगों की इस जोर-जबरदस्ती से मुनिस्वामप्पा, मुनिवेंकटाप्पा, पापन्ना और कृष्णप्पा के 16 परिवार जीने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. इन दलित परिवारों ने ऊंची जाति के लोगों की मनमानी के खिलाफ पुलिस से मदद की गुहार लगाई. इससे ऊंची जाति के लोग और भी ज्यादा भड़क उठे. इन दलितों को पुलिस से तो कोई मदद नहीं मिली बल्कि सवर्ण दबंगों ने 22 जनवरी को इन सभी दलित परिवारों को गांव बाहर हो जाने का हुक्म सुना दिया.

 

ग्रामीणों के मुताबिक गांव को पानी की आपूर्ति गांव के एक सार्वजनिक बोरवेल से होती है और दलितों को इस बोरवेल से केवल शाम के वक्त पानी भरने की इजाजत है. दलितों के सामाजिक बहिष्कार की खबर मिलने पर कोलार के डिप्टी कमिश्नर डी.के. रवि ने गांव जाकर इन दलित परिवारों से मुलाकात की. डिप्टी कमिश्नर ने गांव के सवर्णों से भी बातचीत कर मामले को सुलझआने की कोशिश की.

 

 डिप्टी कमिश्नर डी.के. रवि ने बताया, ” ग्रामीणों ने सूचना दी है कि उन्होंने दलितों का कोई सामाजिक बहिष्कार नहीं किया है. सबको निर्देश दे दिए गए हैं कि दलित परिवारों के साथ किसी भी किस्म का कोई भेदभाव न किया जाए.”

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Web Title: सामाजिक नाइंसाफी की घुटन में पानी और अनाज के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं कर्नाटक के दलित
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