सियासत में धर्म का कॉकटेल कर रहे हैं केजरीवाल!

सियासत में धर्म का कॉकटेल कर रहे हैं केजरीवाल!

By: | Updated: 25 Mar 2014 01:47 PM
नई दिल्ली. सियासत में धर्म का कॉकटेल आज भी दिखा. सियासत के कायदे वही हैं जो राजनीति को रास्ता दिखाएं. जीत के जज्बे को पैदा करने से लेकर सत्ता हथियाने तक धर्म एक अहम जरिया रहा है.

 

काशी का 'किंग' तो बाद में तय होगा लेकिन देश की धार्मिक राजधानी में धर्म और सियासत का चरित्र खूब दिखने लगा है. पार्टी विद डिफरेंस तो महादेव के नारे को ही बदल कर अपने पक्ष में कर रही है. लेकिन बदलाव का बयार लाने का दावा करने वाले आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल भी सियासत को धर्म से अलग नहीं रख पाए.

 

अरविंद केजरीवाल वाराणसी पहुंचने के बाद गंगा तट पर स्नान किया. उसके बाद वह भैरव मंदिर भी गए. प्राचीन काल भैरव मंदिर में पूजा-अर्चना करने से पूर्व गंगा में डुबकी लगाने पहुंचे. केजरीवाल ने कहा कि गंगा की हालत देखकर बहुत दुख हुआ. अपने भाषण में भी भगवान राम के सहारे ही बीजेपी पर निशाना साधा. अपने हिन्दु रीति रिवाज का कैमरे पर खूब प्रदर्शन कर हिन्दुओं को संदेश दिये तो बीच भाषण में ही अजान के वक्त अपना भाषण रोकर मुस्लिम मतदाताओं को मोहने की कोशिश की.

 

आप को बता दें कि कुछ दिनों पहले आम आदमी पार्टी की गाजियाबाद से उम्मीदवार शाजिया इल्मी गाजियाबाद के पुराने दूधेश्‍वर महादेव के मंदिर गईं. वहां जम कर दूध पानी चढाया. और वह कैमरे के सामने.

 

सत्ता की सियासत में धर्म और राजनीति का कॉकटेल बीजेपी से बेहतर कौन जानता है? दो सांसदों वाली पार्टी राम मंदिर आंदोलन के जरिए 186 सांसदों तक पहुंच गयी. बीजेपी को केंद्र में पहुंचाने में राम मंदिर मुद्दा अहम रहा है. कहते हैं कि काठ की हांड़ी बार-बार नहीं चढ़ती. सो मोदी विकास की सवारी कर रहे हैं. लेकिन चुनाव क्षेत्र काशी के जरिए अपने हिन्दुत्व की छवि को भी पुख्ता करने से नहीं चूक रहे हैं. 

 

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