सेक्स, अपराध और राजनीति की कॉकटेल में डूबे केस

By: | Last Updated: Thursday, 19 September 2013 7:48 AM
सेक्स, अपराध और राजनीति की कॉकटेल में डूबे केस

राजस्थान
के डेयरी मंत्री बाबूलाल
नागर पर गंभीर आरोप लगे हैं.
राजनीति, अपराध और सेक्स को
मिलाकर जो कॉकटेल बनती है वो
अच्छे-अच्छों के होश उड़ा
देती है. नागर प्रकरण
राजस्थान की राजनीति में जो
भंवर लेकर आया है उसने इस बात
को साबित कर दिया है.

ऐसा नहीं है कि किसी राजनेता
पर पहली मर्तबा ऐसे आरोप लगे
हों. पहले भी कई राजनेताओं पर
ऐसे आरोप लगते रहे हैं.

कभी यूपी के विधायक गोवा में
रंगरलियां मनाते पकड़े जाते
हैं तो कभी कोर्ट में पूर्व
सीएम एक युवक के जैविक पिता
साबित होते हैं. यूं तो ऐसे
नेताओं की फेहरिस्त काफी
लंबी है लेकिन कई केस ऐसे हैं
जिन्होंने पूरे देश में
सनसनी फैला दी थी.

भंवरी देवी प्रकरण

बहुत
ज्यादा वक्त नहीं बीता जब
राजस्थान सरकार के पूर्व
मंत्री महिपाल मदेरणा और
नर्स भंवरी देवी प्रकरण ने
गहलोत सरकार को मुश्किल में
डाल दिया था.

भंवरी देवी की बहुचर्चित
सेक्स सीडी यूट्यूब पर आसानी
से उपलब्ध है. उसे देखकर पता
चलता है कि मदेरणा और भंवरी
के बीच ताल्लुकात कतई नए नहीं
थे. भंवरी राजनेताओं के जाल
में कैसे फंसी और फिर क्यूं
नहीं निकल पाई? एक नर्स और
लोकगायिका भंवरी देवी
ब्लैकमेलर कैसे बन गई? ये वो
सवाल हैं जो इस प्रकरण से
वाकिफ किसी भी शख्स के जेहन
में आए होंगे.

फिलहाल
पूर्व मंत्री और कद्दावर
नेता मदेरणा जयपुर की
सेंट्रल जेल में हैं.

कविता
केस

बहुत ज्यादा वक्त
नहीं हुआ जब उत्तर प्रदेश के
बुलंदशहर में भी एक ऐसा ही
केस सामने आया था. बात करीब 2006
की है. एक अखबार में खबर छपी कि
कविता नाम की एक लड़की पिछले
कुछ दिनों से गायब है.

उसके
भाई सतीश मलिक ने बताया कि
उसके गायब होने के पीछे कुछ
राजनेताओं का हाथ है. एक चैनल
पर खबर चलते ही कविता का गांव
पीपली लाईव बन गया. तमाम
हिंदी अंग्रेजी के चैनलों की
ओबी वैन वहां खड़ी नज़र आने
लगीं.

समाजवादी पार्टी और
रालोद के गठबंधन की सरकार थी
और इल्जाम था बेसिक शिक्षा
मंत्री किरनपाल सिंह पर.
आरोपी रालोद के  नेता
मेराजुद्दीन भी थे. लोकिन एक
दिन एक न्यूज़ चैनल के
स्टुडियो में रविंद्र नाम के
एक आदमी ने खुद को कविता का
कातिल बताते हुए सरेंडर किया.
इसके बाद कई गिरफ्तारियां
हुईं लेकिन नेताजी साफ बच गए.

कविता
पर भी आरोप था कि वो
ब्लैकमेलर थी और उसने नेताओ
की अश्लील सीडी बना रखी थीं.
इन सीडीयों में कथित तौर पर
कविता और नेताओं के अंतरंग
दृश्य कैद थे. 2008 में
गाजियाबाद की डासना जेल में
खुद को हत्यारा बताने वाले
रविंद्र प्रधान की मौत हो गई.
उसके परिवार ने आरोप लगाया कि
उसे जेल में जहर दे दिया गया.
मामला तकरीबन खत्म हो गया.

शीतल
बिरला केस

2009 में ये केस
जिस वक्त सामने आया तो पहली
नज़र में उतना गंभीर नहीं
लगा. शीतल बिरला नाम की एक
लड़की ने आगरा में पुलिस थाने
में जमकर बवाल काटा और वो
गुड्डू को आरोपी बता रही थी.
उसका कहना था कि गुड्डू के
कहना पर पुलिस उसे झूठे मामले
में फंसा रही है.

गुड्डू
पंडित बुलंदशहर की डिबाई सीट
से विधायक थे और उनका दबदबा
जगजाहिर था. वो कल्याण सिंह
के बेटे को चुनाव में हराकर
विधायक बने थे. खबर मीडिया
में आई तो विधायक जी को
मायावती ने गिरफ्तार करा
दिया.

गुड्डू और महिला की
शादी की तस्वीरें भी अखबारों
की सुर्खियां बनीं. गुड्डू
पंडित कुछ वक्त जेल में रहे
लेकिन फिर बाहर आ गए, उसी
दबंगई के साथ. शीतल का आरोप था
कि दोनों की शादी हुई थी
लेकिन बाद में विधायक ने फिर
उससे शादी करने से इंकार कर
दिया.

विधायक गुड्डू
पंडित एक वक्त अमरमणि
त्रिपाठी के ड्राइवर थे.
अमरमणि त्रिपाठी खुद
मधुमिता शुक्ला प्रकरण में
जेल में हैं.

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Web Title: सेक्स, अपराध और राजनीति की कॉकटेल में डूबे केस
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