सेना का कूच: स्‍थाई समिति ने उठाए कई सवाल

सेना का कूच: स्‍थाई समिति ने उठाए कई सवाल

By: | Updated: 04 Apr 2012 08:44 PM


नई
दिल्‍ली:
अंग्रेजी अखबार 'द
इंडियन एक्सप्रेस'ने दावा
किया है कि 16-17 जनवरी की रात
सेना की टुकड़ियों के बिना
बताए दिल्ली की तरफ कूच करने
की उसकी खबर पर सरकार ने जो भी
स्पष्टीकरण दिए हैं, उनसे
रक्षा मामलों की स्थाई
संसदीय समिति संतुष्ट नहीं
है. 
'सरकार
के मंत्री ने छपवाई थी खबर'


अखबार
के मुताबिक स्थाई समिति के
कुछ सदस्य इस बारे में पूछताछ
के लिए थल सेनाध्यक्ष जनरल
वीके सिंह को भी समिति के
सामने बुलाना चाहते हैं.

अंग्रेजी
अखबार 'द इंडियन एक्सप्रेस'
की इस खबर ने बुधवार को पूरे
देश में खलबली मचा दी थी कि 16-17
जनवरी की रात भारतीय सेना की
दो टुकड़ियां केंद्र सरकार
को बताए बिना दिल्ली की तरफ
बढ़ रही थीं. कौन
थी वो दो टुकड़ि‍यां


प्रधानमंत्री
मनमोहन सिंह और रक्षा मंत्री
ए के एंटनी ने इस खबर का खंडन
किया है. लेकिन 'द इंडियन
एक्सप्रेस'का कहना है कि वो
अब भी अपनी खबर पर कायम है.

इतना
ही नहीं, 'द इंडियन
एक्सप्रेस'ने आज इस बारे में
एक और खबर भी छापी है, जिसमें
दावा किया गया है कि उसकी चार
अप्रैल की खबर के बारे में
सरकार की तरफ से दिए गए
स्पष्टीकरण से रक्षा मामलों
की स्थाई संसदीय समिति
संतुष्ट नहीं है. खबर
पर कायम 'द इंडियन
एक्‍सप्रेस'

'द इंडियन
एक्सप्रेस'की आज की खबर में
दावा किया गया है कि रक्षा
मामलों की स्थाई संसदीय
समिति ने फौज की दो टुकड़ियों
के दिल्ली की तरफ बढ़ने की
खबर को लेकर रक्षा सचिव
शशिकांत शर्मा और सेना की
तीनों शाखाओं के उप-प्रमुखों
से कई सवाल पूछे.

अखबार के
मुताबिक रक्षा सचिव और तीनों
उप-प्रमुखों ने इन सवालों के
जो जवाब दिए, उनसे समिति के
सदस्य संतुष्ट नहीं हुए.

इतना
ही नहीं, अखबार के मुताबिक
संसदीय समिति के कम से कम दो
सदस्यों ने इस बारे में
थलसेनाध्यक्ष जनरल वी के
सिंह को समिति के सामने पेश
किए जाने की मांग भी की है. जब
दिल्‍ली की ओर बढ़ी थी सेना


'द
इंडियन एक्सप्रेस'के
मुताबिक जनरल वी के सिंह को
स्थाई संसदीय समिति के सामने
पेश करने की मांग करने वाले
ये दो सदस्य हैं- शिरोमणि
अकाली दल के राज्यसभा सांसद
नरेश गुज़राल और हैदराबाद से
एआईएमआईएम के लोकसभा सांसद
असदुद्दीन ओवैसी.

अखबार
के मुताबिक नरेश गुजराल इस
मामले में जल्द ही संसदीय
समिति के अध्यक्ष सतपाल
महाराज को एक चिट्ठी भी लिखने
वाले हैं. इस चिट्ठी में वो
जनरल वी के सिंह को समिति के
सामने तलब किए जाने की मांग
करेंगे. दिल्‍ली
पुलिस को नहीं थी जानकारी


अखबार
के मुताबिक नरेश गुज़राल
चाहते हैं कि संसदीय समिति
जनरल वी के सिंह से इंडियन
एक्सप्रेस की खबर के बारे में
पूछताछ करने के साथ ही उनसे
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह
के नाम लिखी चिट्ठी पर भी
स्थिति स्पष्ट करने को कहे. पहले
से तय था सेना का मूवमेंट!


'द
इंडियन एक्सप्रेस'के
मुताबिक रक्षा सचिव शशिकांत
शर्मा ने स्थाई संसदीय समिति
के सामने इस बात से साफ इनकार
किया कि सरकार ने सेना की
टुकड़ियों के मूवमेंट की वजह
से उन्हें मलेशिया की यात्रा
जल्दी खत्म करने को कहा था. विशेषज्ञों
की राय


शर्मा ने कहा कि
वो मलेशिया से जल्दी इसलिए
लौट आए, क्योंकि अगले दिन
सुप्रीम कोर्ट में एक अहम
मामले की सुनवाई होनी थी.

'द
इंडियन एक्सप्रेस'का दावा है
रक्षा सचिव के इस जवाब से
संसदीय समिति के सदस्य
संतुष्ट नहीं हुए. अखबार के
मुताबिक समिति के एक सदस्य ने
बैठक के बाद कहा कि रक्षा
सचिव कोई वकील नहीं हैं.
उन्हें अचानक इस तरह लौटने की
ज़रूरत क्यों पड़ी? एंटनी
की राय


'द इंडियन
एक्सप्रेस'के मुताबिक
संसदीय समिति के एक और सदस्य
ओवैसी ने सवाल किया कि अगर
सेना की टुकड़ियों का
मूवमेंट रुटीन था, तो उन्हें
वापस क्यों भेजा गया? अखबार
का दावा है कि ओवैसी को अपने
इस सवाल का कोई जवाब नहीं
मिला.

अखबार के मुताबिक
संसदीय समिति के कुछ सदस्यों
ने सेना और रक्षा विभाग के
अधिकारियों से कहा है कि वो
नौ अप्रैल को होने वाली समिति
की अगली बैठक में पूरे मामले
पर विस्तृत स्पष्टीकरण पेश
करें.

अखबार के मुताबिक
संसदीय समिति में शामिल एक
कांग्रेस सांसद ने बैठक के
बाद कहा कि समिति के सामने
पेश अधिकारियों ने 'द इंडियन
एक्सप्रेस'की खबर का खंडन
करते हुए सेना की टुकड़ियों
के मूवमेंट को रूटीन
एक्सरसाइज तो बताया, लेकिन
उन्होंने इन सवालों का जवाब
नहीं दिया कि प्रोटोकॉल का
पालन क्यों नहीं किया गया,
टुकड़ियों को वापस क्यों
भेजा गया और रक्षा सचिव विदेश
से जल्दी वापस क्यों आ गए? 

'द
इंडियन एक्सप्रेस'के
मुताबिक स्थाई संसदीय समिति
की बैठक में सेना की तीनों
शाखाओं के उप-प्रमुखों को
प्रधानमंत्री के नाम
थलसेनाध्यक्ष की चिट्ठी के
बारे में भी कई कड़े सवालों
का सामना करना पड़ा.

अखबार
के मुताबिक कांग्रेस सांसद
मनीष तिवारी ने कहा कि रक्षा
मामलों की संसदीय समिति की
बैठक का मकसद हथियारों और
रक्षा उपकरणों की खरीद और
उनके बजट पर विचार करना है,
लेकिन थल सेना के उप-प्रमुख
के प्रेजेंटेशन में उन
चिंताओं की कोई झलक नहीं दिख
रही, जो थलसेनाध्यक्ष ने अपनी
चिट्ठी में जाहिर की हैं. 'द
गार्जियन के चौंकाने वाले
खुलासे'


तिवारी ने कहा
कि अगर रक्षा तैयारियों में
कमियां हैं, तो सेना को इस
बारे में विस्तृत रिपोर्ट
समिति के पास भेजनी चाहिए.

'द
इंडियन एक्सप्रेस'ने दावा
किया है कि उसकी खबर के बारे
में रक्षा सचिव और सेना की
तीनों शाखाओं के उप-प्रमुखों
ने स्थाई समिति के सामने जो
भी स्पष्टीकरण दिए, उनसे
समिति के सदस्य आम तौर पर
सहमत नहीं थे.





अखबार के मुताबिक एक सदस्य ने
कहा कि जो स्पष्टीकरण दिए गए
उनसे कई बातें साफ नहीं हो
सकीं, लेकिन अगर वो इसका खंडन
करते हैं तो हमें उनकी बात
माननी पड़ती है.




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