सोशल मीडिया के प्रभाव से नेताओं का बचना मुश्किल, देर से ही सही कई आ रहे हैं ऑनलाईन

सोशल मीडिया के प्रभाव से नेताओं का बचना मुश्किल, देर से ही सही कई आ रहे हैं ऑनलाईन

By: | Updated: 21 Mar 2014 08:37 AM

कोलकाता: जो नेता अबतक डिजिटल मीडियम से दूर दूर रहते थे, वे सोशल मीडिया की बढ़ती ताकत के बीच अब इस चुनाव सीजन में तेजी से फेसबुक और ट्विटर के माध्यम से युवाओं से जुड़ रहे हैं.

 

पिछले सप्ताह ही माकपा की पश्चिम बंगाल इकाई ने प्रौद्योगिकी पसंद तृणमूल कांग्रेस को टक्कर देने के लिए अपना आधिकारिक फेसबुक पेज और ट्विटर पेज शुरू किया.

 

माकपा के प्रदेश सचिव बिमान बोस ने कहा कि सोशल मीडिया के मार्फत प्रचार आम लोगों से संवाद करने का एक प्रभावी तरीका है क्योंकि पार्टी उनके सवालों का जवाब दे सकती है और आलोचनाओं पर सकारात्मक तरीके से और समय रहते ध्यान दे सकती है.

 

फेसबुक पर तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी के पहले से ही साढ़े छह लाख से अधिक ‘लाइक्स’ हैं जबकि ट्विटर पर पार्टी प्रवक्ता डेरेक ओब्रायन के दो लाख से अधिक फोलोवर्स हैं. इसके अलावा, पार्टी लगातार अपनी वेबसाइट अद्यतन करती है तथा ट्विटर एवं फेसबुक एकाउंट हैं.

 

डेरेक ने प्रेस ट्रस्ट से कहा, ‘‘बतौर क्षेत्रीय दल, हम पश्चिम बंगाल में अन्य दलों से डिजिटल मंच पर आगे हैं.’’ पश्चिम बंगाल कांग्रेस समिति फेसबुक पर 8000 लाइक्स के साथ संख्याबल में अन्य दलों से पीछे चल रही है. प्रदेश माकपा के 14000 से अधिक लाइक्स हैं तथा तृणमूल कांग्रेस के 13000 से अधिक लाइक्स हैं.

 

प्रदेश बीजेपी सोशल मीडिया पर नयी है लेकिन डिजिटल लड़ाई में बहुत तेजी से बढ़ रही है. कुछ ही वक्त में उसके ट्विटर पेज पर 11000 से अधिक फोलोवर्स हैं तथा फेसबुक पर 14000 से अधिक लाइक्स हैं.

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