हाथ नहीं हैं पर हार नहीं मानते हुए पैरों से 12वीं की परीक्षा दे रहा सुलेंद्र

By: | Last Updated: Sunday, 9 March 2014 7:27 AM

बलौदाबाजार: छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार में रहने वाले होनहार छात्र सुलेंद्र कुमार के जन्म से ही दोनों हाथ नहीं हैं. फिर भी पूरे हौसले के साथ वह सिर्फ पैरों के सहारे 12वीं की बोर्ड परीक्षा दे रहा है. बलौदाबाजार के गुरुकुल स्कूल परीक्षा केंद्र में इन दिनों 12वीं की परीक्षा दे रहा सुलेंद्र कक्षा के अन्य छात्र-छात्राओं के साथ ही स्कूल के कर्मचारियों, उड़नदस्ता टीम तथा अन्य लोगों के आकर्षण का केंद्र है.

 

उसे उम्मीद है कि इसी हौसले की बदौलत वह अपने जीवन की कठिन से कठिन परीक्षा भी पास कर लेगा. पैरों से पेन पकड़कर लिखने के बावजूद उसकी लेखन गति अच्छी है. साथ ही लिखावट भी सुंदर है. पलारी विकासखंड के गबौद गांव के रहने वाला छात्र सुलेंद्र के जन्म से ही उसके दोनों हाथ काम नहीं करते, मगर उसके हौसले आसमान से ऊंचे हैं.

 

सुलेंद्र ने 12वीं कक्षा के बाद ग्रेजुएशन तथा कंप्यूटर सीखने की इच्छा जताते हुए कहा कि वह आगे सरकारी नौकरी करना चाहता है. किसान बलीराम के घर तीसरी संतान के रूप में जन्मे सुलेंद्र के जन्म से ही हाथ नहीं हैं. एक हाथ तीन-चार इंच के बाद विकसित नहीं हो सका. सुलेंद्र के जन्म के बाद परिवारजन इस बात को लेकर चिंतित थे कि यह लड़का आगे चलकर अपना काम कैसे करेगा तथा इस दुनिया में किस तरह से जीवन बसर करेगा, परंतु सुलेंद्र के हौसले के आगे आज वे नतमस्तक हैं.

 

परिवार के लोग कहते हैं कि छह-सात साल के होते-होते सुलेंद्र ने अपने पैरों को अपनी ताकत बना लिया. रोजमर्रा के कामों के अलावा उसने पैरों से पेन पकड़कर लिखना भी शुरू किया. बच्चे के हौसले को देखते हुए परिवारजनों से उसे गांव के स्कूल में एडमिशन करा दिया जहां से वह बिना किसी रुकावट के 5वीं तक पास हो गया. 5वीं के बाद सुलेंद्र का हौसला बढ़ता ही गया.

 

फिर परिवारजनों ने उसे सोनारदेवरी के हाईस्कूल में एडमिशन कराया, जहां से 11वीं पास होकर सुलेंद्र ने बलौदाबाजार की शाश्वत शाला में दाखिला लिया. सुलेंद्र के अलावा बलीराम के अन्य चार बच्चे (तीन पुत्री तथा एक पुत्र) हैं तथा वे सभी शारीरिक रूप से तंदुरुस्त हैं.

 

लिखने के अलावा अपने दैनिक कार्यो तथा खाने-पीने का कार्य भी सुलेंद्र पैरों से ही करता है. उसने बताया कि पहले मां अपने हाथों से उसे खिलाती थी, फिर एक दिन उसने अपने पैरों से पेन की तरह चम्मच पकड़कर खाने की कोशिश की जिसमें वह सफल रहा, उसके बाद वह पैरों से चम्मच के सहारे खाना खाने लगा. सच ही है, इस संसार में प्रत्येक वस्तु संकल्प शक्ति पर ही निर्भर है.

 

इतिहास साक्षी है कि मनुष्य के संकल्प के सामने देव, दानव सभी पराजित हुए हैं. सुलेंद्र 12वीं के बाद ग्रैजुएट होकर शासकीय नौकरी करना चाहता है और पैरों से ही की बोर्ड संचालित कर कंप्यूटर सीखने की इच्छा भी रखता है. उसने दुखी मन से बताया कि बचपन से लेकर आज तक उसकी शारीरिक कमी को देखकर कई लोगों ने उसका मजाक भी उड़ाया है, पर वह इससे विचलित नहीं हुआ, न ही हीन भावना से ग्रसित हुआ.

 

संकल्प शक्ति के सहारे ही आज वह 12वीं की परीक्षा दे रहा है. सभी दुआ कर रहे हैं कि सुलेंद्र अपने सपनों को जल्द पूरा करे.

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Web Title: हाथ नहीं हैं पर हार नहीं मानते हुए पैरों से 12वीं की परीक्षा दे रहा सुलेंद्र
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