एक साल: जनलोकपाल, स्वराज के वादे को भी पूरा नहीं कर पाए केजरीवाल

By: | Last Updated: Tuesday, 9 February 2016 9:27 AM
1 Saal, Kya Hua Kejriwal: This is what happened to Jan Lokpal and Swaraj

नई दिल्ली: अरविंद केजरीवाल के वादों में सबसे पहले नंबर पर था दिल्ली में जनलोकपाल कानून बनाना. लेकिन इस वादे को पूरा करने मे केजरीवाल सरकार को 9 महीने लग गए, उसके बाद भी जो कानून पेश हुआ उस पर सवाल उठे. वहीं स्वराज बिल के वादे पर अब तक केजरीवाल सरकार ने कुछ नहीं किया है.

दिल्ली में जनलोकपाल के लिए चले अन्ना के आंदोलन ने अरविंद केजरीवाल की राजनीति की नींव रखी. जनलोकपाल के मुद्दे पर ही 2014 में अरविंद केजरीवाल ने सिर्फ 49 दिनों बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री की कुर्सी से इस्तीफा दे दिया. 2015 के आम आदमी पार्टी के चुनावी घोषणापत्र में जनलोकपाल बिल पहले नंबर पर था. इसके बावजूद इस बिल को पास कराने में सरकार को 9 महीने का वक्त लग गया. 9 महीने बाद भी जो बिल पेश किया गया उसे केजरीवाल के पुराने साथियों ने जोकपाल कहा.

बिल पर सवाल उठने की वजह ये थी कि वो केजरीवाल के 2014 के बिल से 5 बिंदुओं पर अलग था. केजरीवाल के 2014 और 2015 के बिल में अंतर-

  1. 2014 के बिल के मुताबिक चयन समिति में 7 सदस्य थे जबकि 2015 में पेश हुए बिल में सिर्फ चयन समिति में सिर्फ 4 सदस्य रखे गए
  2. वहीं 2014 में स्वतंत्र जांच एजेंसी का प्रावधान था जबकि 2015 में ये प्रावधान नहीं था
  3. 2014 में लोकपाल का निलंबन हाई कोर्ट की जांच के जरिए हो सकता था वहीं 2015 में विधानसभा में दो तिहाई बहुमत से ही निलंबन का प्रावधान था
  4. और सबसे विवादित मुद्दा था जांच का दायरा – 2014 के मुताबिक जांच दिल्ली सरकार तक सीमित थी जबकि 2015 में दिल्ली में काम करने वाले केंद्र सरकार के कर्मचारियों को भी शामिल करने की बात कही गई

विरोधियों ने कहा कि नए बिल में लोकपाल के चयन से लेकर हटाने तक में सरकार का नियंत्रण होगा जबकि दायरे में केंद्र को रख कर केजरीवाल ने बिल को लटकाने का बहाना ढूंढा है. आलोचनाओं से केजरीवाल सरकार बैकफुट पर आ गई और मामला अन्ना की अदालत में पहुंचा. अन्ना के कहने पर केजरीवाल सरकार ने बिल में दो संशोधन किए.

इन संशोधनों के मुताबिक-

  1. लोकपाल चयन समिति में 4 की जगह 7 सदस्य कर दिए गए
  2. और  लोकपाल को हटाने के लिए विधानसभा में दो तिहाई बहुमत से पहले हाई कोर्ट से जांच की शर्त जोड़ दी गई.

इन संशोधनों के बाद बिल विधानसभा में पास हो गया लेकिन LG ने बिना अपनी मंजूरी के बिल केंद्र सरकार के पास भेज दिया और तब से ये मामला केंद्र के पास है. यानी ये बिल भी फिलहाल लटका हुआ ही है.

दूसरी तरफ स्वराज बिल पर पूरे साल कोई सुगबुगाहट तक नजर नहीं आई. वादे के मुताबिक स्वराज कानून के जरिए दिल्ली भर में प्रत्येक 1000 की आबादी पर अधिकारों से लैस मोहल्ला सभाओं का गठन किया जाना था जिनसे परामर्श कर सरकार अहम फैसले लेती.

दिल्ली के मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा है कि उम्मीद है कि केंद्र जनलोकपाल बिल पास करेगा लेकिन स्वराज बिल को भी केंद्र लटका सकता था इसलिए उस पर कोई काम नहीं हुआ, हमने मोहल्ला सभाओं में बजट बनाया, पूरी दिल्ली में मोहल्ला सभा बनाने की प्रक्रिया चल रही है.

आम आदमी पार्टी के घोषणापत्र में स्वराज बिल लाने की बात दूसरे नंबर पर थी लेकिन अब 1 साल बाद दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का ये बयान उससे बिलकुल अलग है.

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Web Title: 1 Saal, Kya Hua Kejriwal: This is what happened to Jan Lokpal and Swaraj
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