जब भारत की ये बात पता चली तो दर्द से चिल्ला पड़े पाक के 'बादशाह'!

By: | Last Updated: Friday, 11 September 2015 2:58 PM
1965 war stories

नई दिल्ली: वैसे तो युद्ध विनाश की लीला लिखता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर इसे शांति का जरिया भी कहते हैं. भारत और पाकिस्तान के बीच अब तक अघोषित तीन बड़े युद्ध हो चुके हैं और तीनों में भारत ने पाकिस्तान को धूल चटा दी.

 

हर वक्त भारत सहृदयता का परिचय देता रहता है और पाकिस्तान बॉर्डर से लेकर देश के अंदर अपनी नापाक हरकत से भारत को दंश देता है. तारीख गवाह है भारतीय फौज ने कैसे पाकिस्तान को नाकों चने चबवाते हुए उसके घर में घुसकर अपना जौहर दिखाया था. पाकिस्तान की एक गलती ने पूरी दुनिया के सामने उसकी कायरता की दास्तां को बयां कर दिया. इस साल देश ऐतिहासिक जीत की स्वर्णिम जयंती मना रहा है.

 

शहीदों की वीरता को सलाम करने वाला यह जश्न 22 सितंबर तक चलेगा. एबीपी न्यूज़ भी 1965 युद्ध में शहीद हुए जवानों को सलाम करता है. हम आपके लिए इस ऐतिहासिक युद्द से जुड़े ऐसे रोचक और जाबांजी से भरे किस्से लेकर आए हैं जो आपका सीना गर्व से चौड़ा कर देंगे.

 

 

जब लाहौर पहुंच गई भारतीय फौज

कल की पेशकश में हमने आपको बताया था कि 1965 युद्ध की जमीन कैसे तैयार हुई. पाक की नापाक हरकत से उसे मुंह की खानी पड़ी थी. भारतीय सेना ने पाकिस्तान के पसीने छुड़ाते हुए लाहौर एयरपोर्ट तक पहुंच गईं थी.

 

भारत की सेना के अदम्य साहस से पाकिस्तान के सभी आला सैन्य अधिकारी भी हैरान थे. बीबीसी में छपी खबर के मुताबिक पाकिस्तान के फील्ड मार्शल अयूब खान को जिस अधिकारी ने भारतीय सेना के पाकिस्तान में घुसने की जानकारी दी थी वह उस पर चिल्ला पड़े. अयूब खां ने कहा, “भारत की पहली आर्मर्ड डिवीज़न भूसे में सुई की तरह नहीं है कि आप को पता ही न चल सके कि वो इस समय कहां है?”

 

इस समय तक भारतीय फौज लाहौर और सियालकोट तक पहुंच गई थी.  दैनिक भास्कर में छपी खबर के मुताबिक भारत ने यहां पर अपनी सबसे मजबूत 1 आर्म्ड डिविजन लगाई थी. इनके साथ-साथ 6 माउंटेन डिविजन, 14 इंफैन्ट्री डिविजन और 26 इंफैन्ट्री डिविजन भी लगाई गई थीं.

 

यहीं पर दोनों मुल्कों की तरफ से भयंकर टैंक युद्ध लड़ा गया. भारत सियालकोट सेक्टर से होता हुआ पाकिस्तान में लगभग 35 किलोमीटर तक अंदर घुस गया था. इस दौरान पाकिसतान की सेना छंब सेक्टर में अपना सेना के के साथ मौजूद था. लेकिन भारत के इसने अंदर आने खबर मिलने के बाद पाकिस्तान ने छंब सेक्टर से अपनी सेना को सियालकोट की तरफ भेजा.

 

 

अमेरिका ने भारत से की लड़ाई रोकने की दरख्वास्त

अमेरिका ने भारत से दरख्वास्त की कि वह कुछ देर के लिए अपना ऑपरेशन रोक दे, ताकि लाहौर में रह रहे अमरीकियों को वहां से निकलने का वक्त मिल सके. भारत ने हामी भरदी, लेकिन इसका नुक्सान भी झेलना पड़ा. भारत अगर वहां पर कुछ देर नहीं रुकता तो लाहौर के हवाई अड्‌डे तक जा पहुंचता. लाहौर से पाकिस्तान ने भारत का ध्यान बंटाने के लिए खेमकरण फ्रंट खोल दिया. इधर भारत ने भी बेदियां को कब्जे में ले लिया. इतना ही नहीं पाकिस्तान ने अखनूर से अपने फौज को हटाकर लाहौर की तरफ भेजना शुरू कर दिया.

 

भारत पाकिस्तान के अंदर पहुंच चुका था और लगातार लड़ाई जारी थी. अमेरिका भी भारत के इन हौसलों को देखकर दंग था. अमेरिका ने भारत से दरख्वास्त की थी कि वह लड़ाई को कुछ देर के लिए रोक दे जिससे वह अपने नागरिकों को वहां से निकाल सके. भारत इसके लिए तैयर हो गया. इससे  भारत को नुकसान भी हुआ. पाकिस्तान ने जिस अखनूर पर सबसे पहले हमला किया था वहां से भी अपना फौज को वापस बुला लिया.

 

कैसे कत्म हुई लड़ाई…

दोनों देशों की ओर से जारी इस युद्ध में संयुक्त राष्ट्र ने हस्तक्षेप किया. संयुक्त राष्ट्र ने युद्ध विराम की घोषणा की और रूस की मध्यस्थता में ताशकंद (अब उज्जबेकिस्तान में) में तत्कालीन पीएम लाल बहादुर शास्त्री और पाकिस्तानी राष्ट्रपति अयूब खान के बीच समझौता हुआ. आपको बता दें युद्ध विराम की घोषणा के बाद भारतीय पीएम लाल बहादुर शास्त्री को ताशकंद में ही दिल का दौरा पड़ा जिससे उनकी मौत हो गई.

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