2-जी से छह गुना बड़े घोटाले का भंडाभोड़

2-जी से छह गुना बड़े घोटाले का भंडाभोड़

By: | Updated: 21 Mar 2012 10:09 PM








नई दिल्ली: 2-जी घोटाले
को लेकर मुश्किलें झेल चुकी
यूपीए सरकार के लिए अब बड़ा
संकट खड़ा होने जा रहा है,
क्योंकि इस बार थोड़ा बहुत
नहीं 2जी घोटाले से 6 गुना
ज्यादा सरकारी खजाने को
नुकसान पहुंचा है.




इस नुकसान की वजह है सरकार,
क्योंकि उसने ही नयम कानूनों
की अनदेखी की. तो इस बार सरकार
के हाथ काले होने वाले हैं
कोयले की कालिख से.




नियंत्रक और महालेखा
परीक्षक यानी सीएजी की ताजा
रिपोर्ट में कोयला खदानों से
सरकार को 10.67 लाख करोड़ का
नुकसान हुआ है.




इस नुकसान का अंदाजा इस बात
से लगाया जा सकता है कि जिस
2-जी घोटाले को लेकर पूरे देश
में भूचाल आ गया था वो इसका
सिर्फ छठा हिस्सा ही था. 




अखबार ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के
मुताबिक सीएजी की रिपोर्ट
में कहा गया है कि 155 वर्ग एकड़
की कोयला खदानों को 100 के करीब
निजी और पब्लिक सेक्टर की
कंपनियों के हाथ औने पौने
दामों में सौंप दिया गया.




नियम के मुताबिक बिड सिस्टम
के तहत बाकाएदे इनकी नीलामी
की जानी चाहिए थी लेकिन सरकार
ने ही नियम कानून की अनदेखी
की जिसकी वजह से सरकारी खजाने
को इतना बड़ा नुकसान उठाना
पड़ा है.




सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया
है कि कोयला खदानों की ये
बंदरबांट 2004 से 2009 के बीच की गई.
जिन 100 कंपनियों को फायदा
पहुंचाया गया उनमें से
ज्यादातर निजी सेक्टर की
कंपनियां हैं जो स्टील, पावर
और सीमेंट उत्पादन करती हैं.




इन कंपनियों को सरकार की ओर
से खुदाई का जो ठेका दिया गया
उसमें रेट सबसे घटिया दर्जे
के कोयले का लगाया गया. जबकि
ये कंपनियां कोयला खदानों से
बढ़िया से बढ़िया कोयला
निकाल कर खुद मालामाल होती
रहीं और सरकारी खजाने को चपत
लगाती रहीं .




फायदे कमानी वाली कंपनी





प्राइवेट सेक्टर की जिन
कंपनियों ने सबसे ज्यादा
कमाई की उनमें सबसे ऊपर रही
टाटा- ससोल की साझा कंपनी-
स्ट्रेटजिक एनर्जी टेक
सिस्टम लिमिटेड, इस कंपनी ने 33
हजार 60 करोड़ रुपये का
अतिरिक्त मुनाफा कमाया.
इलेक्ट्रो स्टील कास्टिंग्स
और अन्य ने 26 हजार 320 करोड़
रुपये की ऊपरी कमाई की. जिंदल
स्टील एंड पावर लिमिटेड ने 21
हजार 226 करोड़ बटोरे, जबकि
भूषण स्टील, जय बालाजी
इंडस्ट्रीज और रश्मि
इंडस्ट्रीज ने मिलकर 15 हजार 967
करोड़ की चपत सरकार को लगाई.




राम स्वरूप लौह उद्योग,
आधुनिक कार्प., उत्तम गल्वा
स्टील, होवरान गैसेज, विकास
मेटल्स पावर और एसीसी ने
मिलकर सरकार को 15 हजार 633 करोड़
का चूना लगाया.




जेएसपीएस
और गगन स्पोंज ने 12 हजार 767
करोड़ की काली कमाई की तो
एमसीएल और जिंदल स्टेनलेस ने
मिलकर करीब 10 हजार 419 करोड़ की
चपत सरकारी खजाने को लगाई.




इस खेल में टाटा स्टील भी
पीछे नहीं रही इसने भी 7 हजार 161
करोड़ की अतिरिक्त कमाई की.
वहीं पब्लिक सेक्टर की
कंपनियों में सबसे ऊपर रही
बिजली पैदा करने वाली कंपनी
एनटीपीसी, इस कंपनी ने सरकार
की दरियादिली से करीब 35 हजार 24
करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ
कमाया.




इसके अलावा टीएनईबी,
एमएसएमसीएल, जेएसईबी,
बीएसएमडीसी, एमएमटीसी को
मिलाकर करीब एक दर्जन
कंपनियों ने भी अपनी
तिजोरियां तो भरीं लेकिन
सरकारी खजाने को चपत लगाने
में जरा संकोच नहीं किया.




सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक
पब्लिक सेक्टर की कंपनियों
ने करीब 5.88 लाख करोड़ रुपये की
चपत सरकार को लगाई तो निजी
कंपनियों ने 4. 79 लाख करोड़ का
सरकारी खजाने को नुकसान
पहंचाया.




लेकिन इन कंपनियों ने सरकारी
खजाने को नुकसान तब पहंचाया
जब सरकार की ओर से इसकी इजाजत
दी गई. इस मामले में जितनी
जिम्मेदार ये कंपनियां रहीं
सरकार भी इससे कम नहीं, जिसने
अपने खजाने के दरवाजे इन
कंपनियों के लिए खोल दिए.




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