SPECIAL: हाफिज सईद कब पकड़ा जाएगा ?

By: | Last Updated: Wednesday, 26 November 2014 3:37 PM

नई दिल्ली : जांच में ये बात पूरी तरह साफ़ हो गई कि खून-खराबे से भरी तबाही पाकिस्तान के शैतान की साज़िश थी. मुंबई पर हुआ अब तक का सबसे खतरनाक आतंकी हमला जिसमें 166 लोग मारे गए और 358 लोग घायल हुए. उस हमले का मास्टरमाइंड हाफ़िज़ मुहम्मद सईद था.

 

26/11 को हुए मुंबई हमले के 6 साल बीत चुके हैं. इन सालों में मुंबई आगे बढ़ गई. देश आगे बढ़ गया. 26-11 के हमले में पकड़ा गया इकलौता ज़िंदा आतंकी अजमल आमिर क़साब फांसी पर लटका दिया गया. लेकिन 6 साल बाद भी इस हमले का सबसे बड़ा गुनहगार हाफिज़ सईद आज तक भारत के हाथ नहीं लगा है, ना ही उसे उसके गुनाह की कोई सज़ा मिली है. वह आज भी सरहद पार बैठा, खुलेआम, हिंदुस्तान के दामन पर ऐसे जख़्म लगाने की साज़िश में जुटा है.

 

अब भी जुमे की नमाज़ के बाद वह आमतौर पर भारत के खिलाफ़ नफ़रत का ज़हर उगलता रहता है. धमकी देता है मुंबई जैसे और भी खतरनाक हमलों की. अफ़सर करीम बताते हैं कि ये सब पाकिस्तान आर्मी का हिस्सा है, वो उनको मानते हैं. अगर भारत के ऊपर हमला करना है तो यही उसकी फौज है. हाफिज़ सईद की लोकप्रियता बहुत ज़्यादा है, जब वो लाहौर में लेक्चर देने खड़ा होता है तो हज़ारों सुनते हैं.

 

भारत और अमेरिका का मोस्ट वॉन्टेड आतंकवादी होते हुए भी कैसे ये खुलेआम घूमता है. क्या हिंदुस्तान की अदालत में इस शैतान को कभी सज़ा मिल पाएगी? क्यों ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान में घुसकर ख़त्म करने वाला अमेरिका, हाफि़ज़ सईद के खिलाफ़ कुछ नहीं करता? आखिर आतंक के इस आक़ा की हक़ीक़त क्या है?  

 

हाफिज़ सईद के परिवार का ताल्लुक भारत के हरियाणा से था. मगर देश के विभाजन के बाद 1948 में ये परिवार पाकिस्तान चला आया और वहां पंजाब के सरगौधा में बस गया.  सईद का जन्म यहीं हुआ.

 

हाफिज सईद का इंटरव्यू लेने वाले पत्रकार वेदप्रताप वैदिक बताते हैं कि शुरुआत से ही सईद अपने जज्बाती कट्टर धार्मिक भाषणों के लिए जाना जाने लगा. साथ ही भारत के खिलाफ़ उसके दिल में अजीब सी नफ़रत रही. मुंबई हमलों पर लिखी किताब The Seige- 3 days of terror inside the Taj में लेखक कैथी स्कॉट और एड्रियान लिवाय लिखते है कि जेहादियों के दिल में भारत के खिलाफ़ बेइंतेहा नफ़रत भरने के लिए, हाफ़िज सईद अपने धार्मिक भाषणों ये बताना नहीं भूलता कि कैसे विभाजन के समय हुई हिंसा में उसके परिवार के 36 लोग मारे गए थे.  

 

हाफिज़ सईद के इन भाषणों में सच्चाई कितनी है ये तो पता नहीं, लेकिन उसकी बातों का असर इन जेहादियों पर बेहद गहरा होता है. वो किसी की भी सोच बदल सकता है, किसी का भी ब्रेनवॉश कर सकता है. सुरक्षा मामलों के जानकार अफ़सर करीम बताते हैं कि जो तैयार किए जाते है टेररिस्ट उनको पहले ब्रेनवॉश किया जाता है. ये कहकर कि आप काफ़िरो के खिलाफ़ जेहाद करो. आपको जन्नत मिलेगी. हाफिज़ सईद मोटिवेशनल फोर्स है और उसका काफी बड़ा रोल है.

 

कट्टर भाषणों से वह शुरुआत में पाकिस्तान में मशहूर हुआ. इसी का नतीजा था कि 1979 में ख़ुद पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल ज़ियाउल हक़ की सिफ़ारिश पर हाफ़िज़ सईद को पाकिस्तान की काउंसिल ऑफ़ इस्लामिक स्टडीज़ का हिस्सा बना दिया गया. फिर सईद यूनिवर्सिटी ऑफ इंजिनियरिंग एंड टेक्नॉलोजी में इस्लामिक स्टडीज़ का टीचर भी रहा.

 

पत्रकार वेदप्रताप वैदिक बताते हैं कि वह फूहड़ नहीं हैं, काफ़ी पढ़ा-लिखा है. लेकिन सईद की ज़िदगी में सबसे बड़ा मोड़ आया 80 के दशक की शुरुआत में. उच्च इस्लामिक शिक्षा के लिए सईद सऊदी अरब गया. यहां वह अफ़गानिस्तान में सोवियत संघ के खिलाफ़ लड़ रहे मुजाहिदीनों के संपर्क में आया. यहीं से हाफिज़ सईद की ज़िंदगी का मक़सद भी जेहाद बन गया. और इसी के साथ शुरू हुई उसके आतंक की कहानी.  

 

अफग़ानिस्तान में जिहाद का प्रचार करने और लोगों को इस जेहाद से जोड़ने के लिए 1986 में हाफिज सईद ने जमात-उद-दावा-वल-इरशाद की शुरुआत की. इसी जमात-उद-दावा की लड़ाकू शाखा बनी लश्कर-ए-तैयबा. शुरुआत में लश्कर, खूंखार तालिबानियों के साथ अफगानिस्तान में सक्रिय रहा. फिर 1990 के बाद जब सोवियत सैनिक अफगानिस्तान से निकल गए, तो हाफिज़ सईद ने अपने जेहादी मिशन को भारत के कश्मीर की तरफ़ मोड़ दिया.

 

1993 में जम्मू कश्मीर में पहले हमले के साथ हाफिज़ सईद के शुरू किए हुए आतंकवादी संगठन लश्कर ए तैयबा ने भारत में अपनी खूनी दस्तक दी. सुरक्षा मामलों के जानकार अफ़सर करीम बताते हैं कि पाकिस्तान अब तक जितने युद्ध हुए वह सब हारा. पाकिस्तान समझ गया कि कनवेंशनल वार में वो भारत से नहीं जीत सकते तो तय किया कि नॉन-स्टेट एक्टरकश्मीर में.

 

ये तो बस शुरुआत थी क्योंकि इसके बाद तो हाफिज सईद के आतंक का एक पूरा सिलसिला चल निकला. 13 दिसंबर 2001…भारत की संसद पर हमला. 28 अक्टूबर 2005 ..इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साईंस कैंपस , बैंगलोर में हमला. 29 अक्टूबर 2005…दिल्ली में सीरियल ब्लास्ट. 7 मार्च 2006 , वाराणसी में आतंकी हमला. 11 जुलाई 2006, मुंबई की लोकल ट्रेन में सीरियल ब्लास्ट. अगस्त 2007, हैदराबाद के पार्क में धमाका. और इसके फिर 26 नवंबर 2008 की वो रात, जब हाफिज़ सईद के सिखाए, खतरनाक हथियारों से लैस लश्करे तैयबा के पाकिस्तानी आतंकियों ने मुंबई में क़हर बरपा दिया. वो हमला जिसमें 166 बेकसूर लोग मारे गए और सैकड़ो की तादाद में ज़ख़्मी हुए.

 

भारतीय जांच एजेंसियों की छानबीन में ये बात सामने आई कि मुंबई हमले की पूरी साज़िश का ख़ाका दरअसल हाफिज सईद ने आईएसआई के साथ मिलकर तैयार किया था. 26-11 के हमले में पकड़े गए इकलौते जिंदा आतंकी अजमल कसाब ने अपने बयान में साफ-साफ बताया था कि हमले के पीछे लश्कर-ए-तैयबा और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का नापाक गठजोड़ ही था. कसाब ने बयान दिया कि 26-11 के सभी दस हमलावरों को लाहौर के पास मुरीदके में ट्रेनिंग दी गई थी, जमात उद दावा के मुख्यालय के बेहद क़रीब.

 

26-11 के इस हमले में ठिकानों के चुनाव और ट्रेनिंग के लिए मुंबई के नक्शे, सड़कों और हमले की अहम जगहों की जानकारी मुहैया कराने में अहम किरदार निभाया पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी आतंकी डेविड कोलमैन हेडली उर्फ दाऊद सैय्यद गिलानी ने. अक्टूबर 2009 में अमेरिकी एजेंसियों ने डेविड हेडली को गिरफ़्तार कर लिया. इसके बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानि एनआईए को हेडली से पूछताछ करने का सीमित अवसर दिया गया.

 

इसी पूछताछ में डेविड हेडली ने मुंबई हमलों से जुड़े कई अहम खुलासे किए. ख़ासतौर से इस हमले में हाफिज़ सईद के रोल के बारे में कई जानकारियां दीं. डेविड के बयान से ही हाफिज़ साईद के खिलाफ़ भारत को सबूत मिले.

 

मगर डेविड के बयान एक और हैरान करने वाली हक़ीकत भी सामने आई कि किस तरह हाफिज़ सईद अपने जाल में लोगों को फंसाता है और उन्हें जेहाद के लिए तैयार करता है. कैसे आंतक का ये पूरा ताना-बाना पाकिस्तान में किसी खुफिया तरीक़े से नहीं बल्कि बिलकुल खुलेआम और लोगों की नज़रों के सामने होता है.

 

लेखक सैयद हुसैन ज़ैदी की किताब हेडली एंड आई में एनआईए को दिए हेडली के बयान का ज़िक्र है. अपने इस बयान में हेडली ने बताया कि बात 2001 की है जब मैं लाहौर आया. एक दिन नमाज़ पढ़ने के बाद मैंने मस्जिद के ठीक बाहर एक बड़ी सी होर्डिंग देखी जिस पर लिखा था कि जेहाद के लिए दान करें. मैं हैरान रह गया. ये तो जेहाद की खुली घोषणा थी और बात सिर्फ एलान की नहीं थी. उससे भी बढ़ कर खुलेआम जेहाद के लिए दान मांगा जा रहा था. मैंने उस होर्डिग पर लिखे नंबर पर फोन किया और कहा कि मैं जेहाद के लिए पैसे दान करना चाहता हूं. जल्द ही आबिद नाम का एक शख्स मेरे फ्लैट में मुझसे मिलने आया.

 

हेडली ने बताया कि अल्लाह की राह में. जेहाद के नाम पर ये छोटा सा नज़राना है. आबिद मुस्कुराते हुए कहता है कि 50,000. मैं आपके जज़्बे की कद्र हूं जनाब. लेकिन सिर्फ पैसे ही देना चाहते हैं या इसके आगे कुछ और भी करने की तमन्ना है? अगर असली जेहाद करने का इरादा है, तो शाम को मस्जिद के करीब सुनसान जगह है, वहां पहुंच जाइएगा. अमीर साहब हाफ़िज़ सईद! का इज़्तेमा है.

 

चार्जशीट में हेडली का बयान है कि हाफिज़ सईद का इज़्तेमा. सब लोग ज़मीन पर बिछी चादर पर लाइन से बैठे हैं. उनमें आबिद और डेविड भी हैं. माइक पर हाफ़िज़ सईद बोल रहा है. हाफिज़ सईद बोला कि इस्लाम कुर्बानी मांगता है. ये जेहाद का वक़्त है मेरे भाइयों.

 

उस शाम हाफ़िज़ सईद ने जो कुछ कहा उससे मैं बहुत प्रभावित हुआ. भाषण के बाद आबिद ने मुझे हाफिज़ सईद से मिलवाया और हम लोगों ने कुछ देर तक बातें की. पूरी रात मैं हाफिज़ सईद से हुई मुलाकात के बारे में सोचता रहा. सोचता रहा कि मुझे वाक़ई हाफिज़ के कहे मुताबिक जेहाद के मकसद को आगे बढ़ाना चाहिए? इसके बाद मैं हाफ़िज़ सईद के इज़्तेमा में नियमित रूप से जाने लगा. उनके भाषणों को मेरे ज़ेहन पर गहरा असर होने लगा.

 

इन्हीं भाषणों में मैं जेहाद के बड़े-बड़े आक़ाओं से मिला. ये लोग दुनिया भर में मुसलमानों पर हो रहे अत्याचारों का बदला लेना चाहते थे. फिर मुझे पता चला कि ये लोग लश्कर ए तैयबा के थे. यहीं मेरी मुलाक़ात लश्कर के कमांडर ज़कीउर्रहमान लखवी से हुई.

 

डेविड कोलमैन हेडली के बयान के मुताबिक हाफिज़ सईद और ज़कीउर्रहमान लखवी, दोनों जेहाद में यक़ीन रखते थे. लेकिन दोनों की भूमिकाएं एकदम अलग थीं. हाफिज़ सईद की भूमिका सबसे अहम थी. वो आग उगलने वाले भाषणों के लिए जाना जाता था. वो लोगों का ब्रेनवॉश करके उन्हें ये भरोसा दिलाता था कि उनका इस्लाम सच्चा है, बाकी सब नक़ली. लखवी का काम आगे की ट्रेनिंग का था जिसमें हथियार चलाने और हमले की योजना शामिल थीं.

 

पाकिस्तान के मुरीदके में हाफिज़ सईद मुंबई के हमलावरों को प्रशिक्षण और प्रेरणा देने का काम करता रहा. हेडली के बयान के मुताबिक हाफिज़ सईद मुंबई हमले की योजना के हर पहलू के साथ जुड़ा रहा. वो जानता था कि ये हमला लश्कर और आईएसआई के लिए कितना ज़रूरी है.

 

इसके अलावा मुंबई हमले की साजिश में शामिल महाराष्ट्र के ज़बीउद्दीन अंसारी उर्फ़ अबु जुंदाल ने अगस्त 2012 को जांच एजेंसियों को दिए अपने बयान में बताया 2008 में जब आतंकी ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान में था तो हाफिज़ सईद ने उससे पूछा था कि मुंबई की कौन सी जगहों पर हमला असरदार रहेगा जिससे ज़्यादा से ज़्यादा नुकसान हो और जिसकी गूंज अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक जाए. अबु जुंदाल के मुताबिक उसने ही हाफिज़ सईद को नरीमन हाउस पर हमला करने की राय दी थी क्योंकि इस हमले से इजरायल और अमरीका दोनों को संदेश पहुंच सकता था.

 

साफ़ था कि पूरी साज़िश में हाफ़िज़ सईद की भूमिका सबसे खतरनाक और अहम थी. गहन जांच के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए ने 2008 के मुंबई हमलों और अन्य आतंकवादी घटनाओं के सिलसिले में लश्कर ए तैयबा के आतंकियों हाफिज सईद, जकीउर्रहमान लखवी और डेविड हेडली, समेत नौ लोगों के खिलाफ 11,280 पन्नों की चार्जशीट दायर कर दी.

 

चार्जशीट में इन सब पर भारत के खिलाफ युद्ध करने का आरोप लगाते हुए गैरकानूनी गतिविधि निरोधक कानून की विभिन्न धाराएं लगाई गईं. चार्जशीट में हेडली के सहयोगी तहव्वुर राणा, अल कायदा के आतंकवादी इलियास कश्मीरी, लश्कर के साजिद मलिक. पाकिस्तानी सेना के पूर्व अधिकारी अब्दुल रहमान हाशमी और आईएसआई के मेजर इकबाल व मेजर समीर अली के नाम भी शामिल किए गए. ये चार्जशीट साफ़ इशारा करती है और सबूत पेश करती है कि 26-11 का मास्टरमाइंड हाफिज़ सईद है.

 

अजमल आमिर कसाब और हेडली के  बयान के अलावा भारत की तरफ़ से जमा किए गए सबूतों में मुंबई पर हमला करने वाले आतंकियों और पाकिस्तान में उनके आक़ाओं से के बीच रिकॉर्डेड टेलीफोन की बातचीत भी थी. भारत को यक़ीन है कि इनमें से एक आवाज़ हाफिज़ सईद की भी है लेकिन बार बार मांग के बावजूद, पाकिस्तान ने भारत को आज तक हाफिज़ सईद या ज़कीउर्रहमान लखवी का वॉयस सैंपल नहीं सौंपा है. आतंकियों को पनाह देने और बचाने का पाकिस्तान का इरादा साफ़ ज़ाहिर होता है.

 

ये तो बात थी भारत की चार्जशीट की, लेकिन 26-11 मुंबई हमले पर पाकिस्तान की तरफ़ से, आतंकवाद निरोधक अदालत में दायर की गई चार्जशीट से तो भारत हैरान रह गया. भारत की तरफ़ से पेश किए सबूतों का मज़ाक उड़ाते हुए, पाकिस्तान की मुंबई हमले की चार्जशीट में हाफिज़ सईद का नाम तक नहीं था. पाकिस्तान की चार्जशीट में दर्ज हमले की पूरी साजिश, काफी हद तक एनआईए की चार्जशीट में दी गई घटनाओं से मेल खाती थी. बस साजिश के मास्टरमाइंड हाफिज़ सईद का नाम पूरी तरह ग़ायब था.

 

पाकिस्तान की चार्जशीट में मुंबई हमले का मास्टरमाइंड लश्कर कमांडर ज़की उर रहमान लखवी को बनाया गया. भारत की तरफ़ से इस चार्जशीट पर तीखी प्रतिक्रिया के बावजूद  पाकिस्तान अड़ा रहा कि उनकी जांच के मुताबिक मुंबई हमले की साजिश में हाफिज़ सईद का कोई रोल नहीं है. 

 

पाकिस्तान के रहमान मलिक ने कहा कि हमने लखवी को जेल में डाल दिया, सईद का कोई रोल नहीं पाया गया. बड़ी चालाकी से पाकिस्तान ने मास्टरमाइंड लखवी को कैद करके दिखाने की कोशिश की कि उन्होंने मुंबई हमले के मास्टरमाइंड के खिलाफ़ कारवाई की है. जबकि असली गुनहगार हाफिज़ सईद अब भी आज़ाद है और भारत के खिलाफ़ अपने मिशन में जुटा है.

 

27 अप्रैल 2010 को दिए एक इंटरव्यू में हाफिज़ सईद ने भारत के खिलाफ जल जिहाद छेड़ने की धमकी दे डाली. तब से लेकर आज तक हाफिज़ सईद झेलम नदी पर रन ऑफ़ दि रिवर की तर्ज पर बन रहे बांध का ज़बरदस्त विरोध कर रहा है. सिंधु नदी जल बंटवारे समझौते पर सवाल उठाते हुए भारत पर पानी रोकने का बेबुनियाद आरोप लगाता रहता है. और इसी मुद्दे वहां के लोगों को बरग़लाता रहता है कि वो भारत के खिलाफ जल जिहाद छेड़ दें. 

 

सवाल ये उठता है कि 2611 के मुंबई हमले के बाद हाफिज़ सईद के खिलाफ उठने वाले शोर और अपने ऊपर बढ़ते हुए अंतराष्ट्रीय दवाब के जवाब में पाकिस्तान ने किया क्या? संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने मुंबई आतंकी हमलों के बाद दिसंबर 2008 में ही जमात-उत-दावा को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया था और हाफ़िज़ सईद को उसका आतंकी सरग़ना.  मुंबई हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय दबाव को देखते हुए पाकिस्तान ने हाफिज़ सईद को क़रीब छह महीने तक नजरबंद रखा गया था. हाफिज के प्रत्यार्पण के लिए इंटरपोल से रेड कार्नर नोटिस भी जारी किया गया. लेकिन इसके बावजूद, साल 2009 में लाहौर हाईकोर्ट हाफिज के खिलाफ सभी मामलों को खारिज कर दिया.

 

मामला साफ़ था हाफिज़ सईद की ख़तरनाक गतिविधियों को रोकने का पाकिस्तान की ना तो नीयत थी, ना ही इरादा. अप्रैल 2012 में अमेरिका ने मुंबई हमले के साथ साथ और कई आतंकी वारदातों में शामिल होने पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्करे तैयबा के लीडर हाफिज़ सईद के ऊपर 1 मिलयन डॉलर यानि तक़रीबन 60 करोड़ का ईनाम रख दिया. अमरीकी सरकार की वेबसाइट Reward for Justice.net के मुताबिक ये इनाम अभी भी लागू है.

 

इसके अलावा अमेरिका के विदेश विभाग ने आतंकवादी संगठनों की अपनी सूची में जमात-उद-दावा समेत लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े तीन और गुटों को भी शामिल कर लिया है. ये चारों गुट हैं-जमात-उद-दावा, अल-अनफल ट्रस्ट, तहरीक-ए-हुरमत-ए-रसूल और तहरीक-ए-तहाफुज किबला अव्वाल. अमेरिकी विदेश विभाग की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि ये चारों संगठन दरअसल लश्कर-ए-तैयबा के ही अलग-अलग नाम हैं और प्रतिबंधों से बचने के लिए लश्कर बार-बार अपना नाम बदलता है. और ये सारे संगठन दरअसल हाफिज़ सईद से ही जुड़े हुए हैं.

 

फरवरी 2013 को न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में हाफिज़ सईद ने अमरीका के 1 करोड़ डॉलर के इनाम को मूर्खतापूर्ण बताते हुए उसका मज़ाक उड़ाया. इस बयान में हाफिज़ सईद ने कहा- “मैं किसी भी आम आदमी की तरह रहता हूं. यही मेरा स्टाइल है. मेरी किस्मत अल्लाह के हाथ में है अमेरिका के हाथ में नहीं.”

 

पूर्व सचिव (सुरक्षा) ने कहा कि इनाम की क्या वैल्यू है? उसकी कोई लोकेशन आप जानना चाहते हैं. ठीक है लोकेशन दे दी तो कैसे पहुंचेंगे आप? कैसे ला पाएंगे आप.

 

अपने सिर पर लगे इनाम, प्रतिबंधों और आतंकवाद के सबूतों का यूं ही बार-बार मज़ाक उड़ाते हुए, हाफिज सईद ने बड़ी चालाकी से पाकिस्तान में एक सामाजिक और धार्मिक नेता का चोला ओढ़ रखा है. वह ना सिर्फ़ सड़कों पर, खुले मैदानों में, सरेआम रैलियां करता है और लोगों को आतंक का पाठ पढ़ाता है बल्कि लाहौर में ही शान से रहता है. वह बाक़ायदा सोशल मीडिया बेवसाउट ट्विटर के ज़रिए अपने संदेश दुनिया तक पहुंचाता है. एनआईए की बेवसाइट पर उसके घर का पता तक दिया गया है. ये पता है मकान नंबर 116 E, मोहल्ला जौहर, लाहौर. ये वह घर है जहां कड़े पहरे और हथियारबंद लड़ाकों के साए में हाफिज़ सईद पलता है.

 

क्या हाफिज़ सईद तक पहुंचना वाक़ई मुश्किल है? करीब पांच महीने पहले, 2 जुलाई 2014 को भारतीय पत्रकार वेद प्रताप वैदिक ने पाकिस्तान में हाफिज़ सईद से मुलाक़ात की. वो उससे मिलने वाले पहले भारतीय पत्रकार हैं. वेद प्रताप वैदिक बताते हैं कि किस तरह हाफिज़ सईद भीड़-भाड़ वाले इलाके में रहता है और कैसे उसकी सुरक्षा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से भी ज़्यादा है.

 

लेकिन मुंबई हमले के मोस्टवांटेड से इस मुलाकात को लेकर वेद प्रताप वैदिक खुद विवादों से घिर गए. ये तक सवाल उठे कि वैदिक ने बीजेपी के कहने पर हाफिज़ सईद से मुलाकात की?  इस मुलाकात के मकसद को लेकर संसद तक में हंगामा हो गया. इसके बाद तो कांग्रेस और बीजेपी दोनों इंकार करती रहीं कि उनकी पार्टी से वैदिक का कोई भी संबंध है.

 

हाफिज़ सईद से आमने-सामने बैठकर बात करने भारतीय पत्रकार वेद प्रताप वैदिक बताते हैं कि उन्होंने हाफिज़ सईद से सबसे पहला सवाल मुंबई हमले के बारे में ही किया. उसने कहा कि उसे पता ही नहीं था. पाकिस्तान कोर्ट ने बरी किया. अपने बचाव में हाफिज़ सईद का कहना था कि पाकिस्तान की अदालतों ने तो उसे बाइज्जत बरी कर दिया. फिर भारत उसके पीछे क्यों पड़ा रहता है? वैदिक ने फिर कहा कि पाकिस्तान कोर्ट ने बरी किया. अंतराश्ट्रीय कोर्ट में साबित करो. सिर्फ डेढ़ महीने पहले 10 अक्टूबर 2014 को ही इस्लामाबाद में जमात-उद-दावा की एक रैली में बोलते हुए हाफिज़ सईद ने हजारों लोगों के सामने सरेआम पाकिस्तान सरकार से अपील की कि वह भारत के खिलाफ जेहाद की घोषणा करे.

 

हाफिज़ सईद जैसा शैतान भारत के खिलाफ़ हो तो पाकिस्तान को लड़ाई की बड़ी ज़रूरत है. इन हालात में क्या ऐसी कोई भी संभावना बन सकती है कि अमेरिका या संयुक्त राष्ट्र संघ के किसी भी दवाब से पाकिस्तान हाफिज़ सईद को भारत के हवाले कर दे? जानकार इससे इंकार करते है.

 

पूर्व सचिव सुधीर कुमार ने बताया कि आप कहिए कोहीनूर हीरा आपको दे दें. क्यों दे दें भई. आप अगर ले सकते हैं तो हमको मार कर ले लीजिए. हमारे लिए ये आशा रखना मूर्खता होगी. आतंकवाद के खिलाफ़ अपने मिशन में जिस तरह अमरीका ने पाकिस्तान की सीमा में घुसकर ओसामा बिन लादेन का ख़ात्मा किया था. क्या हाफ़िज़ सईद को पकड़ने या ख़त्म करने के लिए ऐसा क़दम उठाया जा सकता है?

 

पूर्व सचिव सुधीर कुमार ने कहा कि स्पेसिफिक टेक्नॉलॉजी का यूज़ करके. बम गिराकर. लेकिन उसके लॉन्ग टर्म नतीजे क्य़ा होंगे. और ओसामा का ठिकाना तो टेरिटेरिएट बॉर्डर के करीब था. यहां तो ऐसा भी नहीं है.

 

सुरक्षा मामलों के जानकार अफसर करीम ने बताया कि ओसामा को मारना कितना मुश्किल था अमेरिका के लिए. हमारे लिए और भी मुश्किल है. फिर भी हल यही कि अगर किसी तरह एलिमिनेट कर सकें. पाकिस्तान हमें सौंप दे. ऐसा नहीं होगा.

 

ज़्यादातर जानकार यही मानते हैं कि वहां घुसकर हाफ़िज़ का खात्मा करना बेहद मुश्किल है. ख़ासतौर पर जब उसे पाकिस्तान का पूरा संऱक्षण मिला हुआ है. 26-11 के मुंबई हमले के 6 साल बीतने और पुख्ता सबूत देने के बाद भी भारत के हाथ कुछ नहीं लगा. क्या और कोई कानूनी रास्ता है. पाकिस्तान पर हाफिज़ को सौंपने का दवाब कैसे बनाया जा सकता है?

 

पत्रकार वेद प्रताप वैदिक ने कहा कि आप अभी तक दाऊद को ही नहीं पकड़ सके हैं. पाकिस्तान हाफिज़ सईद के खिलाफ़ भारत के सबूतों को पूरी तरह खारिज कर चुका है. यही नहीं इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स के मुताबिक वह अब भी भारत के खिलाफ़ आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त है. अपने भाषणों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आंतकवाद पर कड़ा रुख अख़्तियार करने की बात करते रहे हैं. उम्मीद भले ही जगी है. मगर आज 6 साल बीतने के बाद भी, 26-11 में ज़ख़्मी हुई मुंबई और पूरे भारत को अपने सबसे बड़े गुनहगार के ख़ात्मे का इंतज़ार है.

 

मुंबई के आतंकियों से ये बोला था हाफिज

 

मुंबई आतंकी हमले का मास्टर माइंड हाफ़िज़ सईद ने जेहादियों से कहा था “अगर जेहाद के रास्ते पे चलते हुए तुम्हारी मौत भी होती है तो यक़ीन करो तुम्हारे चेहरों पर ख़ुदाई नूर होगा, तुम्हारे चेहरे चांद की तरह चमकेंगे. याद रखो तुम अल्लाह के सबसे प्यारे बंदे हो. तुम्हें सीधे जन्नत नसीब होगी. “

 

जकीउर्रहमान लखवी माइंड वाश करते हुए कहा था कि हाफ़िज़ सईद साहब सही फरमा रहे हैं. हिंदुस्तान की मालियत, उनकी फाइनेंसिएल ताकत का सेंटर बंबई है. और हमें समंदर के रास्ते बंबई में घुसकर तबाही मचानी है.

 

हाफिज बोला “जेहाद का वक़्त आ गया है. वक़्त आ गया जब तुम्हें हिंदुस्तान में घुसकर, उनके दिल पे हमला करना है.” ये मीटिंग सितंबर 2008 में पाकिस्तान के मुरीदके में, लश्कर-ए- तैयबा के हेडक्वाटर्स पर हुई थी. जेहाद का भाषण सुनने वाले ये वे हमलावर थे जिनका मक़सद, समंदर के रास्ते मुंबई में घुसकर तबाही मचाने का था. 26-11 के मुंबई हमलों की चार्जशीट के मुताबिक, इन हमलावरों की अपने आक़ा से ये आख़िरी मुलाक़ात थी. आतंक का वह आक़ा, जिसने अब तक तरह तरह की ट्रेनिंग देकर, इन हमलावरों के ज़ेहन में हिंदुस्तान के ख़िलाफ़ नफ़रत का ज़हर भरा था. ये शख़्स, जिसका नाम है-हाफिज़ मुहम्मद सईद. और फिर हाफिज़ सईद के सिखाए इन हमलावरों ने 26 नवंबर की रात मुंबई में क़हर बरपा दिया.

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Web Title: 26/11 Special: hafiz saeed
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