पटना: रावण दहन के दौरान हादसे में 33 लोगों की मौत, 100 से ज्यादा लोग जख्मी

By: | Last Updated: Saturday, 4 October 2014 2:44 AM
32 killed in Patna stampede after Dussehra event

नई दिल्ली: पटना के गांधी मैदान में रावण दहन के बाद हुए हादसा में 33 लोगों की मौत हो गई है जबकि 100 से ज्यादा लोग जख्मी हुए हैं. लोगों का कहना है कि बिजली का तार गिरने की अफवाह के कारण भगदड़ मची.

 

हादसे के बाद सीएम जीतनराम मांझी के बर्ताव को लेकर सवाल उठे हैं. हादसे के बाद मांझी गांव चले गए थे. घंटों उनसे संपर्क नहीं हुआ. बीजेपी ने मांझी का इस्तीफा मांगा है. हादसे के बाद राहत का काम चल रहा है लेकिन राजनीति भी शुरू हो गई है.

 

घायलों का इलाज पीएमसीएच में चल रहा है. देर रात बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी पीएमसीएच पहुंचे थे. हालांकि इससे पहले रावण दहन के कार्यक्रम में भाग लेने के बाद वो गया के अपने गांव चले गए थे और घंटों तक उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया.

 

गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक जब गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने उनसे हादसे की जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने कहा कि अभी उनके पास हादसे की पूरी जानकारी नहीं हैं. विपक्ष इस हादसे के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहरा रही है वहीं राज्य सरकार हादसे की जांच की बात कह रही है.

 

आपको बता दें कि गांधी मैदान में ये हादसा रावण दहन के बाद हुआ. हादसे के कुछ चश्मदीदों का कहना है कि किसी ने अफवाह फैला दी कि बिजली की तार गिरी है. इस अफवाह के बाद लोगों में भगदड़ मच गई और 32 लोगों की मौत हो गई. हादसे में कई लोग लापता भी हैं.

 

हेल्प लाइन नंबर-  0612-22219810 और  09431800675

 

हादसे का जिम्मेदार कौन?

ये सवाल तो बना हुआ है कि किसकी लापरवाही से इतना बड़ा हादसा हुआ लेकिन सवाल बिहार के सीएम जीतनराम मांझी को लेकर भी उठ रहे हैं. घंटों तक उन्हें पता ही नहीं था कि पटना में हुआ क्या है. जब गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने उनसे हादसे की जानकारी लेने के लिए फोन किया तो उन्होंने कहा कि उन्हें पता नहीं है.

 

पटना के गांधी मैदान में मची तबाही के इस मंजर के बीच सुलगता सवाल है कि क्या इस हादसे के लिए बिहार सरकार और पटना पुलिस प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है?

 

इस सवाल का जवाब तलाशने से पहले कुछ तथ्यों पर गौर फरमाइ-

 

  • जिस गांधी मैदान में हादसा हुआ, उसमें कुल 9 गेट है. 4 गेट पहले से बंद थे. बाकी बचे 5 में से 3 गेट वीवीआईपी मतलब अति विशिष्ट लोगों के लिए रिजर्व रखे गए थे.
     

  • मतलब आम आदमी, वो आम आदमी जो एक लोकतांत्रिक व्यवस्था के केंद्र बिंदु में होता है, उसके लिए बस दो गेट.
     

  • रावण दहन के समय जुटी इस भीड़ पर नजर दौड़ाइए, और फिर ये सोचिए कि इतनी बड़ी भीड़ इस दो गेट से कैसे निकली होगी ?

 

जिस समय ये महाशय रावण दहन के लिए गांधी मैदान पहुंचे तो पूरा पुलिस प्रशासन इनकी खातिरदारी में जुटा हुआ था और ये जनाब जैसे ही गांधी मैदान से विदा हुए पुलिस प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो गई. और सीएम साहब गांधी मैदान से निकलकर सीधे गया के अपने गांव पहुंच गए. बिहार के सीएम जीतन राम मांझी कैसे काम कर रहे हैं इसका अंदाजा आप इस बात से भी लगा सकते हैं कि हादसे के घंटों बाद तक इन्हें हादसे की मामूली जानकारी तक नहीं थी.

 

मुआवजे की घोषणा-

सरकार ने मृतकों के परिजनों को तीन-तीन लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों को 50-50 हजार रुपये तथा मामूली रूप से घायल होने वालों को 20-20 हजार रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है।

 

 

आपको बता दें कि  है 19 नवंबर 2012 को भी पटना के छठ घाट पर मचे भगदड़ में 18 लोगों की मौत हो गई थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को पटना में दशहरा के दौरान भगदड़ में मारे गए लोगों के लिए शोक व्यक्त किया. मोदी ने ट्वीट में कहा है, “पटना में भगदड़ मचना अत्यंत दुखद है। मैंने बिहार के मुख्यमंत्री से स्थिति की जानकारी ली है” उन्होंने कहा है, “इस घटना में जिनकी जान गई है उनके परिवार के प्रति मैं संवेदना व्यक्त करता हूं.”

 

यहां देखिए- कितने बजे क्या हुआ पटना में-