नेहरु ने नेताजी को क्यो कहा था 'युद्ध का अपराधी'?

By: | Last Updated: Saturday, 23 January 2016 10:27 PM
netaji

वेबसाइट ने ताईवान के नानमोन मिलिट्री अस्पताल में नेताजी की देखभाल करनेवाली नर्स का बयान भी जारी किया है. नर्स शान ने अपने बयान में कहा था, वो 18 अगस्त 1945 को चल बसे. मैंने उनकी मृत्यु तक उनकी देखभाल की. जब कभी उन्हें थोड़ी देर के लिए होश आता वो कराहते हुए पानी मांगते थे. मैंने उन्हें कई बार उन्हें पानी पिलाया.

नई दिल्लीः आजादी के 68 साल बाद और नेता जी की 119वीं जयंती के मौके पर उनसे जुड़े कई अहम दस्तावेज आज मोदी सरकार ने जारी किए . लेकिन जिन 100 फाइलों को सार्वजनिक किया गया है उसमें से सबसे ज्यादा चर्चा उस चिट्ठी की हो रही है जो कथित रूप से नेहरू ने ब्रिटेन के उस वक्त के प्रधानमंत्री एटली को लिखी थी जिसमें बोस को युद्ध अपराधी बताया गया है अब कांग्रेस ने इस चिट्ठी को फर्जी करार दिया है.

एक क्लिक से नेताजी सुभाष चंद्र बोस की वेबसाइट पर से पर्दा हट गया लेकिन नेताजी की मौत के रहस्य से पर्दा उठना बाकी है. दिल्ली के नेशनल आर्काइव्स में प्रधानमंत्री मोदी ने नेताजी के परिवार की मौजूदगी में NETAJIPAPAERS.GOV.IN पोर्टल लॉन्च किया.. इसी पर नेताजी से जुड़ी सौ फाइलें डाली गई हैं. अब नेताजी के परिवार ने मोदी को धन्यवाद करते हुए कांग्रेस पर फाइलें दबाने का आरोप लगाया हैं

सौ फाइलों में जो सच है वो धीरे-धीरे सामने आ रहा है लेकिन इन्ही फाइलों में मौजूद एक चिट्ठी पर विवाद हो गया है. चिट्ठी के हवाले से खुलासा हुआ है कि नेताजी को पंडित जवाहर लाल नेहरू ने युद्ध अपराधी था.
दस्तावेजों के मुताबिक देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के स्टेनोग्राफर ने नेताजी की मौत की जांच के लिए बने खोसला आयोग के सामने शपथपत्र देकर नेहरूजी को एक चिट्ठी पेश की थी. स्टेनोग्राफर के मुताबिक नेहरूजी ने ये चिट्ठी ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली को लिखी थी. चिट्ठी में लिखा गया था कि ”मुझे अपने विश्वस्त सूत्रों से पता चला है कि सुभाष चंद्र बोस, युद्ध अपराधी को स्टालिन ने रूस की सीमा में दाखिल होने की मंजूरी दी है. ये रूस की ओर से किया गया धोखा और विश्वासघात है. रूस ब्रिटेन और अमेरिका का साथी है इसलिए ऐसा नहीं होना चाहिए था. आप इस पर गौर करें और जो उचित समझते हैं वो कार्रवाई करें.
आपका विश्वासी.. जवाहर लाल नेहरू
दावा तो ये किया गया कि ये चिट्ठी खुद पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने लिखवाई थी लेकिन जो दस्तावेज सामने आए हैं उसमें नेहरूजी का सिर्फ नाम लिखा है लेकिन उनके दस्तखत नहीं हैं.अब कांग्रेस इस चिट्ठी को फर्जी करार देकर कह रही ये साजिश है जिसे बेनकाब किया जाएगा
नेताजी से जुड़े दस्तावेज देखकर मोदी सरकार के मंत्री महेश शर्मा ने दावा किया कि नेहरू को खुद मौत की सही-सही जानकारी नहीं थी.दिल्ली में चिट्ठी पर दंगल हो रहा था कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रूस से फाइलें लाने की मांग कर दी.नेहरू की चिट्ठी में भी रूस पर दबाव डालने का जिक्र था. ऐसे में सवाल ये है कि बोस को युद्ध अपराधी बताने का सच क्या है.
नेताजी को युद्ध अपराधी बताने वाली इस चिट्ठी पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि 1945 में जब नेताजी की इंडियन नेशनल आर्मी यानी INA ने सरेंडर किया तो अंग्रेजों ने INA के अफसरों पर सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने और हत्या के केस में मुकदमा चलाया. ये मुकदमा दिल्ली के लालकिले में लड़ा गया. इसमें बचाव पक्ष की ओर से खड़े होने वाले वकीलों में खुद जवाहरलाल नेहरू भी थे.

ऐसे में बड़ा सवाल ये है …
क्या इस चिट्ठी के जरिये नेहरू बनाम बोस करने की साजिश रची जा रही है ?
क्या चिट्ठी को आधार बनाकर कांग्रेस पर कटघरे में रखना चाहती है मोदी सरकार ?

नेताजी की फाइलों में वो दस्तावेज भी मौजूद है जिसके मुताबिक साल 2001 में ब्रिटेन सरकार से जब नेताजी को युद्ध अपराधी घोषित करने के बारे में पूछा गया था तब ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि
दूसरे विश्वयुद्ध के बाद ब्रिटेन ने युद्ध अपराधियों की जो सूची बनाई थी उसमें नेताजी का नाम नहीं है ..

क्योंकि गांधी और बोस के खराब रिश्ते तो जगजाहिर थे लेकिन अगर ये चिट्ठी सही है तो नेहरू भी बोस के विरोधी कहलाएंगे.. ऐतिहासिक दस्तावेजों पर सवाल उठा रही कांग्रेस चिट्ठी का क्या तोड़ निकालेगी इसका इंतजार है.

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: netaji
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017