35 किसानों की आत्महत्या पर जवाब कौन देगा शिवराज सिंह चौहान?

By: | Last Updated: Thursday, 29 October 2015 12:00 PM
35 farmers commit Suicide

भोपाल: मध्य प्रदेश में इस बार सोयाबीन की फसल की भारी बर्बादी हुई है. कर्ज में डूबे करीब 35 किसानों ने अब तक फसल की बर्बादी के बाद खुदकुशी कर चुके हैं. किसानों के हालात को देखते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रेडियो पर किसानों से बात की.

 

शिवराज ने  रोडियो पर  कहा कि किसानों को राहत कैसे मिले इसके लिए उन्होंने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का फैसला लिया है. आखिर वो कौन से हालात थे जिसने किसानों को खुद की जान लेने को मजबूर कर दिया. कैसे हैं किसानों के हालात. पेश है आपके संवाददाता ब्रजेश राजपूत की खास रिपोर्ट.

 

भोपाल से 100 किलोमीटर दूर सिहोर जिले का करारी गांव है. गांव के गजराज मेवाडा ने 15 अक्टूबर को खेत में जहर खाकर आत्महत्या कर ली. गजराज के पास चार एकड़ जमीन थी जिसमें सोयाबीन की फसल लगायी थी. पानी की तंगी के चलते फसल सूख गई.

 

बैंक, बिजली विभाग, सोसायटी और फिर साहूकारों का कुल मिलाकर पांच लाख का कर्ज कैसे चुकायेंगे इस निराशा में गजराज ने जहर खा लिया. चार बहनों का अकेला भाई गजराज अपने घर में अकेला कमाने वाला था. अब उसके बुजुर्ग दादा दादी मां बाप और पत्नी सहित दो बच्चों के सामने परवरिश का संकट आ गया है.

 

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के संसदीय इलाके में इस गांव से सटे लसूडिया सूखा गांव की सरजू बाई ने भी सोयाबीन की फसल खराब होने के बाद खुदकुशी कर ली. सोयाबीन की फसल की बर्बादी के चलते एमपी में किसानों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा. 21 अक्टूबर को उज्जैन जिले में दो किसानों ने मौत को गले लगा लिया.

 

यहां के पिपल्या हामा गांव के्र किसान मदन ने बेटी की षादी के लिये कर्जा लिया था उम्मीद थी कि सोयाबीन की फसल आने के बाद अच्छे दिन आयेंगे मगर फसल ने धोखा दिया तो निराषा में फांसी लगा ली. रूनजी गांव के मदनलाल ने भी फसल खराब हुयी तो आत्महत्या कर ली.         

                          

एमपी देश में सोयाबीन का 65 फीसदी उपजाता है लेकिन इस बार सोयाबीन ने किसानों को बुरी तरह धोखा दिया है. राज्य में इस बार करीब 52 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन लगा था जिससे अस्सी लाख टन सोयाबीन होने का अंदाजा था मगर फसल में फल नहीं लगने के कारण सिर्फ चालीस लाख टन सोयाबीन का अनुमान है. कुछ किसानों ने तो फसल पकने से पहले ही फसल खेत से उखाड दी थी.

 

सोयाबीन की फसल की बर्बादी का ये सदमा छोटे किसान बर्दाश्त नहीं कर पा रहे. सोयाबीन की फसल के लिये लिया कर्जा लौटाना उनको असंभव दिख रहा है और वो ये कदम उठा रहे है.

 

किस जिले में कितने किसानों ने मौत को गले लगाया

 

अब तक एमपी के बुंदेलखंड के सागर में पांच, दमोह और रायसेन में दो दो, महाकौशल के बैतूल और होशंगाबाद में तीन तीन, बघेलखंड के सतना और रीवा में एक एक, सिहोर में पांच, विदिशा में तीन, उज्जैन और शाजापुर में दो दो और निमाड के खंडवा में चार और खरगोन में दो किसान ने आत्महत्या की है. यानी कि कुल 35 किसानों ने खुदकुशी की और अधिकतर की मौत की वजह सोयाबीन फसल की बर्बादी रही है.  

 

एमपी सरकार मान रही है कि इस बार 58 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसल खराब हुयी है. जिसके राहत में तीन हजार करोड रुपये किसानों को बांटे जायेंगे. इनमें से 500 करोड बांटने के आदेश दे दिये गये है. मगर आधे से ज्यादा प्रदेश में सोयाबीन की फसल की बर्बादी का कारण क्या है इसे तलाशने की कोशिश नहीं कर रही. क्या बीज नकली थे?

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Web Title: 35 farmers commit Suicide
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