राफेल सौदे में आ सकती हैं अड़चनें, दसॉल्ट ने बढ़ाई विमानों की कीमत: रिपोर्ट

By: | Last Updated: Friday, 14 August 2015 2:54 AM

नई दिल्लीः भारत ने फ्रांस के साथ 36 राफेल लड़ाकू विमानों की तत्काल आपूर्ति के लिए करार तो कर लिया है  लेकिन अब यह सौदा अड़चन में फंसता नजर आ रहा है. फ्रांस की राफेल बनाने वाली कंपनी दसॉल्ट ने अपने विमानों की कीमत में इजाफा कर दिया है.

 

 इस बढ़ी राशि को लेकर अभी कोई निश्चित आकड़ा सामने नहीं आया है, लेकिन 10 अरब डॉलर के सौदे को लेकर पहले ही पीएम पर विपक्ष और पार्टी के बड़े नेता सुब्रमण्यम स्वामी निशाना साध चुके हैं.

 

ऐसे में कीमते बढ़ने के बाद इस मंहगे विमान सौदे को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.

 

रक्षामंत्रालय के दो वरिष्ठ आधिकारियों ने रॉयटर्स से बात करते हुए बताया कि ‘दोनों ओर से प्रति विमान की कीमत को लेकर थोड़े मतभेद हैं. दसॉल्ट एविएशन भारत की इस डील की सबसे अहम कड़ी है.’   

 

पहले भी विमानों की कीमत को लेकर आ चुकी है खबर

इससे पहले भी दसॉल्ट के विमानों की कीमत बढ़ने की खबर सामने आई थी उस वक्त कंपनी ने कहा था, ‘जैसा कि दिसंबर में दोनों देशों के रक्षा मंत्रालयों ने फैसला किया था, उसके अनुरूप एक अधिकारप्राप्त टीम पहले ही भारत पहुंच चुकी है और वार्ता को आगे बढ़ा रही है. दसॉल्ट एविएशन के सीईओ एरिक ट्रेपीयर ने कहा कि कीमत का मसला बिल्कुल साफ है. एलआई (न्यूनतम निविदाकर्ता) के पहले दिन से हमारी कीमत समान है. इसलिए उस मोर्चे पर कोई बदलाव नहीं हुआ है. दसॉल्ट के यहां सरकारी कंपनी एचएएल द्वारा बनाए जाने वाले 108 लड़ाकू विमानों के लिए गारंटी देने को इच्छुक नहीं होने के दावे के बारे में पूछने पर ट्रेपीयर ने इंकार किया और कहा कि आरएफपी में जो कहा गया है वह उससे पीछे नहीं हटा है.’

 

ट्रेपीयर ने कहा था, ‘हम पूरी तरह अपने अनुरोध प्रस्ताव के जवाब पर कायम हैं. इसी जवाब से भारत सरकार ने एल 1 को चुना, जो राफेल था और हम उसी प्रतिबद्धता पर कायम हैं जैसा कि आरएफपी में जिक्र किया गया था.’

 

एयरो इंडिया एयर शो में हिस्सा लेने के लिए यहां आए ट्रेपीयर ने जोर दिया कि उनकी कंपनी आश्वस्त है कि वे पूरी तरह आरएफपी पर कायम है. इससे पहले जनवरी में भारतीय रक्षा सूत्रों ने दावा किया था कि गारंटी शर्तों और कीमतों में बढ़ोतरी के कारण फ्रांस के साथ सौदे की राह में अड़चनें आ गई हैं.

 

कीमत बढ़ोतरी के बारे में ट्रेपीयर ने कहा था, ‘यह मत भूलिए कि 24 विमानों, ‘फ्रिगेट बेड़े और युद्धक सामग्री के लिए मिस्र के साथ हुए अनुबंध के मामले में क्या प्रकाशित हुआ है. उसमें केवल विमान ही नहीं थे.’

 

वर्ष 2012 में जब दसॉल्ट का जब पहली बार चयन हुआ तो भारत दसॉल्ट से आयात करने वाला पहला देश हो गया था.

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Web Title: 4 Months After PM Intervened, Rafale Deal in Trouble: Report
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