व्यापम की सीबीआई जांच शुरू, शिवराज को मिला अमित शाह का साथ

By: | Last Updated: Monday, 13 July 2015 2:20 AM
40-member CBI team to begin Vyapam scam investigation today

नई दिल्ली: सीबीआई आज से व्यापम घोटाले की जांच करेगी. सीबीआई टीम आज भोपाल पहुंचकर एसआईटी से केस डायरी अपने जिम्मे ले लेगी. व्यापम घोटाले की जांच के लिए सीबीआई ने 40 अफसरों की टीम बनाई है.

 

दूसरी ओर घोटाले की गूंज के बीच मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज के साथ बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह दिखे.  अमित शाह आज सुबह-सुबह भोपाल में दिखे और माना जा रहा है कि वे डैमेज कंट्रोल की कोशिश में यहां आए हैं.

 

केजरीवाल ने उठाए जांच पर सवाल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने यह कहते हुए सीबीआई की स्वतंत्रता पर सवाल उठाया कि यह प्रमुख जांच एजेंसी केंद्र से जुड़ी है लेकिन उन्होंने यह भी उम्मीद की कि वह व्यापम घोटाले की जांच में इन बातों से उपर उठकर काम करेगी. केजरीवाल ने कहा, ‘‘सीबीआई केंद्र से संबंधित है. सीबीआई की भूमिका उत्साहजनक नहीं रही है.’’

 

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन यह जितना बड़ा घोटाला है और उसमें जितने लोगों की मौत हुई है, उसे देखते हुए देश उम्मीद करता है कि सीबीआई इस मौके पर ऊपर उठकर निष्पक्ष काम करेगी.’’ उनकी टिप्पणी ऐसे समय आयी है जब कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने व्यापम मामलों और उससे जुड़ी मौतों की जांच सीबीआई को दे दी है.

 

‘आप’ ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी जांच की मांग की थी. इस घोटाले से मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार घिर गयी है.

 

बीजेपी को नहीं है व्यापम पर अफसोस

व्यापम पर मध्य प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष नंद कुमार चौहान ने शर्मनाक बयान दिया है. उन्होंने कहा, “पार्टी को व्यापम का कोई अफसोस नहीं है.” नंद कुमार चौहान ने कहा कि 7 लाख भर्तियों में से 2 लाख भर्तियां ही गलत हुई तो इसमें अफसोस क्या है?

 

मौत के डर के बीच बीजेपी की जनसभाएं

व्यापम से जुड़ी छात्रा नम्रता डामौर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनाने वाले डॉक्टर को डर सता रहा है. दो दिन से वे अंडरग्राउंड हैं. बीजेपी सरकार मध्यप्रदेश की जनता को कथित व्यापम घोटाले का सच बताने वाली है. 15 जुलाई को जिला मुख्यालयों पर बीजेपी जनसभाएं करेगी. 

 

क्या है व्यापम घोटाला ?

उच्च शिक्षा मंत्री के तहत काम करने वाला व्यावसायिक परीक्षा मंडल मेडिकल, इंजीनियरिंग और दूसरी व्यावसायिक पढ़ाई के साथ सरकारी नौकरियों के लिए प्रवेश परीक्षाएं करवाने और छात्रों के चयन का काम करता है. व्यापम घोटाला दो हिस्सों में बंटा हुआ है. पहला तो ये कि मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी प्रवेश परीक्षाओं में धांधली हुई. वहीं दूसरा सरकारी नौकरियों के लिए हुई परीक्षाओं में भी गड़बड़ी करके नाकाबिल लोगों को नौकरी दी गई.

 

व्यापम मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा राज्य मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा के अधीन था-घोटाले के तार लक्ष्मीकांत शर्मा से जुड़ रहे थे. उन्हें भी गिरफ्तार किया जा चुका है. साथ ही घोटाले के कर्ताधर्ता उनके ओएसडी ओ पी शुक्ला, व्यावसायिक परीक्षा मंडल के नियंत्रक पंकज त्रिवेदी, ऑनलाइन विभाग के सर्वेसर्वा नितिन महिंद्रा पर शिकंजा कसा जा चुका है. इनकी ही मिलीभगत से भर्ती घोटाले का खेल चल रहा था.

 

आरोप है कि सिफारिश करने वालों में राज्यपाल रामनरेश यादव, उनके बेटे शैलेश यादव, ओएसडी धनराज यादव, केंद्रीय मंत्री उमा भारती से लेकर संघ के सुरेश सोनी, केसी सुदर्शन और वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं.

 

इस बीच घोटाले से जुडे आरोपियों की संदिग्ध मौत का सिलसिला भी शुरू हो गया. एमपी के राज्यपाल रामनरेश यादव के बेटे शैलेश यादव की भी 24 मार्च को लखनऊ में संदिग्ध हालत में मौत हो गई थी.

 

मामले की जांच कर रही एसटीएफ की निगरानी के लिए हाईकोर्ट ने एसआईटी बनाई है. कांग्रेस सीबीआई जांच की मांग कर रही है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस मामले की जांच शुरू कराने का श्रेय खुद को देते हैं. जबकि कांग्रेस घोटाले का आरोप मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर लगा चुकी है.

 

इस बीच रतलाम के पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने व्यापम घोटाले पर ‘व्यापमगेट’ नाम से एक किताब भी लिखी है. इसमें उन्होंने घोटाले से जुड़े 250 अधिकारियों समेत मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ सबूत पेश करने का दावा किया है.

 

कैसे होती थी धांधली?

1.  कांग्रेस के मुताबिक शुरू में धुंधला फोटोग्राफ लगाकर असली विद्यार्थी की जगह नकली विद्यार्थी को परीक्षा में बिठाया जाता था.

 

2. इसके अलावा परीक्षा में पहले काफी अच्छे अंक प्राप्त कर चुके योग्य विद्यार्थी को दोबारा परीक्षा में बिठाया जाता था, जो दूसरे विद्यार्थी को नकल करवाता था. इसके लिए पैसा खिलाकर दोनों के रोल नंबर पास पास रखे जाते थे.

 

3. पैसा खिलाने वाले विद्यार्थी से अपनी ‘ऑप्टिकल मार्क रिकग्निशन’ (ओएमआर) शीट को खाली छोड़ने को कहा जाता था, इन्हें बाद में भोपाल में व्यापम हेडक्वार्टर में सही उत्तरों से भर दिया जाता था, ताकि वह विद्यार्थी परीक्षा में पास हो जाए.

 

इस जालसाजी के पैमाने का अनुमान इस बात से हो जाता है, कि 2008 से 2013 के बीच मध्यप्रदेश सरकार ने व्यापम के द्वारा 68 परीक्षाएं आयोजित कीं, जिनमें 49,44,104 विद्यार्थी बैठे और विभिन्न सरकारी विभागों जैसे पुलिस, वन, राजस्व, शिक्षा आदि में 1,40,000 लोगों की भर्ती की गई. इसी तरह 99 प्रवेश परीक्षाओं में 27,32,614 विद्यार्थी बैठे.

 

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