हिमाचल प्रदेश: पंडित सुखराम और उनके बेटे का सियासी सफरनामा 

हिमाचल प्रदेश: पंडित सुखराम और उनके बेटे का सियासी सफरनामा 

चुनाव से ऐन पहले सुखराम ने अपने बेटे के साथ थामा बीजेपी का दामन.

By: | Updated: 15 Oct 2017 08:23 PM

शिमला:  हिमाचल में चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. वीरभद्र सरकार में कैबिनेट मिनिस्टर अनिल शर्मा ने 5 साल मंत्री रहने के चुनाव से ऐन पहले बीजेपी का दामन थाम लिया है. माना जा रहा है बीजेपी जो सूची प्रत्यशियों की घोषित करने वाली है उसमें अनिल शर्मा या उनके बेटे आश्रय शर्मा या दोनों का नाम हो सकता है. अनिल शर्मा कांग्रेस नेता पंडित सुखराम के बेटे हैं. वो सलमान की बहन अर्पिता के पति आयुष शर्मा के पिता हैं.


हिमाचल प्रदेश के मंडी से विधायक अनिल शर्मा चुनाव से ऐन पहले बीजेपी में शामिल होकर हिमाचल की सियासत को गर्मा दिया है.अनिल शर्मा ने कहा कि वो कांग्रेस में घुटन महसूस कर रहे थे.


अनिल शर्मा के बीजेपी में दाखिल होने पर मुख्यमंत्री वीरभद्र ने कहा कि हमे उनके बारे काफी लंबे समय से. मैं चाहता था कि ना जाये लेकिन कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है. अनिल शर्मा के अनदेखी के आरोपो पर वीरभद्र सिंह ने कहा कि कोई अनदेखी नही हई है. उनके इलाके में खूब काम किया है. और मंत्रियों के पार्टी छोड़ने पर वीरभद्र ने कहा कि ऐसा होने वाला नही है अगर ऐसा हो जाये तो निजात होगी.


कौन हैं पंडित सुखराम और उनके बेटे अनिल शर्मा?


पंडित सुखराम और अनिल शर्मा कौन हैं और उनकी सियासी हैसियत क्या है इस पर एक नज़र डालते हैं.  पहले बात अनिल शर्मा की. अनिल शर्मा मंडी सदर से मौजूदा विधायक हैं. अनिल तीन बार विधायक और दो बार कांग्रेस सरकार मंत्री रह चुके है. वर्तमान में उनके पास ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्रालय था. अनिल शर्मा हिमाचल कांग्रेस नेता पंडित सुखराम के बेटे हैं. पंडित सुखराम नरसिम्हा राव केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं. 1997 के आखिर में सुखराम पर भ्रष्टाचार के आरोपों की वजह से पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया था. सुखराम ने 1998 में हिमाचल विकास कांग्रेस गठन करके चुनाव लड़ा था और 5 सीट जीती थी.


1998 में ही बीजेपी के प्रेम कुमार धूमल के साथ मिलकर सरकार बनाई थी. सुखराम समेत सभी पांचो विधायक मंत्री बने थे.  साथ ही अपने बेटे अनिल शर्मा को राज्यसभा पहुँचवाया था. 2003 में सुखराम अपनी पार्टी HVC भांग करके फिर कांग्रेस पार्टी शामिल हो गए थे. हिमाचल की सियासत में चर्चा हैं कि कभी वीरभद्र और पंडित सुखराम की नहीं बनी. 7 अक्टूबर को  राहुल की मंडी में हुई रैली में अनिल शर्मा ने धन्यवाद भाषण दिया था लेकिन बताया जाता है कि उनके पिता सुखराम को रैली का आमंत्रण नहीं दिया गया था. अनिल शर्मा ने भी पार्टी छोड़ने का एक कारण पिता को पार्टी में उचित सम्मान ना मिलना बताया है.


कांग्रेस के सामने चुनौती!


तीन बार के विधायक अनिल शर्मा और उनके पिता सुखराम का मंडी जिले में असर बताया जाता है. मंडी ज़िले में 10 विधानसभा सीट आती हैं. 2012 के चुनाव में यहां कांग्रेस-बीजेपी ने पांच-पांच सीटे जीती थी. ऐसे में कांग्रेस के सामने चुनौती है कि सुखराम और अनिल शर्मा की टक्कर के लिए वो किसे मैदान में उतारती है.

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