84 प्रतिशत भारतीयों में पाई जाती है विटामिन डी की कमी: रिपोर्ट

84 प्रतिशत भारतीयों में पाई जाती है विटामिन डी की कमी: रिपोर्ट

By: | Updated: 25 Mar 2014 02:50 PM
मुंबई: बदलती जीवनशैली, असमय में बढ़ते कार्य के घंटे और घर के बाहर की सीमित गतिविधियों के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है और एक अध्ययन के अनुसार 84 प्रतिशत भारतीयों में विटामिन डी की कमी पायी गयी है जिसका एक प्रमुख स्रोत धूप है.

 

बदलती जीवनशैली, असमय में बढ़ते काम के घंटे तथा घर के बाहर की गतिविधियों में कमी के कारण लोगों को आमतौर पर पर्याप्त मात्रा में धूप नहीं मिल पाती और विटामिन डी की कमी हड्डियों और मांस पेशियों की कमजोरी, मधुमेह, हृदय और स्नायु विकार जैसी बीमारियां देखने में आ रही हैं.

 

एसआरएल डाइगनोसटिक्स की एक रिपोर्ट के अनुसार सामान्य स्थिति में एक व्यक्ति को प्रति दिन 1000 से लेकर 2000 आईयू :अंतरराष्ट्रीय यूनिट: तक विटामिन डी की जरूरत होती है.

 

रिपोर्ट के अनुसार 69 प्रतिशत लोगों में विटामिन डी की कमी पायी गयी जबकि अन्य 15 प्रतिशत में विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा नहीं पायी गयी. विटामिन डी की जांच अब भारत में आम हो गयी है और समय पर इसकी जांच कराकर इसकी भरपाई करने से अनेक गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है.

 

विटामिन डी को लेकर हालांकि शोध कार्य अभी जारी हैं लेकिन डाक्टरों का मानना है कि इसे लेने से मधुमेह और हृदय से जुडी बीमारियों में फायदा होता है.

 

एसआरएल डायगनासटिक्स के अध्यक्ष :शोध एवं नवाचार: डा बी आर दास ने बताया कि परीक्षण से पता चला है कि शरीर में विटामिन डी का स्तर समुचित मात्रा में होने पर खराब कोलोस्ट्रोल की मात्रा घटती है और अच्छा कोलोस्ट्रोल बढ़ता है. इसके अलावा शरीर की कोषिकाओं को दुरूस्त करने में मदद मिलती है. इसकी कमी से घुटने का दर्द और आस्टोपोरासिस जैसी बीमारियां भी जन्म लेती हैं.

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