850 करोड़ की संपत्ति के साथ बीजेपी के सबसे अमीर उम्मीदवार बने रवींद्र किशोर सिन्हा, कहानी फिल्म से कम नहीं

By: | Last Updated: Thursday, 30 January 2014 5:56 AM
850 करोड़ की संपत्ति के साथ बीजेपी के सबसे अमीर उम्मीदवार बने रवींद्र किशोर सिन्हा, कहानी फिल्म से कम नहीं

नई दिल्ली: एबीपी स्पेशल में आज बात करेंगे पटना के रवींद्र किशोर सिन्हा की. जिन्होंने राज्यसभा में बीजेपी की तरफ पर्चा भरा है. खास बात ये है कि 850 करोड़ की संपत्ति के साथ सिन्हा नामांकन दाखिल करने वाले सबसे अमीर प्रत्याशी हैं. इसकी वजह इनका नाम चर्चा में आ गया है.

 

पत्नी की संपत्ति मिलाकर सिन्हा साहब ने कुल 850 करोड़ की संपत्ति बताई है. दरअसल, रवींद्र किशोर सिन्हा एक अरबपति बिजनेसमैन हैं जो सिक्योरिटी और इंटेलीजेंस सर्विस देने वाली एसआईएस कंपनी के मालिक हैं.

 

सोमवार को रवींद्र किशोर सिन्हा ने सीपी ठाकुर के साथ बीजेपी प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल किया था. सिन्हा साहब के नाम पर 564 करोड़ रुपए और उनकी पत्नी के नाम पर 230 करोड़ की संपत्ति है. रविंद्र किशोर अगर राज्यसभा में पहुंच जाते हैं तो वो राज्यसभा के सबसे अमीर सदस्य होंगे.

 

मौजूदा वक्त में जेडीयू के महेंद्र प्रसाद 683 करोड़ की संपत्ति के साथ राज्यसभा के सबसे अमीर सदस्य हैं. खबरों के मुताबिक रवींद्र किशोर सिन्हा काफी सालों से राज्यसभा पहुंचने की कोशिश में लगे थे वो बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी के साथ भी काम कर चुके हैं.

 

लेकिन इन सबसे अलग 3000 करोड़ के सालाना टर्नओवर वाली कंपनी के मालिक रविंद्र किशोर सिन्हा की जो बात उन्हें भीड़ से अलग करती है वो है उनकी कामयाबी की दास्तान.

 

62 साल के रविंद्र किशोर सिन्हा की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है. ये कहानी शुरू होती है आज से 42 साल पहले पटना के एक साधारण परिवार में जन्मे रविंद्र किशोर सात भाई बहन थे. परिवार के आर्थिक हालत ठीक नहीं थे. बचपन परेशानियों में गुजरा. 1971 में रविंद्र जब पॉलिटिकल साइंस की डिग्री ले रहे थे तभी परिवार की मदद करने के लिए उन्होंने सर्चलाइट नाम के पब्लिकेशन में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर पार्ट टाइम नौकरी कर ली.

 

साल 1971 में भारत पाकिस्तान युद्ध हुआ था और उन्हें युद्ध का कवरेज करना था. 1973 में रविंद्र जेपी आंदोलन से जुड़े.. जेपी के विचारों का खुलकर समर्थन करना कंपनी मैनेजमेंट को रास नहीं आया और रविंद्र को नौकरी छोड़नी पड़ी.  नौकरी छोड़ते वक्त कंपनी से उन्हें दो महीने के वेतन के तौर पर 250 रुपए मिले थे. हाथ में 250 रुपए थे और नौकरी की सख्त जरूरत लेकिन इस मोड़ पर आकर रविंद्र ने इन पैसों से पटना में एक गैराज किराए पर लिया. और 1974 में सिक्योरिटी एंड इंटेलीजेंस सर्विस यानि एसआईएस बनी. उस वक्त रविंद्र की उम्र सिर्फ 23 साल थी.