टाइम सर्वे: बनारस का चाहे जो हो मोदी को पछाड़ दुनिया जीते केजरीवाल!

By: | Last Updated: Wednesday, 23 April 2014 9:27 AM
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टाईम 100 में वोटींग समाप्त होने के बाद की तस्वीर

दिल्ली: सोशल मीडिया साइट्स के ट्रेंडिग टॉपिक का आलम कई बार ऐसा हो जाता है कि भारत में कोई छींक दे तो ट्रेंड करने लगता है. ये आलम तब है जब देश की कुल आबादी की करीब 15% को ही इंटरनेट कनेक्शन मयस्सर है. ऐसे में अगर आप टाइम मैगज़ीन का टाइम-100 पोल देखने जाएं तो पाएंगे कि दुनिया भर के नेता भारत के दो नेताओं आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के सामने पानी भरते नज़र आ रहे हैं.

 

इसका एक कारण देश में चल रहे आम चुनावों का माहौल भी हो सकता है. मीडिया पर नज़र रखने वाली वेबसाइट द हूट ने भी एक रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि भारत में मोदी और केजरीवाल की पार्टियां दो ऐसे दल हैं जिनकी ऑनलाइन उपस्थिति जबरदस्त है. लोकिन ‘हर-हर मोदी’ टीम का जो दावा है कि मोदी को लोग ‘घर-घर’ जानते हैं वो यहां टाइम-100 पोल की वोटींग बंद होने के बाद गलत साबित होता दिखता है. मोदी की ऑनलाइन सेना जिसकी चर्चा कई मीडिया रिपोर्टस में हुई है, को यहां मुंह की खानी पडी है.

 

जी! वोटिंग रुकने के बाद जो नतीजे आए वो चौंकाने वाले हैं क्योंकि भारत का प्रतिनिधित्व करने की बात करने वाले भारत की विपक्षी पार्टी बीजेपी के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को ऑनलाइन वोटिंग में केजरीवाल से हार का सामना करना पड़ा है. दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित मैगज़ीन में से एक टाइम ने पहली बार ये लिस्ट साल 1999 में निकाली थी. बाद में साल 2004 से टाइम ने इसे हर साल छापने का फ़ैसला लिया.

 

टाइम मैगज़िन की मानें तो टाइम100 की लिस्ट में आने का मतलब ये है कि इसमें जगह बनाने वाली शख्सियतों ने दुनिया में बदलाव लाए हैं.  ये बदलाव अच्छा या बुरा दोनो हो सकता है. इस लिस्ट में बदलाव लाने वालों को इन कैटगरी में बांटा गया है- नेता या क्रांतिकारी, निर्माणकर्ता या बहुत ही शक्तिशाली व्यक्ति, कलाकार या मनोरंजन करने वाला, वैज्ञानिक या बुद्धिजीवी, हिरो या आईकॉन.

 

हालांकि मोदी को केजरीवाल से ज्यादा वोट मिले हैं पर उनमें नकारात्मक वोटों की संख्या ज़्यादा है. मोदी को मिले कुल वोटों की संख्या है 5,075,588 है पर इसमें से 49.7% लोग चाहते हैं कि वो टाइम पर्सन ऑफ़ द इयर बनें जबकि उससे ज़्यादा 50.3% लोग चाहते हैं ऐसा नहीं हो. वहीं केजरीवाल को मिले कुल वोटों की संख्या 3,168,308 है और यहां केजरीवाल के लिए हां कहने वालों की संख्या 71.5% है और ना कहने वालों की संख्या मोदी की तुलना में काफ़ी कम 28.5% है.

अगर भारत की ऑनलाइन उपस्थिति और हमारे नेताओं की लोकप्रियता को समझना हो तो हम आपको बताते हैं कि दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका के राष्ट्रपति ओबामा को कितने वोट मिले और कितने लोगं ने उन्हें स्वीकारा और नकारा. बताने पर शायद आपको विश्वास ना हो पर ओबामा को महज़ 8,629 वोट मिले हैं जिसमें 74 फीसदी लोगों ने उनके लिए हां किया है और बाकियों ने ना.

 

वहीं अमेरिकी निगरानी अभियान का खुलासा कर अमेरिका के पैरों तले ज़मीन खिसका देने वाले एडवर्ड स्नोडेन को कुल 26,364 वोट मिले हैं जिसमें 78.7% लोगों ने उनके लिए हां कहा है. जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल से लेकर आईएमएफ़ की मैनेजिंग डॉइरेक्टर क्रिस्टीना लिगार्ड तक सबको बहुत ही कम वोट मिले.

वहीं भारत की तरफ वापस देखने पर खस्तहाल कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी मिलते हैं जिन्हें मोदी और केजरीवाल की तुलना में हद से ज्यादा कम वोट मिले.

 

राहुल को कुल 90,070 वोट मिले जिसमें ना कहने वालों की संख्या 83.5% रही और महज़ 16.5% लोगों ने हां कहा. वहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान की युवती मलाल यूसुफजई को भी 34,266 वोट मिल पाए जिसमें 73% लोगों ने हां और 27% ने ना कहा. रूस से लेकर चीन तक के राष्ट्रपतियों को केजरीवाल और मोदी की तुलना में बहुत ही कम वोट मिले. पर रूसी राष्टपति व्लादिमीर पुतिन को लोगों ने शकीरा और ओबामा की तुलना में ज़्यादा पसंद किया.

 

केटी पेरी को तीसरा स्थान मिला है और लेडी गागा को 11वां स्थान.

 

इस लिस्ट में खुद को भारत के युवाओं का प्रतिनिधि बताने वाले राहुल 40वें नंबर पर हैं. और नीचे की पायदान की लड़ाई में राहुल को पछाड़ते हुए ओबामा 60वें नंबर पर हैं.

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