एक सीएम, एक डीजीपी, कई सीनियर अफसर, एक FIR और वो 72 घंटे

एक FIR लिखने और लिखाने में 72 घंटे लग गए .. वो भी तब जब मुख्यमंत्री से लेकर डीजीपी और एडवोकेट जनरल तक ने अपना दिमाग़ लगाया ... आप सोच रहे होगें ये कौन सा मामला है ...

By: | Last Updated: Friday, 25 August 2017 11:02 AM
A FIR has taken 72 hours for registeration, despite involvement of CM, DGP

लखनऊ: आप शायद यक़ीन न करें …और करना भी नहीं चाहिए … लेकिन ये बात है सोलह आने सच ..एक FIR लिखने और लिखाने में 72 घंटे लग गए .. वो भी तब जब मुख्यमंत्री से लेकर डीजीपी और एडवोकेट जनरल तक ने अपना दिमाग़ लगाया … आप सोच रहे होगें ये कौन सा मामला है …
चलिए अब आपको बताते हैं इस अद्भुत FIR की कहानी … 21 अगस्त की रात लखनऊ में यूपी के सीएम के बंगले पर मीटींग चल रही थी .. योगी आदित्यनाथ जांच रिपोर्ट के एक एक पन्ने पढ़ रहे थे … गोरखपुर मेडिकल कॉलेज मे 32 बच्चों की मौत की जांच चीफ़ सेक्रेटरी को दी गई थी … दो मंत्री, कई विभागों के प्रमुख सचिव से लेकर कई सीनियर IAS और IPS अफ़सर भी वहां थे .. योगी ने कहा रिपोर्ट में जिन लोगों को ज़िम्मेदार बताया गया है, उनके ख़िलाफ़ केस दर्ज हो …कैसे हो? किन किन धाराओं में? इस पर ख़ूब माथापच्ची हुई … तय हुआ तीन अलग अलग FIR होंगे … मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल समेत छह लोगों के ख़िलाफ़.. लखनऊ के एसएसपी और हज़रतगंज थाने को अलर्ट कर दिया गया … देर रात तक सब दिमाग़ खपाते रहे लेकिन दोषियों पर केस नहीं हो पाया.
22 अगस्त को भी कई बड़े अधिकारियों ने कई बार बैठके की … लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला .. सीएम योगी आदित्यनाथ ने दो बातें कही थीं .. मीडिया को कुछ पता नहीं चलना चाहिए … और मेडिकल कॉलेज में गड़बड़ी करने वालों को कड़ी सज़ा मिले .. यूपी में अब अधिकतर FIR ऑनलाइन होते हैं .. ऐसा होने पर किसी को भी मुक़दमे के बारे में पता चल जाता …  ऑनलाइन होने से मीडिया को भी सब पता चल जाता .. इसीलिए मुक़दमा ऑफ़लाइन लिखने का फ़ैसला हुआ. ATS के आईजी असीम अरूण से पूछा गया “FIR हो जाए और पुलिस की बेवसाइट पर इसका पता न चले, ये कैसे हो.” इस सवाल का जवाब भी ढूँढ लिया गया … लेकिन फिर मीटींग अगले दिन तक के लिए टाल दी गई.
23 अगस्त को एक बार फिर सवेरे से ही सीएम ऑफ़िस से लेकर चीफ़ सेक्रेटरी ऑफ़िस और क़ानून के जानकारों के बीच बैठकें शुरू हो गईं .. FIR मे क्या क्या हो? इसे लेकर दो दर्जन IAS और IPS अफ़सर अपना दिमाग़ खपाते रहे.. बीच बीच में सीएम योगी आदित्यनाथ से भी बातें होती रहीं .. अधिकारियों ने योगी के “किसी को नहीं छोड़ूँगा” के फ़ार्मूले पर एफ़आइआर तैयार करने में जुटे थे .. तीन अलग अलग FIR के बदले एक FIR का तरीक़ा एक IPS ने समझाया तो योगी को ये आयडिया पसंद आ गया…
सीएम योगी आदित्यनाथ और उनके दो क़रीबी अधिकारी नहीं चाहते थे किसी भी तरह मीडिया को न तो जांच रिपोर्ट मिले न ही FIR का पता चले … लेकिन जब 6 लोगों पर केस की बात बाहर आई तो नाराज़ योगी ने तो कई अफसरों को हटाने का मन बना लिया था .. आखिरकार 23 अगस्त की देर रात लखनऊ के हज़रतगंज थाने में मुक़दमा दर्ज हो गया .. वो भी नौ लोगों के ख़िलाफ़ … डॉ कफ़ील खान पर प्राइवेट प्रैक्टिस के साथ ही ग़ैर इरादतन हत्या का केस हुआ … ABP न्यूज़ को मिले एफ़आइआर की कॉपी में लिखा है कि ऑक्सीजन की कमी को जानते हुए भी कफ़ील जान बूझ कर ख़ामोश रहे.. क्योंकि उन्हें कमीशन मिलता था.. गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के दौरे के दौरान योगी ने कफ़ील को डाँटा भी था…
नौ लोगों पर FIR लिखने के लिए जैसा ऑपरेशन लखनऊ में कई घंटों तक चला. वो किसी अजूबे से कम नहीं .. मीडिया को भनक न लगे, इसीलिए तरह तरह के पापड़ बेले गए … लेकिन किसी अफ़सर ने योगी आदित्यनाथ को ये नहीं बताया छिपाने से बात ख़राब होती है .. अगले कुछ घंटों में तो FIR की कॉपी कोर्ट में पहुँच जाएगी .. फिर इतनी हाय ताँबा क्यों? चीफ़ सेक्रेटरी राजीव कुमार ने तो मुझे जांच रिपोर्ट पहले यूपी सरकार की बेवसाइट पर डाउनलोड करने का वादा किया था … लेकिन बाद में उनकी सारी मेहनत इसे छिपाने में लगी रही… फिर भी ABP न्यूज़ के पास सभी रिपोर्ट है .. केस तो लखनऊ में लिखा गया लेकिन अब ये गोरखपुर ट्रांसफ़र हो गया है .. आरोपियों की गिरफ़्तारी के लिए एसटीएफ़ की भी मदद ला जा रही है.

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Web Title: A FIR has taken 72 hours for registeration, despite involvement of CM, DGP
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