अयोध्या विवादित ढ़ांचा केस: सुप्रीम कोर्ट ने दिया आडवाणी, जोशी, उमा भारती समेत 20 को नोटिस

By: | Last Updated: Tuesday, 31 March 2015 6:01 AM
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नई दिल्ली:  सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में मंगलवार को बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, केंद्रीय मंत्री उमा भारती और सीबीआई समेत कई बड़े नेताओं को नोटिस जारी किया.

सुप्रीम कोर्ट ने ये नोटिस इस मामले में लाल कृष्ण आडवाणी समेत संघ से जुड़े कुछ नेताओं को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जरिए बरी किये जाने को लेकर किया है.

 

ये नोटिस हाजी महबूब अहमद नाम के शख्स की याचिका पर जारी किया गया है. हाजी महबूब ने इस मामले में खुद को पक्ष बनाये जाने की मांग की है. उन्होंने बाबरी विध्वंस मामले में अडवाणी और बाकी नेताओं के खिलाफ आपराधिक साज़िश की धारा हटाए जाने का भी विरोध किया है.

 

दरअसल, बाबरी मस्जिद विध्वंस को ले कर एक आपराधिक मुकदमा रायबरेली की विशेष अदालत में लंबित है. इस मामले में सीबीआई ने कुल 21 नेताओं – लालकृष्ण आडवाणी, कल्याण सिंह, बाल ठाकरे (मर चुके हैं), उमा भारती, अशोक सिंघल, मुरली मनोहर जोशी, विनय कटियार, विष्णु हरि डालमिया, गिरिराज किशोर (मर चुके हैं), साध्वी ऋतंभरा, महंत अवैद्यनाथ (मर चुके हैं), रामविलास वेदांती, महंत नृत्य गोपाल दास, परमहंस रामचंद्र दास, बी एल शर्मा ‘प्रेम’, सतीश प्रधान, सी आर बंसल, सतीश नागर, मोरेश्वर सावे,जगदीश मुनि महाराज, धरम दास पर आईपीसी की धारा 120B (आपराधिक साज़िश), 153A (समाज में वैमनस्य फैलाना), 153B (राष्ट्रीय अखंडता को खतरे में डालना) और 505 (अशांति और उपद्रव फ़ैलाने की नीयत से झूठी अफवाहें फैलाना) के तहत चार्जशीट दाखिल की थी.

 

मई 2010 में इलाहबाद हाई कोर्ट ने इन नेताओं के ऊपर आपराधिक साज़िश की धारा 120B हटा दी. बाकी धाराओं में मुकदमा अब भी रायबरेली की कोर्ट में चल रहा है.

 

सीबीआई को इस फैसले के खिलाफ कानूनन 90 दिनों में सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल करनी चाहिए थी. लेकिन सीबीआई ने लगभग 10 महीने का वक़्त लगा दिया.

 

आखिरकार, मार्च 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की अर्ज़ी पर सभी नेताओं को नोटिस जारी किया. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उस वक़्त ये भी साफ़ कर दिया कि इतनी देर से दाखिल हुई अपील पर सुनवाई की जायेगी भी या नहीं.

 

इस बीच बीते लगभग 4 साल में कुल 5-6 बार ही मामले की तारीख लगी है. सुप्रीम कोर्ट ने अभी भी ये तय नहीं किया है कि ये अपील सुनवाई लायक है या नहीं.

 

हालांकि, आज हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हाजी महबूब अहमद की तरफ से दायर अर्ज़ी पर भी सीबीआई और इस मामले के तमाम जीवित बचे आरोपियों को नोटिस जारी कर दिया है.

 

सीबीआई ने पूरे मसले पर जवाब देने के लिए 3 हफ्ते का समय माँगा है. मामले में आगे की सुनवाई 4 हफ्ते बाद होगी.

 

सुप्रीम कोर्ट को ये तय करना है कि देरी से दाखिल हुई अपील पर आगे सुनवाई हो या नहीं. साथ ही अदालत ये भी तय करेगी कि मुक़दमे के इस स्तर तक पहुँचने के बाद नए पक्ष को इसमें शामिल होने के इजाज़त दी जाए या नहीं.

 

ध्यान रहे कि इस मामले से जुड़े कई लोगों जैसे बाल ठाकरे, महंत अवैद्यनाथ, गिरिराज किशोर, परमहंस रामचंद्र दास आदि का अब निधन हो चुका है. उनका नाम कानूनन अब आरोपियों की लिस्ट से हटा दिया गया है.

 

ये अपील यूपीए के शासनकाल में दायर हुई थी. यह गौर करने वाली बात होगी कि एनडीए के शासनकाल में सीबीआई केस को किस तरह सामने रखती है?

अयोध्या विवाद: आडवाणी, उमा समेत 20 को नोटिस 

 

अयोध्या केस क्या है?

6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित बाबरी मस्जिद ढांचा गिराया गया था. विवादित ढांचा गिराने के आरोप में आडवाणी, उमा भारती, अशोक सिँघल बरी हुए थे. 2004 में आपराधिक साजिश के केस से इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरी किया था.

 

सीबीआई ने एक साल बाद बरी करने के आदेश को चुनौती दी थी. बाल ठाकरे का नाम उन 21 लोगों में शामिल था लेकिन अब उनका निधन हो चुका है.

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