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By: | Last Updated: Saturday, 28 February 2015 12:49 AM
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नई दिल्ली: बजट में बड़ा ज़ोर सरकारी खजाने की हालत दुरुस्त करने पर होगा. आर्थिक सर्वे में भी कहा गया है कि कंपनियों और सामान पर टैक्स के ज़रिये विकास के लिए पैसा जुटाना बड़ी चुनौती बनी हुई है. यानी बड़ी कोशिश होगी सब्सिडी में कटौती करने की. इसके लिए सब्सिडी सीधे आपके खाते में डालने का इस्तेमाल किया जाएगा. प्रधानमंत्री जन धन योजना में 12 करोड़ नए अकाउंट खोलने का हवाला दिया जाएगा.

 

गौरतलब है कि गैस की सब्सिडी सीधे आपके खाते में आना शुरू हो रही है. इसी तर्ज पर खाद की सब्सिडी भी किसानों के खातों में सीधे तौर पर देने के लिए सरकार रोड मैप दे सकती है. बैंक अकाउंट के साथ-साथ आधार कार्ड के साथ आपके मोबाइल नंबर की जानकारी का भी इस्तेमाल किया जा सकता है सब्सिडी का पैसा सीधा आप तक पहुंचाने के लिए.

 

एक बड़ी घोषणा ये हो सकती है कि जो लोग 30 फीसद इनकम टैक्स स्लैब में आते हैं, यानी जिनकी सालाना आमदनी 10 लाख से ज़्यादा है उनको रसोई गैस सब्सिडी देना बंद कर दिया जाए और उनतो सिलेंडर बाज़ार भाव पर ही मिले. सीधे सब्सिडी बैंक खाते में पहुँचने से सरकार का सब्सिडी का बोझ कम होगा. इसके अलावा, राज्यों के सहयोग से केंद्र सरकार कैरोसिन की नकद सब्सिडी का रोडमैप भी दे सकती है. इससे कालाबाज़ारी पर भी अंकुश लग सकेगा.

 

खाद्य सब्सिडी भी सीधे आपके खाते में पहुंचाने की पहल का एलान हो सकता है. यानी ग़रीब तक पैसा पहुंच भी जाएगा और सरकार का खर्च भी कम होगा और लोगों के पास पैसा आएगा तो वो खर्च करेंगे जिससे बाकी चीज़ों की मांग बढ़ेगी. ये बड़ा एलान हो सकता है इस बजट में.

 

टैक्स पर बजट में क्या होगा खास-

 

टैक्स में जो बड़ी राहत अरुण जेटली के बजट में मिल सकती है वो मिल सकती है उनको जो बचत करें. यानी तभी जब पैसा सेक्शन 80C के तहत निवेश करें. 

 

अभी इस के तहत बीमा, पीएफ वगैरह में डेढ लाख तक निवेश पर इनकम टैक्स नहीं लगता. यानी अगर डेढ लाख रुपये तक इंश्योरेंस प्रीमियम, पीएफ वगैरह में निवेश कर दें तो उस पैसे पर टैक्स नहीं लगता जो निवेश कर दिया. इसमें उनको ज्यादा फायदा होता है जो ज्यादा कमाते हैं.

 

क्योंकि 2.5 लाख से 5 लाख सालाना कमाने वालों का टैक्स बनता है 10 फीसदी. वो अगर पूरा डेढ लाख किसी तरह निवेश भी कर दें तब भी डेढ लाख पर 10 फीसद ही बचता है, यानी 15 हजार.  औऱ 5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये सालाना कमाने वाले जो 20 फीसद के इनकम टैक्स स्लैब में आते हैं वो 1.5 लाख रुपये निवेश करते हैं तो उनके 30 हजार रुपये बच जाते हैं.

 

इसी तरह साल में 10 लाख से ज्यादा कमाने वाले अगर 80C के तहत डेढ लाख रुपये इंश्योरेंस, पीएफ वगैरह में निवेश करते हैं तो उनके टैक्स के 45 हजार रुपये बच जाते हैं क्योंकि उनका टैक्स 30 फीसद पड़ता है.

 

इस डेढ लाख की लिमिट को जेटली बढ़ा कर दो लाख तक कर सकते हैं. यानी अभी जिनका 15 हजार टैक्स बचता है उनका 20 हजार बच सकेगा, जो 30 बचाते हैं वो 40 बचाएंगे, और जो 45 हजार बचा पाते हैं वो 60 हजार तक टैक्स बचा सकेंगे.

 

लेकिन फिर इनवेस्टमेंट भी तो दो लाख करना होगा. जो तीन-चार लाख साल में कमाता हो उसके लिए तो इसका खास मतलब नहीं क्योंकि 3-4 लाख में से 2 लाख निवेश कर देगा तो खाएगा क्या?

 

लेकिन टैक्स में राहत के नाम पर ये अरुण जेटली के बजट की बड़ी घोषणा हो सकती है. भले ही 15 हजार रुपये की एक्स्ट्रा टैक्स बचत साल में 10 लाख से ज्यादा कमाने वालों को ही मिलेगी लेकिन संदेश तो यही जाएगा कि 15 हजार रुपये की टैक्स बचत दे दी सरकार ने.

 

सरकार को ये फायदा होगा कि टैक्स में ये वाली बचत करने के लिए लोगों एलआईसी, पीपीएफ में पैसा डालेंगे जो असल में सरकार के ही तो काम आएगा. ये भी हो सकता है कि लिमिट बढ़ाने के साथ-साथ ये भी तय कर दिया जाए कि एक्स्ट्रा टैक्स छूट तभी मिलेगी जब निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड में हो. क्योंकि इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड का पैसा तो सड़क, पुल, बंदरगाह वगैरा बनाने के ही काम आता है तो जेटलीजी को वहां पैसा जुटाने में आसानी हो जाएगी.

 

लेकिन अगर 80C में निवेश करने की लिमिट डेढ लाख से दो लाख की जाती है तो आपका तो टैक्स बचेगा लेकिन सरकार को करीब 15 हजार करोड़ कम टैक्स मिलने का अनुमान है. 15 हजार करोड़ की भरपाई करना शायाद जेटली जी के लिए आसान न हो इसलिए हो सकता है कि उसमें तय हो कि 30 हजार या 50 हजार इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड में ही लगाने होंगे.

 

मैन्यूफैक्चरिंग पर रहेगा जोर-

 

वित्त मंत्री अरुण जेटली के पहले फुल बजट में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मेक इन इंडिया का बोलबाला रहेगा. देश में कंपनियां फैक्ट्रियां लगाएं इसके लिए टैक्स में प्रोत्साहन दिया जाएगा. मैन्युफैक्चर करने के लिए जो मशीने और पुर्जे विदेश से मंगाने पड़ते हैं उनपर कस्टम ड्यूटी कम की जाएगी.

 

लेकिन कई आइटम पर कस्टम ड्यूटी बढाई जायेगी जिससे उनको देश में बनाना सस्ता हो सके. रक्षा क्षेत्र की कंपनियों को भारत में मैन्यूफैक्चरिंग के लिए प्रोसाहित किया जाएगा. ज़ोर रहेगा रोज़गार बढाने वालो उद्योगों पर. यानी कोशिश रहेगी कि रोज़गार बढ़े, एक्सपोर्ट बढ़े, इंपोर्ट घटे, जिससे रुपया भी मज़बूत हो और सामान भी सस्ता हो.

 

इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सरकार का बुलेट बॉन्ड-

 

इंफ्रास्ट्रक्चर यानी सड़क, पुल, बंदरगाह वगैरह के लिए पैसे जुटाने के लिए सरकार बुलेट बॉन्ड लेकर आ सकती है. इस क्षेत्र में पैसे पर रिटर्न बहुत साल बाद मिलता है और बैंक से इन प्रॉजेक्ट के लिए पैसे लेना महंगा पड़ता है क्योंकि कई साल तक प्रॉजेक्ट से कमाई होती नहीं और बैंक को हर साल फिर भी ब्याज चुकाना पड़ता हैं.

 

इसलिए सरकार बुलेट बॉन्ड ले कर आ सकती है औऱ इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर फंड का भी ऐलान हो सकता है. बुलेट बॉन्ड की खासियत ये होती है कि आमतौर पर ये लंबी अवधि के लिए होते हैं 10, 15, 20 साल के लिए. और इन्हें बीच में नहीं भुनाया जा सकता है.

 

इन पर जो रीटर्न मिलता है वो प्रॉजेक्ट की कमाई जैसे सड़क पर मिलने वाले टोल आदि पर निर्भर करता है. इन्हें बुलेट बांड इसलिए कहा जाता है क्योंकि maturity के समय पर एकमुश्त बड़ी रकम मिलती है. यानी बीच के बरसों में कुछ नहीं मिलेगा, सीधा 10 या 15 या 20 साल बाद एक बड़ी रकम मिलेगी.

 

इंफ्रास्ट्रक्चर-

 

बड़ा ज़ोर रहेगा इंफ्रास्ट्रक्चर यानी बुनियादी ढांचे पर. इस बजट में बड़ा पैसा सड़क और हाईवे निर्माण के लिए रखा जा सकता है. 40 हज़ार करोड़ रुपये तक. मौजूदा साल यानी 2014-15 में सड़कों पर खर्च  26 हज़ार करोड़ रुपये रहने का अनुमान है. याद होगा आपको जनवरी में वित्त मंत्री ने पेट्रोल और डीजल पर 2 रुपये प्रति लीटर की एक्साइज ड्यूटी इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में निवेश के नाम पर बढाई थी.

 

इससे सरकार को लगभग 24 हज़ार करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है. इस रकम का बड़ा हिस्सा सड़क और हाईवे निर्माण के लिए दिया जा सकता है. हो सकता है पेट्रोल डीजल पर ड्यूटी का एक हिस्सा हाईवे बनाने के नाम पर ही निर्धारित कर दिया जाए.

 

कृषि में उत्पादकता बढ़ाना होगा लक्ष्य-

 

इस बार का बजट कृषि क्षेत्र के लिए बिलकुल अलग होगा. क्योंकि इस बार ज़ोर सब्सिडी पर नहीं होगा. सब्सिडी तो घटाई जाएगी सीधा किसानों के खातों में पैसा डालने का रोडमैप देकर. लेकिन इस बार कृषि में बड़ा पैसा लगाया जाएगा उत्पादकता बढ़ाने पर.

 

इसमें राज्यों का अहम रोल होगा. सिंचाई के लिए बड़ी योजना की घोषणा होगी. मिट्टी की टेस्टिंग के लिए प्रयोगशालाएं लगाई जाएंगी. कोल्ड स्टोरेज, गोदाम, मंडियों तक जाने वाली ग्रामीण सड़कें, इस बुनियादी ढांचे पर बड़ा खर्च किया जाएगा. गांवों में ज़्यादा पैसा जाएगा और किसानों की आमदनी बढेगी तो पूरी अर्थव्यवस्था को फायदा होगा.

 

होम लोन में क्या होगा खास?

 

होम लोन पर टैक्स छूट की बड़ी उम्मीद लगाए बैठे हैं लोग मोदी सरकार के पहले पूरे बजट से. 2022 तक सबका अपना घर हो ये सरकार का लक्ष्य भी है. अभी साल भर में होम लोन का दो लाख तक का ब्याज चुकाने पर वो ब्याज का पैसा आपकी कमाई में से घटा दिया जाता है.

 

मतलब उतने पैसे पर लगने वाला टैक्स बच जाता है. ये लिमिट अभी दो लाख है. अगर ये लिमिट बढ़ा कर ढाई लाख कर दी जाती है तो एक्स्ट्रा पचास हजार रुपये पर टैक्स बच जाएगा. इसमें भी जो ज्यादा कमाता है उसका ज्यादा टैक्स बचता है. क्योंकि 10 फीसद इनकम टैक्स देने वाले अगर साल में दो लाख होम लोन का ब्याज दें तो उनका 10 फीसद ही बचता है, यानी 20 हजार.

 

जो 20 फीसद स्लैब में आते हैं, उनका दो लाख पर 40 हजार बच जाता है और 30 फीसद स्लैब वालों का दो लाख पर 60 हजार टैक्स बच जाता है. अब अगर ये लिमिट बढ़ा कर ढाई लाख कर दी जाए तो 10 फीसद वालों की बचत 20 हजार से बढ़कर 25 हजार हो जाएगी, 20 फीसद वालों की 40 हजार से बढ़कर 50 हजार हो जाएगी. और 10 लाख सालाना से ज्यादा कमाने वाले 30 फीसद टैक्स देते हैं उनकी बचत अब दो लाख पर होती है 60 हजार, वो बढ़कर हो जाएगी 75 हजार.

 

यानी उनके हाथ में आएंगे 15 हजार रुपये एक्सट्रा सालभर में. वैसे भी ढाई लाख रुपये होम लोन का ब्याज देने वालों की कमाई साल में 10 लाख से ज्यादा ही होगी. क्योंकि कम कमाई वाले ऐसा भारी लोन ही क्यों लेंगे.

 

तो ये लिमिट दो लाख से बढ़कर ढाई लाख हो गई तो साल में 10 लाख से ज्यादा कमाने वालों को 15 हजार रुपये की एक्स्ट्रा बचत हो जाएगी. लेकिन इसके खिलाफ दलील ये है कि क्या साल में सिर्फ 15 हजार रुपये की बचत बढ़ जाएगी तो लोगों के लिए मकान लेना आसान हो जाएगा? या इससे  रीयल एस्टेट सेक्टर में जान आ जाएगी?

 

उसके लिए ये भी उम्मीद है कि इस सेक्टर के लिए फाइनेंसिंग के नियम सरल किए जा सकते हैं. यानी आपको होम लोन के टैक्स पर ब्याज में छूट मिल सकती है और बिल्डरों को भी अपने प्रॉजेक्ट के लिए आसान कर्ज़ मिलने का रास्ता सरकार खोल सकती है.

 

साथ ही बजट में अरुण जेटली घोषणा कर सकते हैं कि होम लोन पर टैक्स छूट लोन मिलने वाले साल से ही मिलना शुरू हो जाए, चाहे मकान का पोसेशन या कब्जा बाद में मिले. होम लोन पर टैक्स छूट से जुड़ी एक बड़ी समस्या है कि ये टैक्स घर का कब्ज़ा मिलने के बाद ही मिलना शुरू होती है. मिलती उन साल के लिए भी है जब आपने लोन लिया और मकान बन रहा था. लेकिन मिलना शुरू तभी होती है जब आप तीन साल के अंदर मकान पर कब्जा ले लें.

 

अब पिछले कुछ साल में जो हालात हैं कई मकानों का तो कंस्ट्रक्शन ही रुका पड़ा है. आप किराया भी दे रहे हैं, घर की ईएमआई भी चुका रहे हैं और टैक्स छूट भी नहीं मिल रही. तो इस बजट में अरुण जेटली घोषणा कर सकते हैं कि होम लोन पर टैक्स छूट लोन मिलने की तारीख से ही मिलना शुरू हो जाएगी. पोजेशन या कब्जा लेने का इंतज़ार नहीं करना होगा.

 

काला धन पर क्या होगा जेटली का स्टैंड-

 

काले धन को लेकर अपनी सक्रियता दिखाने के मकसद से मोदी सरकार बजट में घोषणा कर सकती है कि इनकम टैक्स कानून में बदलाव कर टैक्स की चोरी को जुर्म की श्रेणी में लाय़ा जाए.

 

50 लाख से ज़्यादा की कर चोरी वालों पर ये नियम लागू हो सकता है ताकि उनपर आपराधिक मुकदमा दर्ज हो सके. इसके अलावा सभी जांच एजेंसियों के लिए एक KYC यानी नो योर कस्टमर रजिस्टर बनाया जाएगा. क्योंकि अलग-अलग जगह पैन नंबर तो दिया ही जाता है. तो पैन नंबर के ज़रिये पता चलेगा कि एक जगह से इस व्यक्ति को यहां से पैसा मिला और उसने वहां लगाया, टैक्स दिया या नहीं? सारी जानकारी एक जगह आ जाएगी चाहे खरीद फरोख्त देश में कहीं भी हो.

 

सौर ऊर्जा से रोशन होगा घर-

 

बजट में लगभग 10 लाख घरों को रोशन करने की तैयारी कर रही है सरकार. इसके लिए सौर ऊर्जा से जुडी एक योजना की घोषणा की जा सकती है जिसके तहत ग्रामीण इलाकों में 300 से 400 रुपये की मासिक किश्त  देकर 100 वॉट का एक सोलर सिस्टम दिया जाएगा. इस सिस्टम की कीमत लगभग 20,000 रुपये है जिसमे सोलर पैनल, एक बैटरी, चार्जर, कंट्रोलर, 4 एलईडी बल्ब और 1 पंखा शामिल हैं.

 

पर्यटन पर होगा जोर-

 

प्रधानमंत्री मोदी का पर्यटन को बढ़ावा देने पर खास ज़ोर है तो वित्त मंत्री पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एलटीए की टैक्स छूट हर साल देने की घोषणा कर सकते हैं. अभी ये चार साल में दो बार मिलती है. और ये भी हो सकता है कि इसमें होटल का किराया भी शामिल कर लिया जाए.

 

मिल सकता है सस्ता कर्ज-

 

सस्ते कर्ज से कई वर्गों को अपने पांव पर खड़े होने की मदद करने पर इस बजट में खास कोशिश होगी. किसानों को बहुत कम ब्याज पर कर्ज, विद्यार्थियों को सस्ता कर्ज़, छोटे दुकानदारों और छोटा-मोटा कारोबार को सस्ता कर्ज़. इस सब पर खास ज़ोर रहेगा और इसमें जन धन योजना में खुले अकाउंट काम आएंगे.

 

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