‘टीबी-मिशन 2020’: हर तीन मिनट में दो जिन्दगी ले रही ये बीमारी

By: | Last Updated: Saturday, 1 November 2014 2:44 PM
aamir khan

नई दिल्ली : टीबी की जानलेवा बीमारी को जड़ से मिटाने की कसम खाई है हिंदुस्तान ने. देश के स्वास्थ्य मंत्री हर्ष वर्धन ने एलान किया है ‘टीबी – मिशन 2020’ का.

स्पेन के बार्सिलोना में विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO के ग्लोबल टीबी कॉन्फ्रेंस में हर्ष वर्धन ने टीबी के खिलाफ भारत के नए अभियान को पेश किया. हर्ष वर्धन ने कहा कि हम साल 2020 तक टीबी की बीमारी के खात्मे के रास्ते पर भारत को ले जाने के लिए वचनबद्ध हैं. मैं जल्दी में हूं. वैसे तो मैं इसके लिए एक दीर्घकालिक नजरिये के पक्ष में हूं, लेकिन कुछ ऐसे लक्ष्य को तय करने में मेरी कोई दिलचस्पी नहीं है, जिसे वर्ष 2035 या वर्ष 2050 में भी पाने को लेकर संशय है. मैंने टीबी निरोधक मिशन के अधिकारियों को ‘टीबी-मिशन 2020’ के तहत अगले पांच साल में अहम कामयाबी हासिल करने का निर्देश दिया है.

 

 

स्वास्थ्य मंत्री हर्ष वर्धन ने कहा कि हम पूरे टीबी प्रोग्राम को बहुत माइन्यूटी विश्लेषण कर रहे हैं – पांच साल में पूरा करने का निर्देश दिया है. WHO के कार्यक्रम में डॉ हर्ष वर्धन ने कहा कि भारत सभी टीबी मरीजों को मुफ्त इलाज पर विचार कर रहा है, चाहे वो सरकारी या निजी अस्पतालों में भर्ती क्यों ना हों. टीबी मरीजों को पोषक खाना मिले इसके लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं.

 

हर्ष वर्धन ने कहा कि 710 करोड़ रुपये भारत सरकार खर्च करती है. देश भर में उपलब्ध कराई जा रही है. भारत में हर तीन मिनट में टीबी से दो लोगों की जान जाती है. दिन में करीब हजार लोग टीबी से मरते हैं. साल भर में तीन लाख से भी ज्यादा जिंदगियां टीबी की वजह से खत्म हो रही हैं. यही वजह है कि टीबी को लेकर अंतर्राष्ट्रीय हेल्थ इमरजेंसी तक घोषित हो चुकी है.

 

सुई की हर तीन टिक-टिक के बाद दो जिंदगियां मौत में बदल रही हैं. देश परेशान है. दुनिया परेशान है. लेकिन मौत की सुई नहीं रुक रही. ट्यूबरक्यूलोसिस, जिसे हम और आप टीबी के नाम से जानते हैं. हर तीन मिनट में देश में दो जिंदगियां खत्म कर रहा है.

 

टीबी एक आम बीमारी है. इसे माइकोबैक्टीरिया के कीटाणु फैलाते हैं. ये सीधे फेफड़ों पर हमला करते हैं लेकिन इसका असर कहीं भी हो सकता है. सरवाइकल टीबी – ये गर्दन में होती है. हड्डियों की टीबी – ये रीढ़ की हड्डी में होती है . मेनिनजाइटिस टीबी – ये दिमाग में होती है. इन्टेस्टाइन टीबी – ये आंतों में होती है . जेनेटिक टीबी – ये एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी के व्यक्ति को होती है.

 

फेफड़ों की टीबी सबसे खतरनाक है. ये संक्रामक है. मरीज के सांस, थूक या बलगम के संपर्क में आने पर कीटाणु दूसरे शख्स के शरीर में घुस जाते हैं. टीबी का इलाज संभव है. चार तरह की टीबी होती है.

 

सामान्य टीबी, MDR टीबी , XDR टीबी, TDR टीबी, टीबी की 13 दवाएं मौजूद हैं और जब ये दवाएं बेअसर होने लगती हैं तो MDR, XDR, TDR टीबी होती है. ज्यादातर मौतें समय पर दवाएं ना लेना और बीच में ही इलाज छोड़ देने की वजह से भी होती हैं.

 

आप सुनकर हैरान रह जाएंगे कि देश में हर चौथे इंसान के शरीर में टीबी के कीटाणु मौजूद हैं. बस वो सो रहे हैं. अगर शरीर में बीमारियों से लड़ने की शक्ति कम हुई तो टीबी का बैक्टीरिया आपको शिकार बना लेगा.

 

देश में करीब तीस करोड़ लोगों में टीबी के कीटाणु मौजूद है लेकिन वो सक्रिय नहीं है. 40 लाख लोगों में फिलहाल टीबी का कीटाणु सक्रिय है. करीब एक लाख लोगों को MDR- TB है.

 

भारत में सालों से ऐसी मान्यता है कि टीबी का इलाज नहीं है ये लाइलाज है. शहरों में रहने वाले ज्यादातर लोग सोचते हैं कि उन्हें तो टीबी हो ही नहीं सकता. अगर खांसी ज्यादा दिन तक आए तो वो टीबी है. लेकिन सच ये है टीबी का इलाज भारत समेत पूरी दुनिया में मौजूद है. टीबी किसी को भी हो सकता है. अमीर को भी गरीब को भी. झुग्गी में रहने वाले को भी और बंगले में रहने वाले को भी. जरूरी नहीं है कि सिर्फ खून के साथ खांसी ही टीबी का लक्षण हो . वजन कम होना, पेट खराब होना भूख कम लगना, शरीर में थकान रहना. ये सब टीबी के भी लक्षण हो सकते हैं.

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