'आप' पर डॉ राकेश पारिख का ब्लॉग: 'इतना नीचे न गिरें कि टोपी की गरिमा को चोट पहूंचे

By: | Last Updated: Sunday, 22 March 2015 7:10 AM
AAP conflict: A blog by Dr Rakesh Parikh

आम आदमी पार्टी की पीएसी से योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण की विदाई के बाद पार्टी में मचे बवाल के बीच एक बड़े नेता ने पार्टी छोड़ी दी तो एक दूसरे बड़े नेता ने ब्लॉग लिखे. इस कड़ी में नया ब्लॉग आया है पार्टी के संस्थापक सदस्य और राजस्थान ईकाई के प्रवक्ता डॉक्टर राकेश पारिख का. राकेश पारिख ने अरविंद केजरीवाल पर बड़े हमले किए हैं.

 

पढ़ें राकेश पारिख का ब्लॉग.

 

एयर कंडिशन्स कमरों और गाडियों का आराम छोड़कर जंतर मंतर पर बिना गद्दे और तकिये के बिताये वो दिन सचमुच यादगार हैं. ये वो दिन थे जब नींद 16 घंटे की बजाय 70 घंटे काम करने के बाद आती थी और फिर साल 2012 के 2 अगस्त की वो शाम जब अन्ना जी ने राजनीतिक विकल्प देने की घोषणा कर दी. टीवी पर ख़बर देखते ही पत्नी का फोन आया. उसने कहा “तुरंत वापस आ जाओ. हमें बेवकूफ़ बनाया गया है. आंदोलन के नाम पर हमारी भावनाओं से खेलकर ये लोग राजनीति कर रहे हैं”. याद होगा आपको मैंने बताया था, उसने मुझे तलाक की धमकी तक दे डाली थी. अगली मुलाकात में आपने पूछा था “अब क्या कहती है भाभी जी?” अब तक तो मैं उसे समझाता रहा लेकिन आज क्या जवाब दूं?

 

मिशन बुनियाद जयपुर में हुआ. कार्यक्रम का आयोजन किया और सभी के आग्रह के बावजूद मैं जयपुर जिला कार्यकारिणी से बाहर रहा. एक अच्छे राजनीतिक विकल्प का बुनियादी ढांचा अपने जिले में बन जाए यही तक मैंने अपनी भूमिका सोची थी. उसके 2 महीनों बाद कौशांबी कार्यालय में हूंई वो मुलाकात भी याद भी होगी जब मनीष जी ने मुझसे कहा था “अच्छे लोग अपनी जिम्मेदारियों से भागते हैं, और फिर शिकायत करते है की राजनीति गंदी है. आपको ज़िम्मेदारी लेनी होगी डॉक्टर साहब”. कुछ दिनों बाद वो प्रदेश कार्यकारिणी बनाने जयपुर आये, मेरे घर रुके और फिर उन्हीं भावुक तर्कों के साथ मुझे राजस्थान सचिव की ज़िम्मेदारी सौंप दी. कौशांबी कार्यालय में हुई उसी मुलाकात में मैंने आप दोनों से कहा था “आज़ादी की लड़ाई का सिपाही हूं, गुलामी अपने सेनापति की भी नहीं करूँगा”. मेरे तेवर तो आपने उस दिन ही भाँप लिए होंगे. यदि जी हुजूरी करनी होती तो इतना संघर्ष ही क्यों करते? क्या हमें आज राजनीति में अपना भविष्य बनाने को आये, जी हुजूरी करने वाले लोगों की ही आवश्यकता रह गई? सवाल पूछने वालों की नहीं?

 

लोकसभा चुनाव हुए, राजस्थान में प्रत्याशियों की स्क्रीनिंग की ज़िम्मेदारी भी संभाली. 22 प्रत्याशी भी उतारे लेकिन ये तो आप भी जानते है कि मैंने खुद चुनाव लड़ने की इच्छा कभी नहीं रखी. कार्यकर्ताओं को हमेशा यही कहता रहा की हमारी ज़िम्मेदारी है समाज के अच्छे से अच्छे लोगोंं को ढूंढ कर राजनीति में लाना, उन्हें चुनाव लड़ने के लिए तैयार करना. यदि हम मान लें कि हम ही सबसे अच्छे हैं तो हमारी खोज ख़त्म हो जाएगी. राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठकों में भी मैंने ये प्रस्ताव कई बार रखा कि संगठन में जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को चुनाव नहीं लड़ना चाहिए और देखिए ये राजनीति हमें कहा ले आई? चुनाव लड़ने की, मंत्री बनने की इच्छा रखना सही है लेकिन सवाल पूछना गलत?

 

आज शांति भूषण जी जैसे वरिष्ठ सदस्य का खुले आम अपमान हो रहा है. 80 साल की उम्र में क्या पार्टी के उस साधारण सदस्य को अपनी राय रखने का अधिकार नहीं? संविधान की धारा VI A (a) iv में हमने लिखा है कि पार्टी के हर सदस्य को (जो जिम्मेदार पदों पर नहीं है) अपनी राय सार्वजनिक मंच पर रखने का अधिकार होगा. हमने एक ऐसी पार्टी बनायीं थी जिसमें किसी भी साधारण सदस्य को सोनिया गाँधी या नरेन्द्र मोदी के विचारों से असहमत होने का अधिकार हो. जिंदगी भर साफ राजनीति की उम्मीद लेकर बैठे उस बुजुर्ग को उम्र के आख़िरी पड़ाव में उम्मीद की एक किरण दिखाई दी थी. मैं जानता हूंं कि उनकी आँखों में आँखें डाल कर आप वो नहीं कह सकते जो ‘आप’ के प्रवक्ता टीवी पर कहते हैं. क्या हमारी पार्टी में अब भिन्न राय रखने वालों को गद्दार ही कहा जाएगा?

 

आपके पास 12 हजार लोगों के दस्तख़त लेकर आया था निवेदन करने की आप सुरक्षा लीजिये. आपने कहा था “इस आंदोलन का एक लक्ष्य यह भी है कि लोगों के मन से भय समाप्त हो, वो बोलने की हिम्मत जुटा सके” लेकिन वास्तविकता यह है कि आज सच कहने में ही भय लगता है. सोशल मीडिया पर बनी हूंई फ़ौज उस व्यक्ति को दोषी नहीं मानती जो पार्टी के अंदरूनी ईमेल एक साज़िश के तहत लीक करे या पार्टी के ही पुराने कार्यकर्ताओं के खिलाफ साज़िश कर झूठे SMS भेज उन्हें बदनाम करे. लेकिन ऐसे समय जब आप देश की राजनीति के बेताज बादशाह हो आपसे सवाल करने की हिम्मत जुटाए उसे गद्दार, देशद्रोही और जाने किन-किन नामों से नवाजती है. क्या हम वास्तव में एक भय मुक्त समाज बना रहे हैं?

 

मैं राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में आपसे ये सवाल बिना भय करता आया हूंं कि क्या ‘आप’ यानि सिर्फ अरविंद केजरीवाल है? क्या देश माने सिर्फ दिल्ली है?” आपके सामने यह सवाल रखने का साहस तो हमेशा था लेकिन आज यही सवाल पूछना तो देशद्रोह से भी बड़ा अपराध बन गया है. हमने पार्टी बनाईं तो नारा दिया था “आम आदमी जिंदाबाद”. हमने टोपी पर लिखा था “मुझे चाहिए स्वराज” और आज स्वराज की बात करने वालों को पार्टी विरोधी कहा जाता है. हमारी पार्टी की विचारधारा, जो आप ही की लिखी पुस्तक पर आधारित है, उसमें तो स्वराज एक बड़ा ही पावन शब्द था. मानता हूं कि स्वराज का अर्थ यह नहीं की मेरे जैसा एक साधारण कार्यकर्ता आपके बड़े निर्णयों में हस्तक्षेप करे. निर्णय आप करें, लेकिन हमें अपनी बात तो रखने दें, बैठक तो होने दें. या वह भी स्वराज के खिलाफ है? आपको शायद जानकारी न हो हमारे ही कार्यकर्ता स्वराज शब्द को उपयोग चुटकुलों में करते हैं, सवाल पूछने वालों की खिल्ली उड़ाने के लिए.

 

330 संस्थापक सदस्यों ने मिलकर पार्टी बनायीं. देश भर के 300 से अधिक जिलों में हमारी इकाईयां हैं. अपने घरों को फूंक कर हज़ारों कार्यकर्ता इस आंदोलन की लौ को देशभर में जीवित रख रहे हैं. उनकी पचासों समस्याएँ हैं, सवाल है. आज पार्टी बने 3 साल हो गए. स्थापना के बाद परिषद की केवल एक बैठक हूई वो भी एक दिन की. आज तक उन सदस्यों को कभी सुना नहीं गया. पिछली बैठक में आपने ये वादा किया था की अगली बैठक 3 दिनों की होगी. बहुत मिन्नतें की लेकिन फिर भी कोई उन्हें सुनना ही नहीं चाहता. 28 मार्च की बैठक में औपचारिकताये ये पूरी होगी, 31 मार्च को इन सभी की सदस्यता समाप्त होगी और फिर उम्मीद है कि सवाल पूछने वाले उस परिषद के सदस्य नहीं होंगे. जानता हूं कि आपको आलोचना पसंद नहीं लेकिन मुझे चापलूसी पसंद नहीं. आपकी तारीफ करने वाले तो करोड़ों हैं, सौ दो सौ तो सवाल पूछने वाले भी हों?

 

आप समेत राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सभी सदस्यों को मेल लिखकर निवेदन किया था कि परिषद की बैठक कम से कम 2-3 दिनों की रखिये. हमारी समस्याएं सुनिए. और उसी मेल में मैंने सभी परिषद सदस्यों से भी निवेदन किया था कि आधिकारिक बैठक न सही, हम अनौपचारिक बैठक करें. क्या यह भी देशद्रोह है? हमारी सोशल मीडिया टीम की समझ के अनुसार तो है. राष्ट्रीय परिषद की बैठक की मांग को लेकर 45 सदस्यों के पत्र जो आपको भेजे थे क्या वो कोई षड्यंत्र था? बैठक से पहले अनौपचारिक ही सही सभी सदस्य चर्चा कर पायें इस उद्देश्य से आप ही को भेजा हुआ मेल क्या कोई साज़िश हो सकती है? परिषद के सदस्य यदि अपने विचार एक दूसरे के साथ साझा करते हैं और अपने मुद्दों को परिषद की बैठक में उठाते हैं तो क्या हो जायेगा? किस बात का भय है? और किसे? क्यों हम चर्चा से इतने भागने लगे? परिषद में शायद ही कोई सदस्य हो जो आपके नेतृत्व पर सवाल उठाये. लेकिन आप के नाम का उपयोग कर इस राजनीतिक आंदोलन को दूषित करने वालों को निश्चित भय होना चाहिए. परिषद के सदस्य उनसे खफा ज़रूर हैं. और इस बैठक को नाम दिया गया केजरीवाल के खिलाफ साज़िश.

 

खैर ये विश्वास है कि आप के नेतृत्व में यह पार्टी देश की राजनीति में एक बहुत बड़ा बदलाव लाएगी. हो सकता है आंदोलनकारियों की अब आवश्यकता न हो. और यह भी विश्वास है कि आपके रहते कोई ग़लत आदमी इस पार्टी में आ तो सकता है लेकिन गलत काम आप उसे करने नहीं देंगे. लेकिन अरविंद जी व्यक्तिकेंद्रित बदलाव दीर्घकालीन नहीं हो सकता. किसी प्रभावशाली नेता द्वारा बनाई व्यवस्था केवल तब तक टिक पाती है जब तक वह व्यक्ति खुद सत्ता में हो.

 

अंत में ‘आप’ की सोशल मीडिया फौज से हाथ जोड़कर निवेदन-राजनीति में भविष्य बनाने के लिए आये लोग सवाल नहीं पूछते. दिल्ली में इतनी बड़ी जीत मिलने के बाद सवाल पूछने का साहस कोई समझदार नेता नहीं कर सकता. ये हिम्मत तो वही कर सकते है जिन्हें अपने नहीं इस वैकल्पिक राजनीति के सपने की फ़िक्र हो. हमने आंदोलन में अपनी भूमिका ऐसे ही निभाई. हमें न टिकट चाहिए, न पद, न कोई सम्मान. बस एक निवेदन है इस टोपी की लाज रखें. सवाल पूछने वालों को अपमानित करने के लिए इतना नीचे न गिरें कि इस टोपी की गरिमा को चोट पहूंचे. जानें कितने परिवार स्वाहा हुए इस टोपी को बनाने में.

 

(अपने विचार निश्चित तौर पार्टी के अंदरुनी मंच यानि राष्ट्रीय परिषद में ही रखता. लेकिन दुर्भाग्य से उस मंच पर बोलने का मौका न पिछले 3 साल में मिला न आगे मिलने के आसार दिख रहे हैं.)

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: AAP conflict: A blog by Dr Rakesh Parikh
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
First Published:

Related Stories

JDU राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक आज, शरद यादव पर बड़ा फैसला ले सकते हैं नीतीश
JDU राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक आज, शरद यादव पर बड़ा फैसला ले सकते हैं नीतीश

पटना: बिहार की राजनीति में आज का दिन बेहद अहम माना जा रहा है. आज पटना में (जनता दल यूनाइटेड) जेडीयू...

बिहार: सृजन घोटाले में बड़ा खुलासा, सामाजिक कार्यकर्ता का दावा- ‘नीतीश को सब पता था’
बिहार: सृजन घोटाले में बड़ा खुलासा, सामाजिक कार्यकर्ता का दावा- ‘नीतीश को सब...

पटना:  बिहार में सबसे बड़ा घोटाला करने वाले सृजन एनजीओ में मोटा पैसा गैरकानूनी तरीके से सरकारी...

यूपी: वाराणसी में लगे PM मोदी के लापता होने के पोस्टर, देर रात पुलिस ने हटवाए
यूपी: वाराणसी में लगे PM मोदी के लापता होने के पोस्टर, देर रात पुलिस ने हटवाए

वाराणसी: उत्तर प्रदेश में वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है. यहां पर कुछ...

एबीपी न्यूज़ की खबर का असर, गायों की मौत के मामले में बीजेपी नेता गिरफ्तार!
एबीपी न्यूज़ की खबर का असर, गायों की मौत के मामले में बीजेपी नेता गिरफ्तार!

रायपुर: एबीपी न्यूज की खबर का असर हुआ है. छत्तीसगढ़ में गोशाला चलाने वाले बीजेपी नेता हरीश...

जानिए क्या है फिजिक्स के प्रोफेसर की बाइक में बम का सच
जानिए क्या है फिजिक्स के प्रोफेसर की बाइक में बम का सच

नई दिल्लीः आजकल सोशल मीडिया पर एक टीचर की वायरल तस्वीर के जरिए दावा किया जा रहा है कि वो अपनी...

19 अगस्त को गोरखपुर में होंगे राहुल गांधी, खुद के लिए नहीं लेंगे एंबुलेंस और पुलिस
19 अगस्त को गोरखपुर में होंगे राहुल गांधी, खुद के लिए नहीं लेंगे एंबुलेंस और...

लखनऊ: कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी 19 अगस्त को यूपी के गोरखपुर जिले के दौरे पर रहेंगे. राहुल...

नेपाल से बातचीत के जरिए ही निकल सकता है बाढ़ का स्थायी समाधान: सीएम योगी
नेपाल से बातचीत के जरिए ही निकल सकता है बाढ़ का स्थायी समाधान: सीएम योगी

सिद्धार्थनगर/बलरामपुर/गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को...

पीएम मोदी ने की नेपाल के प्रधानमंत्री से बात, बाढ़ से निपटने में मदद की पेशकश की
पीएम मोदी ने की नेपाल के प्रधानमंत्री से बात, बाढ़ से निपटने में मदद की पेशकश...

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को नेपाल के अपने समकक्ष शेर बहादुर देउबा से...

एबीपी न्यूज पर दिनभर की बड़ी खबरें
एबीपी न्यूज पर दिनभर की बड़ी खबरें

1. डोकलाम विवाद के बीच पीएम नरेंद्र मोदी का चीन जाना तय हो गया है. ब्रिक्स देशों के सम्मेलन के लिए...

सरकार के रवैये से नाराज यूपी के शिक्षामित्रों ने फिर शुरू किया आंदोलन
सरकार के रवैये से नाराज यूपी के शिक्षामित्रों ने फिर शुरू किया आंदोलन

मथुरा: यूपी के शिक्षामित्र फिर से आंदोलन के रास्ते पर चल पड़े हैं. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद...

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017