विश्वास ने की 'आर्थिक आधार' पर आरक्षण की पैरवी, 'आप' ने किया किनारा

By: | Last Updated: Monday, 25 January 2016 1:29 PM
AAP’s Kumar Viswas on Reservation

नई दिल्ली : आरक्षण विवाद पर अब आम आदमी पार्टी(आप) के प्रवक्ता कुमार विश्वास का बड़ा बयान आया है. कुमार विश्वास ने कहा है कि जाति नहीं आर्थिक आधार पर आरक्षण दिया जाए. आरक्षण पर ये बड़ा बयान आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास ने अहमदाबाद में दिया है.

आईआईएम के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए विश्वास अहमदाबाद पहुंचे थे. आरक्षण पर कुमार विश्वास का ये बयान नया विवाद खड़ा कर सकता है. इससे पहले लोकसभा स्पीकर समित्रा महाजन ने अहमदाबाद में ही कहा था कि जातिगत आरक्षण के लिए नेता दोषी हैं.

लेकिन कुमार विश्वास के बयान से अरविंद केजरीवाल सरकार में मंत्री गोपाल राय ने किनारा कर लिया है. गोपाल राय ने कहा, “कुमार विश्वास ने क्या कहा है, हम जानते हैं, लेकिन हमारा मत है कि मौजूदा सामाजिक व्यवस्था बनी रहनी चाहिए.”

गौरतलब है कि सुमित्रा महाजन के आरक्षण संबंधित बयान को लेकर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने आरक्षण की समीक्षा की वकालत की थी.

भागवत ने कहा था कि आरक्षण को हमेशा राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया गया. आरएसएस के मुखपत्र ऑर्गनाइजर में मोहन भागवत ने कहा था, “आरक्षण को हमेशा राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया गया है. लोग अपनी सुविधा के मुताबिक अपने समुदाय या वर्ग का ग्रुप बनाते हैं और आरक्षण की मांग करने लगते हैं. लोकतंत्र में कई नेता उनका समर्थन भी करते हैं. एक गैर राजनीतिक समिति का गठन होना चाहिए जो समीक्षा करे कि किसे आरक्षण की ज़रूरत है और कब तक?”

तब केंद्र सरकार भागवत के बयान को लेकर बैकफुट आ गई थी और सरकार ने तब ही कह दिया था कि वो आरक्षण में किसी भी तरह की समीक्षा नहीं करने जा रही है.

आरक्षण का आधार क्या है?

भारतीय संविधान में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया है. इसी को ध्यान में रखते हुए संविधान निर्माता भीमराव आंबेडकर ने संविधान में अनुसूचित जाति के लिए 15 फीसदी और अनुसूचित जनजाति के लिए 7.5 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था की थी. बाद में 90 के दशक में मंडल कमीशन की सिफारिशों के आधार पर अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी के लिए 27 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था की गई थी. यानी मौजूदा समय में साढ़े 49 फीसदी आरक्षण लागू है.

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि देश में 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण की व्यवस्था नहीं हो सकती है, लेकिन विशेष परिस्थिति में कुछ राज्यों में आरक्षण की कुल सीमा 50 फीसदी से ज्यादा है. तमिलनाडु में 69 फीसदी तक आरक्षण है. उत्तर पूर्वी राज्यों में भी आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से ज्यादा है.

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Web Title: AAP’s Kumar Viswas on Reservation
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