ABP एक्सक्लूसिव: AAP के 2 करोड़ के चंदे पर बड़ा खुलासा, चेक वाले तक पहुंचा ABP न्यूज़

By: | Last Updated: Tuesday, 2 June 2015 1:13 AM
ABP Exclusive On AAP 200 crore donation

नई दिल्ली: चार महीने पहले आम आदमी पार्टी को मिले दो करोड़ रुपये के चंदे पर हुआ है बड़ा खुलासा. चंदा देने वाली चार कंपनियों से नाता रखने वाले निदेशक मुकेश कुमार ने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को दिए बयान में कहा है कि वो दलाली का धंधा करता है और उसे नहीं पता कि ये दो करोड़ कहां से आए थे.

मुकेश कुमार को ये भी नहीं पता कि पैसा किसने दिया और क्यों दिया. पैसों की लेनदेन की पड़ताल से पहले आपको बता दें कि इनकम टैक्स को पूछताछ में मुकेश ने आम आदमी पार्टी के खजांची संजू से अपनी पहचान बताई है. मुकेश कुमार वही शख्स है जिसके दस्तखत चेकों पर हुए थे.

 

पेश है एबीपी न्यूज संवाददाता ओम प्रकाश तिवारी की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट.

 

मुकेश कुमार

पता- डी-112, गली नंबर-4, गंगा विहार, गोकुलपुरी, दिल्ली

भारत सरकार के पहचान पत्र पासपोर्ट पर छपी तस्वीर मुकेश कुमार की है और दस्तखत भी मुकेश कुमार के ही हैं. पचास लाख के चेक पर दस्तखत मुकेश कुमार ने ही किए हैं.

 

खास बात ये है कि ऐसे ही चेक के जरिये आम आदमी पार्टी को पचास लाख का चंदा मिला जिसका खुलासा आम आदमी पार्टी के ही पुराने साथियों की अवाम संस्था ने इसी साल दिल्ली चुनाव से ठीक पहले किया था.

 

यही वो मुकेश कुमार है जो गोल्डमाइन बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड और इन्फोलांस सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस लिमिटेड में निदेशक है. आरोप है कि इन्हीं दो कंपनियों ने पचास-पचास लाख रुपये के चंदे का चेक दिया है और इनकम टैक्स से पूछताछ में खुलासा हुआ है कि इसके अलावा जिन दो कंपनियों स्काइलाइन मेटल एंड एलॉइज प्राइवेट लिमिटेड और सनविजन एजेंसी प्राइवेट लिमिटेड से मुकेश के संबंध हैं उसने भी 50-50 लाख का चंदा दिया था.

 

आपको यह जानकर हैरत होगी कि मुकेश कुमार नाम का यह शख्स मात्र नौवीं कक्षा तक पढ़ा है. इसी साल फरवरी महीने में आयकर विभाग के नोटिस के बाद मुकेश को गायब बताया गया था लेकिन अप्रैल 2015 में जब मुकेश ने आयकर विभाग के सामने पेश होकर अपने बयान दर्ज कराए तो एक बार तो आयकर विभाग के अधिकारियों के भी होश उड गए.

 

एबीपी न्यूज के पास इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के वो दस्तावेज मौजूद हैं जिनसे मुकेश के कारनामों का काला चिट्ठा खुलता है. इन दस्तावेजों में दर्ज है कि मुकेश ने दो चेक पर दस्तखत किए. इस जानकारी के बिना कि उस चेक पर कितना अमाउंट भरा जाना है और किसको दिया जाना है.

 

पूछताछ में मुकेश ने कबूला है, “सिर्फ चेक पर मेरे द्वारा हस्ताक्षर किए गए थे जो कि श्री दीपक अग्रवाल को मेरे द्वारा हस्ताक्षरित चेकों का हिस्सा थे जो मैंने उनको ब्लैंक सिग्नेचर करके दिए थे. उन्होंने या उनके किसी नुमाइंदे ने संबंधित पे ऑर्डर बनाने के लिए बैंक को अवैध आवेदन पत्र के साथ दिए होंगे.”

 

आयकर विभाग ने जब दीपक अग्रवाल को खोजा तो उसने एफिडेविट देकर कहा है कि उससे पूछे बिना कंपनी में निदेशक बना दिया गया था और उसका इन कंपनियों से कोई लेना देना नहीं है.

 

चेक का क्या था चक्कर?

 

मुकेश ने पूछताछ में कबूला है कि उसे ये भी पता नहीं था कि ये चंदा आम आदमी पार्टी को दिया जा रहा है. चंदे के लिए आप की तरफ से न तो कोई अपील आई थी न ही किसी ने संपर्क किया था और न ही कंपनी एक्ट के मुताबिक उसकी कंपनी ने ऐसा कोई प्रस्ताव पास किया था.
 

केजरीवाल की आप पार्टी को चंदा देने वाली कंपनी के निदेशक ने कहा कि वो खुद दलाली कमीशन का काम करता है और उसे अपनी दलाली के 0.2 फीसदी से 0.3 प्रतिशत से मतलब होता है पैसा कहां से आया कहां जाता है. कौन देता है किसे दिया जाता है उसे नहीं पता.

 

मुकेश कुमार से कुछ सवाल-जवाब

 

सवाल- मेसर्स गोल्डमाइन बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स इन्फोलांस सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस लिमिटेड, सनविजन एजेंसीज प्राइवेट लिमिटेड, स्काइलाइन मेटल अलॉयज प्राइवेट लिमिटेड में जो एंट्री ली गई हैं और जो पैसा आया और इनसे जिन व्यक्तियों को पैसा दिया गया है उसके बारे में आपका क्या कहना है?

 

जवाब – मुझे इसके बारे में कुछ नहीं पता.. ना मुझे एंट्री लेने के बारे में पता है और ना मेरे पास किसी का कोई जवाब है. मुझे तो बस अपने 0.2% से 0.3% कमीशन से मतलब है.

 

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के दस्तावेजों में दर्ज है कि मुकेश कुमार की कंपनी ने आप के अलावा कांग्रेस को भी चंदा दिया था लेकिन जब मुकेश कुमार से पूछा गया कि वो कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के किस-किस व्यक्ति से परिचित है तो मुकेश ने बताया, “मैं आप के ट्रेजरार संजू को डोनेशन के बाद मतलब फरवरी से 2015 से जानता हूं.”

 

आम आदमी पार्टी का ट्रेजरार हैं संजू

 

अब जरा आम आदमी पार्टी के इन दस्तावेजो को भी ध्यान से देख लीजिए जिसमें पार्टी के नेशनल ट्रेजरार कृष्ण कांत सेवदा का उपनाम संजू बताया गया है और पार्टी दस्तावेजों के मुताबिक वो पार्टी के लिए फाइनेंशियल एडमिनिस्ट्रेशन का काम देखते हैं यानि पार्टी के पास कितना पैसा आया, कहां से आया, कैसे आय़ा- सारी जानकारी संजू जी यानी कृष्णकंत सेवदा के पास रहती है.

 

अवाम के करन सिंह का कहना है कि ये शैल कंपनियां हैं सेवदा जी मुख्य तौर पर मॉनिटरिंग का काम देखते हैं वो 50 लाख देने वाले को क्यो नहीं जानेंगे?

 

क्या संजू जी और मुकेश एक दूसरे को जानते हैं?

 

26 मई को एबीपी न्यूज़ के रिपोर्टर ओपी तिवारी ने की संजूजी से फोन पर बात हुई थी. 27 मई को उन्होंने वैशाली में मिलने को कहा. 27 मई को ओपी तिवारी ने उन्हें दो बार मैसेज किया कि कहां मिलना है. दूसरा मैसेज किया कि वे आपके जवाब का इंतजार कर रहे हैं. पौन घंटे बाद संजूजी ने मैसेज पर जवाब भेजा कि समय की कमी की वजह से मैं आपसे नहीं मिल सकता. मैं अगले हफ्ते दिल्ली आऊंगा. परेशानी के लिए खेद है.

 

इसके बाद एबीपी न्यूज़ के रिपार्टर ने आम आदमी पार्टी को ईमेल के जरिये उनसे सवाल पूछा था कि मुकेश ने अपने बयानों में कहा है कि वो संजूजी को जानता है. क्या संजू जी मुकेश को जानते हैं. लेकिन इस सवाल का जवाब आम आदमी पार्टी के जवाब में नहीं है.

 

एबीपी न्यूज के सवालों पर आप ने जो जवाब दिया वो आपको बताएंगे लेकिन पहले देख लीजिए हमने क्या सवाल पूछे थे.

 

1. क्या सरकार ने इस बारे में कोई जांच कराई है.अगर हां तो जांच में अब तक क्या पता लगा है?

 

2. क्या आम आदमी पार्टी ने अपने आंतरिक लोकपाल से इन कंपनियों और चंदे के बारे में कोई जांच कराई थी?

 

3. चारों कंपनियों से संबंध रखने वाले निदेशक मुकेश कुमार का आयकर विभाग के सामने बयान है कि वो दलाली का काम करता है और ब्लैक को व्हाइट करने का काम करता है. उसका ये भी बयान है कि आम आदमी पार्टी के ट्रेजरार संजूजी को जानता है.. क्या संजूजी भी मुकेश को जानते हैं? अगर हां तो किस तरह से जानते हैं?

 

इन सवालों पर आम आदमी पार्टी ने जवाब भेजा है

 

देर से जवाब देने के लिए में माफी चाहता हूं.

 

सर,

हमने मांग की थी कि आप समेत सभी पार्टियो की फंडिग की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो. ये इस केस पर भी लागू होता है. इसके लिए हमने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई है. अगर सच को सामने लाना है तो कई सरकारी एजेंसियों, प्राइवेट एजेंसियों, सरकारी और प्राइवेट बैंकों और सरकारी विभागों की जांच करनी होगी. इसके लिए Directorate of Revenue Intelligence, Enforcement Directorate, Income Tax Department जैसे विभागों के विशेषज्ञों की मदद लेनी होगी. सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में इन एजेंसियों की मदद से एक तय सीमा के भीतर जांच से ही मामलों की गहराई तक पहुंचा जा सकता है. हम इस मुद्दे पर पहले ही काम शुरू कर चुके हैं. 

 

हम ये साफ कर दें कि इस केस के समेत सभी राजनीतिक चंदे के मामले में हमारी पार्टी ने अभी तक सभी नियमों का पालन किया है और किसी भी नियम को नहीं तोड़ा है. जहां दूसरी पार्टियां अपने 80 प्रतिशत से ज्यादा फंडिग का ब्योरा नहीं देती, आम आदमी पार्टी ने ऊंचे मानक बनाए हैं और पारदर्शिता में एक नई शुरूआत की कोशिश की है. 

 

हमने सरकारी एजेंसियों के सभी सवालों के जवाब दिए हैं. किसी भी एजेंसी का कोई भी ऐसा सवाल नहीं है जिसका हमने जवाब नहीं दिया हो. पार्टी या पार्टी के पद पर बैठे किसी पर भी किसी भी सरकारी एजेंसी ने उंगली नहीं उठाई है.

 

जो नोट आपने हमें भेजा है उसमें हमारे किसी अधिकारी पर लगे किसी चार्ज या कानून तोड़ने के बारे में कोई जानकारी नहीं है. लगाए गए आरोपों के कोई सबूत नहीं हैं. ये सारे आरोप बेबुनियाद हैं. अगर आपके पास कोई ठोस सबूत या तथ्य हों, तो हमें बताएं, हम फिर आपके सवालों का जवाब देंगे.

 

चौंकाने वाली सच्चाई

आम आदमी पार्टी को दो करोड़ का चंदा देने वाली चार कंपनियों से संबंध रखने वाले मुकेश कुमार ने इनकम टैक्स के सामने खुलासा किया है कि जिन कंपनियों के जरिये आम आदमी पार्टी को चंदा दिया गया है उनके निदेशक आठ से दस हजार रुपये कमाने वाले लोग हैं.

 

हैरान करने वाली बात ये है कि आयकर विभाग को मुकेश ने अपनी आमदनी मिट्टी ढोकर दिखाई है. मुकेश ने भी माना है कि उसे पता है कि ये धंधा गैरकानूनी है. इन खुलासों के दस्तावेज एबीपी न्यूज के पास मौजूद हैं.

 

आयकर विभाग की शुरुआती जांच के दौरान मुकेश कुमार ने खुद को बिग शॉट बताया और कहा कि वो कंपनी खरीदने-बेचने और प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करता है. उसकी छह कंपनियों के नाम पर 50-50 लाख के फिक्स्ड डिपॉजिट हैं जिनके आधार पर वो बैंकों से ओवर ड्राफ्ट लेकर बिजनेस करता है और राजस्थान में भी जमीनें हैं जिनसे पैसा आता है. आयकर विभाग के सूत्रों के मुताबिक मुकेश कुमार चाहता था कि आयकर विभाग खाता ना बही मुकेश कुमार जो बोले वो सही पर विश्वास कर ले लेकिन पूछताछ के दूसरे चरण में जब आयकर विभाग ने जांच के फंदे कसने शुरू किए तो मुकेश कुमार की पोल खुलनी शुरू हो गई.

 

आयकर विभाग को जांच के दौरान पता चला कि मुकेश कुमार की कंपनी गोल्डमाइन बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड में लोगों ने करोडों रुपये के शेयर खरीदे थे. इनमें ये नाम हैं-

 

अमर माला दास – एक करोड दो लाख रुपये

जितेंद्र कुमार कश्यप- 51 लाख

हेम प्रकाश  – 51 लाख

पवन कुमार– 51 लाख

संजय कश्यप– 51 लाख

दीपक अग्रवाल – 51 लाख

 

जांच के दौरान जब इन लोगों के बारे में दस्तावेजों के आधार पर पूछताछ की गई तो सनसनीखेज खुलासा हुआ.

 

आयकर विभाग के दस्तावेजो के मुताबिक मुकेश कुमार की कंपनी में दस रूपये के शेयर पर पांच सौ रूपये प्रीमियम की दर से छह लोगों ने तीन करोड 53 लाख रूपये के शेयर खरीदे थे. जांच के दौरान पता चला कि ये छह लोग मुकेश कुमार के नौकर थे जिन्हें वो आठ से दस हजार रूपये वेतन देने का दावा करता था.

 

एबीपी न्यूज संवाददाता ओम प्रकाश तिवारी ने जब मुकेश के घरवालों से उनकी माली हालत जाननी चाही तो जानिए क्या खुलासा हुआ.

 

मुकेश के भतीजा का कहना है कि अगर उनके पास इतने पैसे होते तो क्या वे यहां रहते.

 

आयकर विभाग के दस्तावेज के मुताबिक मुकेश ने कबूला है कि उसके पास इन पैसों का कोई हिसाब-किताब नहीं है और उसे यह पता है कि ये धंधा गैरकानूनी है और धंधे की आय भी गैरकानूनी है इसलिए वो दो से तीन प्रतिशत मिलने वाले धन को मिट्टी ढोने के काम से दिखाता है. आयकर विभाग से पूछताछ में तो मुकेश ने खुद को सड़कछाप इंसान बताया है जिस पर करोड़ों का कर्ज है.

 

मुकेश ने कहा, “मैं तो केवल कंपनी खरीदने-बेचने का काम करता हूं. मेरे पास अपना कुछ नहीं है. जो मेरी कंपनियां खरीदते-बेचते हैं. सारा हिसाब-किताब वही रखते हैं. मैं एक सड़कछाप आदमी हूं. मुझ पर 3-4 करोड़ की कर्जदारी है.”

 

तो क्या ये पैसा कैसा था जो एंट्री के जरिये आम आदमी पार्टी को मिला.. सवाल इसलिए क्योंकि आयकर विभाग का मानना है कि कंपनी के निदेशक यानी मुकेश को कंपनी में निवेश करने वालों का पता नहीं है और न ही इस चंदा मामले में कंपनी एक्ट का पालन हुआ है. आयकर विभाग इस मामले में पर्दे के पीछे से चाल चल रहे मास्टरमाइंड की तलाश कर रहा है. जांच के दौरान पता चला है कि मुकेश की कंपनी ने कांग्रेस पार्टी को भी दस लाख रूपये का चंदा दिया था.

 

अब तक की जांच से आयकर विभाग को लग रहा है कि केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को दो करोड रूपये का जो चंदा मिला उस पैसे का असली मालिक मुकेश कुमार नहीं है. आयकर विभाग का मानना है कि चंदे के इन चेकों की हकीकत कुछ औऱ ही है और यही बात इस मामले को उजागर करने वाले भी कह रहे है.

 

‘जब केजरीवाल मुंह दिखाने के लायक नहीं रह जाएंगे’

 

अवाम के गोपाल गोयल का कहना है कि चारों चेक की असलियत सामने आय़ेगी तो अऱविंद को मुंह दिखाने की जगह नहीं मिलेगी.

 

आयकर विभाग के इस दस्तावेज को देखिए जिसमें साफ तौर पर लिखा गया है कि मुकेश कुमार ने ये सारा पैसा देने में केवल एन्ट्री आपरेटर का काम किया और अपना 0.2 फीसदी से 0.3 फीसदी कमीशन ले लिया यानि पैसा मुकेश की कंपनी का नहीं था.

 

मास्टरमांइड की तलाश

 

आयकर विभाग का मानना है कि चंदे की इस शतरंजी चाल में मुकेश कुमार एक मोहरा है और इस शतरंजी चाल में पर्दे के पीछे से चाल चलने वाले वजीर औऱ राजा कोई औऱ ही है आय़कर विभाग इस केस के मास्टरमांइड की तलाश कर रहा है.

 

आयकर विभाग ने जब मुकेश से इस बारे में पूछा कि आम आदमी पार्टी को 2 करोड़ रुपये दिया गया. उसके लिए आपने किसके कहने पर चेक दिया और ड्राफ्ट बनवाए. यह एक राजनीतिक चंदा है. क्या आपने इसकी घोषणा कंपनीबुक में दिखाई है?

 

मुकेश ने कहा, “मुझे नहीं पता कि मैंने किस आदमी के कहने पर आप को चंदा दिया.. मैंने चंदे के चेक दीपक अग्रवाल एडवोकेट दिए थे. मुझे नहीं पता था ये चंदा आप को जाएगा.”

 

आयकर विभाग के सूत्रों के मुताबिक इस मामले की शुरुआत से ही यह लगने लगा था कि इस की जांच को भटकाने के लिए भी पूरा काम किया गया है क्योंकि मुकेश कुमार की कंपनियों की जांच के दौरान पता चला है कि दस लाख रूपये एक और राजनैतिक पार्टी को दिए गए.

 

आयकर विभाग के दस्तावेजों के मुताबिक मुकेश कुमार की कंपनी के जरिए आप पार्टी के अलावा कांग्रेस पार्टी को भी दस लाख रूपये का चंदा गया था लेकिन मुकेश कुमार के मुताबिक ऐसा कोई चंदा उसने नहीं दिया था.

 

30 पन्नों के बयान में मुकेश से सत्तर से ज्यादा सवाल पूछे गए जिसमें मुकेश ने साफ कर दिया कि वह तो केवल कंपनी खरीदने बेचने का धंधा करता है.  उसके पास अपना कुछ नहीं है. इन कंपनियों से जो एन्ट्री ली गई या दी गई उऩमें उनका कोई रोल नहीं.

 

मुकेश ने कहा, “मैंने पिछले एक डेढ साल से कोई काम नहीं किया है. जो 24 कंपनियां बताई हैं वो दलाली कमाने के लिए हैं. उन कंपनियों में कोई धंधा नहीं है. उनकी कोई आय़ नहीं है. उनके निदेशक मैंने अपने स्टाफ औऱ रिश्तेदारो को बनाया है. जिनकी कोई जायदाद नहीं है.”

 

अभी तक की जांच से जो सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है कि आम आदमी पार्टी को जो दो करोड़ चंदे की रकम आई वो आखिर दी किसने. आयकर विभाग मुकेश के बयानों के जरिये टूटी हुई कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रहा है.

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