ABP न्यूज का खुलासा, रेड क्रिसेंट के पास अगवा भारतीयों के बारे में कोई जानकारी नहीं

By: | Last Updated: Saturday, 29 November 2014 2:47 AM
ABP NEWS BIG REVEAL ON SUSHMA SWARAJ

नई दिल्ली: एबीपी न्यूज़ के खुलासे के बाद कि इराक में अगवा किए गए 40 में से 39 भारतीय मारे जा चुके हैं? विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने शुक्रवार को संसद में कहा कि उन्हें नहीं मालूम है कि  39 भारतीय ज़िंदा हैं या मारे गए हैं. उन्होंने आगे कहा कि भारत छह अंतरराष्ट्रीय सूत्रों के संपर्क में है जिनका कहना है कि अगवा भारतीय ज़िंदा हैं.

 

सुषमा ने जिन छह अंतरराष्ट्रीय सूत्रों का हवाला दिया जिनमें एक अंतरराष्ट्रीय सूत्र रेड क्रेसेंट का सार्वजनिक तौर पर नाम लिया और उनके हवाले से भी भारतीय के ज़िंदा होना का दावा किया, लेकिन जब एबीपी न्यूज़ ने रेड क्रेसेंट से संपर्क किया तो सुषमा का दावा झूठा निकला.

 

रेड क्रेसेंट के एक अधिकारी ने एबीपी न्यूज़ से कहा कि वे भारतीय अधिकारियों के संपर्क में नहीं हैं.

 

 

पढ़ें एबीपी न्यूज के वरिष्ठ पत्रकार दिबांग और रेड क्रेसेंट के महासचिव के सहायक मुहम्मद खुजाई  के बीच हुई पूरी बातचीत

 

दिबांग – हैलो. मिस्टर मोहम्मद बोल रहे हैं?

 मोहम्मद- जी हां.

 

 

दिबांग – मिस्टर मोहम्मद, गुड इवनिंग. मैं नई दिल्ली से एबीपी न्यूज की ओर से बात कर रहा हूं.

मोहम्मद- जी हां.

 

 

दिबांग – मुझे आपका नंबर रेडक्रॉस इंटरनेशनल के मिस्टर सालेह से मिला. जहां तक मैं समझता हूं, आप रेड क्रेसेंट के साथ हैं?

 मोहम्मद- जी हां. मैं रेड क्रेसेंट में काम करता हूं.

 

 

दिबांग- मैं आपसे सिर्फ इतना जानना चाहता हूं कि क्या रेड क्रेसेंट ने उन भारतीय मजदूरों के बारे में सुना है, जिन्हें जून में अगवा कर लिया गया था?

 

मोहम्मद – जी हां, आपका मतलब मोसूल के ग्रुप से है?

 

दिबांग- जी हां, मेरा मतलब मोसूल के ग्रुप से ही है.

 

मोहम्मद- मोसूल में भारतीयों के ग्रुप की बात कर रहे हैं ना?

 

दिबांग – जी हां, मैं सिर्फ इतना जानना चाहता हूं कि इन दिनों वे लोग कहां हैं और क्या वो सुरक्षित हैं? वे लोग कैसे हैं?  रेड क्रेसेंट को उनके बारे में आखिरी बार जानकारी कब मिली थी?

मोहम्मद- नहीं, माफ कीजिए, मेरे पास असल में उनके बारे में कोई जानकारी नहीं है.

 

दिबांग- रेड क्रेसेंट को क्या कभी उनके ठिकाने के बारे में पता चला? आप ने कभी उन्हें देखा या उन पर ध्यान दिया?

 मोहम्मद – सही-सही कहूं तो …करीब चार महीने पहले. तीन-चार महीने पहले मुझे उनके बारे में सूचना मिली थी. तब वो मोसूल में आईएसआईएस के कब्जे में थे. उसके बाद उनके बारे में जानकारी मिलनी बंद हो गई. फिलहाल मेरे पास उनके बारे में कोई जानकारी नहीं है.

 

 

दिबांग- अच्छा… तीन महीने पहले आपके पास क्या जानकारी थी? वो मोसूल में कहां थे? उनके बारे में क्या कहा जा रहा था?

मोहम्मद- भारतीय मजदूरों का ग्रुप फुटबॉल स्टेडियम में काम कर रहा था.

 

दिबांग – वो लोग फुटबॉल स्टेडियम में काम कर रहे थे?

मोहम्मद – अच्छा.

 

मोहम्मद- हां, वो लोग फुटबॉल स्टेडियम में काम कर रहे थे. उसके बाद आतंकियों का ग्रुप उन्हें मोसूल में ही किसी और जगह पर ले गया. उसके बाद उनके बारे में सूचनाएं मिलनी बंद हो गई.

 

 

दिबांग- अच्छा. आपको लगता है कि वो लोग अभी भी जिंदा हैं?

मोहम्मद- मुझे नहीं मालूम. मैं दावा नहीं कर सकता कि वो लोग जिंदा हैं या नहीं.

 

दिबांग- अच्छा….  क्या आईएसआईएस से इस मुद्दे पर कोई समझौता हुआ था? 

 

मोहम्मद- नहीं-नहीं. मुझे इसके बारे में जानकारी नहीं है.

 

 

दिबांग – क्या आपने उनसे (भारतीय मजदूरों से) सीधे बात की या उनके बारे में किसी ने आपको बताया कि वो लोग मोसूल में हैं?

दिबांग – तीन महीने पहले आपकी उनसे सीधे-सीधे बात हुई या आपको कहीं और से ये जानकारी मिली?

 मोहम्मद- नहीं-नहीं. मुझे उन्हीं में से किसी से जानकारी मिली थी, जब आईएसआईएस उन्हें किसी दूसरी जगह पर ले जा रहा था. मुझे नहीं मालूम वो कौन सी जगह थी.

 

 

दिबांग – क्या आपको मालूम है कि वो लोग संख्या में 40 थे? उनमें से एक बच कर निकल भागा था? भाग निकलने में कामयाब हो गया था? क्या आपको इस बारे में जानकारी है?

मोहम्मद- नहीं-नहीं. मैं इस बारे में कुछ भी पक्का नहीं कह सकता.

 

 

दिबांग- अच्छा….  मिस्टर मोहम्मद, रेड क्रिसेंट में आप क्या करते हैं? वहां आप किस पद पर हैं?

मोहम्मद- आपका मतलब मेरे काम से है?

 

दिबांग – जी हां.

मोहम्मद- मैं वहां सेक्रेटरी जनरल का असिस्टेंट हूं.

 

दिबांग- अच्छा…अच्छा. बहुत-बहुत धन्यवाद.

 

 

दिबांग – जब आपको किसी ने बताया था कि उसने 39 भारतीयों को देखा है…तो क्या आपने दूतावास को ये जानकारी दी? या फिर इस मामले में दखल दिया और भारतीयों को मदद की? ….आपकी क्या भूमिका थी?

 

मोहम्मद- नहीं-नहीं. मैं मध्यस्थता में था. नहीं …मैं इस बारे में चर्चा में शामिल था कि राजदूत और भारत सरकार से कोई शख्स उनकी मदद कर सकते हैं. लेकिन माफ कीजिए…वो आईएसआईएस के कब्जे में थे. आप जानते हैं कि आईएसआईएस क्या बला है.

 

 

दिबांग- मैं आपसे ये सवाल इसलिए कर रहा हूं…क्योंकि भारत की विदेश मंत्री ने आज संसद में बयान दिया है कि इराक में रेड क्रिसेंट को मालूम है आईएसआईएस ने भारतीय मजदूरों को इराक में कहां रखा है?

 

मोहम्मद- अच्छा. मैं कह नहीं सकता…मैं नहीं जानता.

 

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