मोदी का जलवा जारी, बिहार में एनडीए को मिलेगा पूर्ण बहुमत: सर्वे

By: | Last Updated: Thursday, 8 October 2015 1:42 AM

नई दिल्ली: बिहार में अगले सप्ताह से मतदान शुरू हो रहा है. जनता को नई सरकार चुननी है. लेकिन उससे पहले एबीपी न्यूज और नीलसन लेकर आया है बिहार का फाइनल ओपिनियन पोल.

 

क्या है बिहार का मूड? बिहार में किसकी लहर? कौन बनेगा मुख्यमंत्री ? क्या लगातार तीसरी बार सत्ता तक पहुंचेंगे नीतीश कुमार ? क्या नरेंद्र मोदी का दम फिर दिखेगा ? कौन है मुख्यमंत्री की पहली पसंद ? जाति की राजनीति या विकास का एजेंडा ?

 

24 जुलाई को बिहार चुनाव पर पहले सर्वे में जेडीयू गठबंधन को 129 और एनडीए को 112 सीटें मिली थीं. 15 सितंबर को दूसरे सर्वे में कांटे की टक्कर दिखी थी. जेडीयू गठबंधन को 122 और एनडीए को 118 सीटें मिली थीं.

 

एबीपी न्यूज नीलसन के सर्वे के मुताबिक अब बिहार में भी नरेंद्र मोदी का जलवा कायम है. एनडीए के नेतृत्व में बिहार में पूर्ण बहुमत सरकार बनती दिख रही है. एबीपी न्यूज-नीलसन के सर्वे के मुताबिक बिहार में एनडीए गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलने का अनुमान है. सर्वे के मुताबिक बिहार की कुल 243 सीटों में से एनडीए गठबंधन को 128 सीटें मिलने की उम्मीद है यानि स्पष्ट बहुमत की संख्या 122 से 6 सीटें अधिक मिल रही हैं. वहीं आरजेडी-जेडीयू और कांग्रेस महागठबंधन को 112 सीटें मिलने की उम्मीद है यानि बहुमत से 10 सीटें कम। जबकि अन्य पार्टियों को 3 सीटें मिलने की संभावना है. दोनों गठबंधनों के बीच 16 सीटों का फासला है जबकि वोट की बात करें तो सिर्फ 2 फीसदी का ही अंतर है.

 

 एनडीए गठबंधन को 42 फीसदी, आरजेडी-जेडीयू-कांग्रेस महागठबंधन को 40 फीसदी और अन्य को 18 फीसदी वोट मिलने की संभावना है. एनडीए गठबंधन लगातार अपनी स्थिति मजबूत करता जा रहा है जबकि महागठबंधन कमजोर हो रहा है, एबीपी न्यूज-नीलसन का ये चौथा सर्वे है. एनडीए गठबंधन को मई 2015 के सर्वे में 112 सीटें, जुलाई के सर्वे में 112 सीटें और सितंबर के सर्वे में 118 सीटें मिलने की उम्मीद थी जो आंकड़ा ताजा सर्वे के मुताबिक अब 128 सीटों का हो गया है. वहीं महागठबंधन को मई 2015 के सर्वे में 127 सीटें, जुलाई के सर्वे में 129 सीटें और सितंबर के सर्वे में 122 सीटें मिलने का अनुमान था. ताजा सर्वे के मुताबिक महागठबंधन को 112 सीटें मिलने की उम्मीद है.

 

अन्य के खाते में अप्रैल-मई में 4 सीटें, जुलाई 2015 के सर्वे में दो सीटें सितंबर-अक्टूबर के सर्वे में तीन सीटें आ रही हैं.

 

क्षेत्रवार किसको कितनी सीटें?

एबीपी न्यूज नीलसन सर्वे के मुताबिक महागठबंधन को भोजपुर से 8, पूरब से 31, मगध से 39, मिथला से 17, तिरहुत से 17 सीटें मिलने की संभावना है.

 

एनडीए को भोजपुर से 16, पूरब से 10, मगध से 22, मिथला से 25, तिरहुत से 55 सीटें मिल सकती हैं.

 

अन्य के खाते में भोजपुर से एक, पूरब से भी एक, मगध से भी एक सीटें मिलने की संभावना है.

 

सपा,एनसीपी समेत 6 पार्टियों का गठबंधन किसको नुकसान पहुंचा रहा है?

बिहार में एक तरफ असुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व में एआईएमआईएम चुनाव लड़ रही है वहीं 6 पार्टियों का गठबंधन है जिसमें मुलायम सिंह की समाजवादी पार्टी, पप्पू यादव की पार्टी जन अधिकार पार्टी और शरद पवार की पार्टी एनसीपी शामिल है. ये पार्टियां किस गठबंधन को नुकसान पहुंचा रही है. 58 फीसदी वोटरों ने कहा कि ये 6 पार्टियां महागठबंधन को नुकसान पहुंचा रही है जबकि 25 फीसदी वोटरों ने कहा कि एनडीए को नुकसान पहुंचा रही है .

 

1.65 लाख करोड़ के जिस पैकेज की घोषणा चुनाव के पहले पीएम मोदी ने किया क्या उससे बीजेपी को कोई फायदा होगा?

 

करीब 60 फीसदी लोगों का मानना है कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार द्वारा 1.65 लाख करोड़ के पैकेज से बीजेपी को फायदा होगा.

 

क्या बीजेपी को सीएम पद का उम्मीदवार घोषणा करना चाहिए था या मोदी के नाम पर ही चुनाव लड़ना चाहिए था?

 

इसके जवाब में 53 फीसदी लोगों का मानना है कि बीजेपी को सीएम उम्मीदवार उतारना चाहिए था. 35 फीसदी लोग कह रहे हैं कि नरेंद्र मोदी के नाम पर चुनाव लड़ना ही ठीक होगा.

 

मोहन भागवत के आरक्षण की समीक्षा वाले बयान का क्या असर है?

 

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने आरक्षण की समीक्षा की बात की थी. यही सवाल वोटरों से किया गया कि क्या वो मोहन भागवत के बयान से सहमत हैं. 52 फीसदी लोगों ने भागवत के बयान का समर्थन किया वहीं 34 फीसदी वोटर उनके बयान से सहमत नहीं हैं. 14 फीसदी लोगों की कोई राय नहीं है. वोटरों से पूछा गया कि क्या मोहन भागवत के बयान से एनडीए को फायदा होगा या नुकसान. 42 फीसदी लोगों की राय है कि एनडीए को नुकसान होगा, 36 फीसदी लोगों की राय है कि फायदा होगा जबकि 22 फीसदी लोगों की कोई राय नहीं थी या उनके बयान के बारे में वोटरों को जानकारी नहीं थी.

 

पांच साल में जेडीयू की सरकार के कामकाज को आप कैसा देखते हैं?

इसके जवाब में दो तिहाई फीसदी लोगों ने जेडीयू सरकार को अच्छा बताया है. 28 फीसदी ने बहुत अच्छा, 43 फीसदी ने अच्छा, 19 फीसदी ने औसत तो 9 फीसदी ने बुरा बताया है.

 

नीतीश और मोदी का कैसा कामकाज है ?

जब वोटरों से पूछा गया कि नीतीश कुमार के कामकाज का बिहार में कैसे आंकलन करते हैं तो 27 फीसदी लोगों ने उनके काम को बहुत अच्छा, 39 फीसदी लोगों ने अच्छा, 21 फीसदी लोगों ने औसत बताया जबकि सिर्फ 10 फीसदी लोगों ने खराब बताया है. यही सवाल नरेन्द्र मोदी के कामकाज के बारे में पूछा गया कि नरेन्द्र मोदी के एक साल के शासन में बिहार में कैसा विकास हुआ है तो 46 फीसदी लोगों की राय है कि मोदी के शासन काल में बिहार में विकास हुआ और इतने ही लोगों की राय है कि बिहार में विकास नहीं हुआ है. केन्द्र में मोदी सरकार के डेढ़ साल पूरे होने वाले हैं. जब केन्द्र में उनके कामकाज के बारे में पूछा गया तो मोदी के काम को 27 फीसदी ने बहुत अच्छा, 36 फीसदी ने अच्छा,  21 फीसदी ने औसत और 11 फीसदी ने खराब बताया है.

 

क्या आपको लगता है कि नीतीश कुमार को एक बार फिर मौका देना चाहिए?

इसके जवाब में लोगों की राय करीब करीब बराबर हिस्से में बंटी हुई है. 50 फीसदी लोगों का मानना है कि इन्हें एक बार फिर मौका देना चाहिए. लेकिन 47 फीसदी लोगों का मानना है कि अब बदलाव होना चाहिए.

 

मुख्यमंत्री की दौड़ में कौन आगे, किसकी लोकप्रियता सबसे अधिक है? 

भले सीटों के मामले में एनडीए गठबंधन आरजेडी-जेडीयू महागठबंधन से आगे है लेकिन मुख्यमंत्री की पसंद में नीतीश कुमार सबसे आगे चल रहे हैं. 49 फीसदी वोटरों ने कहा है कि नीतीश कुमार सबसे बेहतर मुख्यमंत्री के उम्मीदवार हैं वहीं 41 फीसदी वोटरों की पसंद सुशील कुमार मोदी हैं. जब वोटरों से ये पूछा गया कि क्या नीतीश कुमार को फिर से मुख्यमंत्री बनने का मौका देना चाहिए तो 50 फीसदी वोटरों ने कहा कि नीतीश कुमार को दोबारा मुख्यमंत्री बनने का मौका मिलना चाहिए जबकि 47 फीसदी वोटरों ने कहा कि नीतीश को मुख्यमंत्री बनने का मौका नहीं मिलना चाहिए. वोटरों से जब पूछा गया कि बिहार में नरेन्द्र मोदी और नीतीश कुमार में से कौन सबसे लोकप्रिय नेता है तो लोगों की राय दोनों नेताओं के बीच बंट गई यानि लोकप्रिययता के मामले में दोनों नेताओं के बीच कांटे की टक्कर है. 48 फीसदी वोटरों ने नरेन्द्र मोदी को लोकप्रिय नेता कहा तो इतने ही वोटर नीतीश कुमार के पक्ष में हैं.

 

 

बिहार बीजेपी में नीतीश कुमार को टक्कर देने वाला नेता कौन है?

इसके जवाब में लोगों ने सुशील मोदी को सबसे मजबूत दावेदार बताया है. करीब 45 फीसदी लोगों ने इनको सबसे ज्यादा टक्कर देने वाला बताया है. सुशील मोदी के बाद शाहनवाज बताए गए हैं. शाहनवाज को 10 फीसदी लोगों ने अपनी पसंद बताया है.

 

बिहार में सबसे अधिक लोकप्रिय नेता कौन है?

पीएम नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार से बराबर का टक्कर है. दोनों को ही 48-48 फीसदी लोगों ने अपना पसंदीदा नेता बताया है. लेकिन 18 से 25 की उम्र के नवयुवकों में मोदी ज्यादा लोकप्रिय हैं. करीब 52 फीसदी नवयुवक मोदी को तो 45 फीसदी नीतीश को पसंद कर रहे हैं.

 

क्या आपको लगता है कि मोदी सरकार आने के बाद बिहार में विकास हुआ है?

यहां भी राय बराबर हिस्से में बंटी हुई है. 46 फीसदी लोगों की राय हां में तो 46 फीसदी ही ना कह रहे हैं.

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कामकाज से क्या आप खुश हैं?

इसके जवाब में करीब 63 फीसदी लोगों ने बताया कि वे मोदी के कामकाज से संतुष्ट हैं. इन लोगों ने मोदी के कार्यकाल को अच्छा बताया है.

 

कौन गठबंधन बिहार में सरकार बनाएगी?

यहां एनडीए को बढ़त मिलती दिख रही है. करीब 49 फीसदी ने एनडीए की जीत का संकेत दिया तो 45 फीसदी महागठबंधन की जीत के आसार बता रहे हैं.

 

कौन सी पार्टी बिहार में जाति की राजनीति करती है?

बिहार की राजनीति में जाति का अहम रोल होता है. यही सवाल जब वोटरों से किया गया कि कौन सा गठबंधन चुनाव में जाति की राजनीति करता है तो 48 फीसदी वोटरों ने कहा कि महागठबंधन जाति की राजनीति करती है वहीं 33 फीसदी वोटरों का कहना था कि एनडीए जाति की राजनीति करता है.

 

क्या आपने ओवैसी और उनकी पार्टी के बारे में सुना है?

इसके जवाब में करीब आधे से अधिक लोगों ने कहा कि वे इनको नहीं जानते हैं. इनके बारे में उन्हें कुछ भी पता नहीं है. मुस्लिम समुदाय में भी इनको लेकर कोई खास जानकारी नहीं है. करीब 42 फीसदी मुसलमान तो इनको जानते भी नहीं हैं.

 

कैसे हुआ सर्वे?

क्या जो देश का मूड है वही बिहार का मूड है. इन सारे सवालों के जवाब मिलेंगे ओपिनियन पोल से. 24 सितंबर से 2 अक्टूबर के बीच बिहार में सर्वे किया गया. 243 विधानसभा सीटों में से 123 सीटों पर किया गया ओपिनियन पोल. कुल 22,383 वोटरों की राय ली गई. नीलसन का ये पोल अंतर्राष्ट्रीय संस्था यूरोपियन सोसाइटी फॉर ओपिनियन एंड मार्केटिंग रिसर्च यानी ESOMAR के दिशानिर्देशों को पूरी तरह ध्यान में रखकर किया गया है.

 

बिहार में लोकप्रियता में मोदी और नीतीश के बीच कांटे की टक्कर? 

एबीपी न्यूज नीलसन सर्वे: कहां से किसको कितनी मिल सकती हैं सीटें? 

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Web Title: ABP News-Nielsen survey says NDA to get majority
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