व्यक्ति विशेष : कितना सच्चा है डेरा सच्चा सौदा?

By: | Last Updated: Saturday, 8 November 2014 12:24 PM
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उनका बॉलीवुड वाला सुपर मसाला स्टाइल है. कार हो या फिर मोटर बाइक हर तरह की सवारी का उन्हें शौक है और इसीलिए कभी वह हाथी पर सवार हो जाते हैं तो कभी उनके पैर साइकिल के पैडल पर कदम ताल करते नजर आते हैं. खेत और खलिहान से लेकर गीत – संगीत की महफिल तक फैला हुआ है बाबा गुरुमीत राम रहीम के डेरे का ऐसा आकर्षक और रुपहला संसार. अपने अनुयायियों के बीच नाचते, गाते और झूम झूम कर थिरकते बाबा राम रहीम का नाम यूं तो पिछले करीब दो दशकों से देश और विदेश में गूंजता रहा है लेकिन उनके नाम की ये धूम उस वक्त और बढ़ जाती है जब हरियाणा और पंजाब में चुनाव की बयार आती है. दरअसल देश के इन दो सूबों में बाबा राम रहीम का असर और रसूख ही कुछ ऐसा है कि चुनावी मौसम में तमाम राजनीतिक दल उनके डेरा सच्चा सौदा पर डोरे डालने के लिए मजबूर हो जाते हैं. डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख बाबा राम रहीम के डेरे यूं तो हरियाणा और पंजाब के कई शहरों में मौजूद हैं लेकिन उनकी भक्ति का साम्राज्य देश ही नहीं विदेश तक फैला हुआ है और यही वजह है कि आस्था की दुनिया से लेकर राजनीतिक के संसार तक बाबा राम रहीम का जलवा बरसों से बरकरार है. दुनिया भर में बाबा राम रहीम के करोड़ों अनुयायी बताए जाते हैं और खुद बाबा राम रहीम एक संत होने के साथ एक रॉक स्टार भी कहलाते हैं.

 

 

बाबा गुरुमीत राम रहीम ने बताया कि हम ये चीजें लोगों से छुड़वाते हैं कि भई किसी का बुरा ना बताओं बलात्कार ना करो बुरे काम ना करों और कैसी विडंबना है कि सवा सौ करोड़ लोग हमारे कहने से ये बुराइयां छोड़ रहे हैं. और वह ही हमारे पे थोपा जा रहा है.

 

बाबा राम रहीम का ये रूप देख कर दुनिया उन्हें रंगीला बाबा कह सकती है. उन्हें शौकीन बाबा के तौर पर भी पुकारा जा सकता है या फिर लोग उन्हें एक गायक- संगीतकार के तौर पर भी आप पहचान सकते हैं. और अब तो बाबा राम रहीम एक्टर भी बन चुके हैं क्योंकि जल्द ही उनकी फिल्म भी रिलीज होने वाली है. दरअसल बाबा राम रहीम एक ऐसे धर्मगरु है जिनके रुप हजार है और खास बात ये है कि उनके भक्तों को उनके हर रुप से प्यार है. फिर चाहे वह पंरपरागत मोर पंख के साथ उनका ये सादा लिबास हो या फिर जींस और टी शर्ट में रैप और हिपहाप पर थिरकने वाला उनका ये मॉर्डन अंदाज. बाबा राम रहीम की हर अदा पर उनके भक्त मचल उठते हैं फिर चाहे वह गीत – संगीत की महफिल हो या फिर उनके प्रवचन का संसार हो.

 

डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख बाबा गुरमीत राम रहीम ने बताया कि हम तो एक फकीर हैं. सबका भला करना हमारा काम है. लोग हमें पिताजी भी कहते हैं गुरुजी भी कहते हैं. जो भी आपको ठीक लगे संत भी कहते हैं. रॉक स्टार भी यूथ कहता है. लेकिन हम अपने आप में एक इंसान हैं.

 

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख बाबा राम रहीम खुद को फकीर कहते हैं लेकिन दुनिया की नजर में वह क्या है. वह एक संत है समाज सुधारक है या फिर एक एक्टर और रॉक स्टार है. दरअसल बाबा राम रहीम की ये दास्तान कई मोड़ से गुजरती है जिसमें उनकी शानो शौकत के रंग शामिल हैं तो उन पर लगे हत्या और बलात्कार जैसे संगीन इल्जामों के डंक भी मौजूद है. सतरंगी रंगों में रंगी बाबा राम रहीम की इस कहानी के हर पहलू की पड़ताल हम करेंगे लेकिन सबसे पहले देखिए बाबा के राजनीतिक रसूख का ये रंग.  

 

आईएनएलडी नेता अभय चौटाला ने कहा कि हम तो उसको मान कर चल रहे थे कि वह कम फैक्टर रहेगा लेकिन वह बड़ा फैक्टर रहा है. ये भाजपा की जीत नहीं है ये मेरे हिसाब से डेरा सच्चा सौदा की जीत है. और इसका कहीं ना कहीं डेरा सच्चा सौदा को फायदा होगा.

 

हरियाणा के बड़े नेता अभय चौटाला भी मानते हैं कि हरियाणा विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत के पीछे डेरा सच्चा सौदा का बड़ा हाथ रहा है. दरअसल पंजाब और हरियाणा की राजनीति में डेरा सच्चा सौदा एक बडी ताकत माना जाता है यही वजह है कि ग्राम पंचायत से लेकर लोकसभा के चुनाव तक सभी दलों के नेता बाबा राम रहीम से समर्थन मांगने डेरा सच्चा सौदा में आते रहे हैं.

 

बाबा गुरमीत राम रहीम ने कहा कि चुनाव के वक्त बहुत सारे लोग आते है आपके पास क्या सिर्फ आशीर्वाद लेकर चले जाते हैं या फिर मदद भी मांगते हैं. आशीर्वाद लेते है कहते हैं गुरुजी हमारी मदद करना और हम कहते है कि हमने शासन को बोला है अगर आप समाज का भला करोगे समाज के सात चलोगे तो लोग आपका साथ देंगे अगर आप बुरे कर्म करोगे शराबों की पेटियां बांटनी शुरु कर दोगे तो आपका साथ नहीं देंगे. और पूरा आशीर्वाद सबको बोला.

 

पिछले कई सालों से पंजाब और हरियाणा की राजनीति में डेरा सच्चा सौदा का गहरा असर रहा है क्योंकि डेरा के करीब पांच करोड़ समर्थक बताए जाते हैं. डेरा का दावा है कि इनमें से 60 लाख से ज्यादा मतदाता पंजाब और हरियाणा में ही हैं. पंजाब की 117 विधानसभा सीटों में से 65 सीटें मालवा इलाके से आती हैं और यहां डेरा समर्थकों की हार और जीत में अहम भूमिका बताई जाती है.  शायद यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हरियाणा में जब चुनाव प्रचार करने पहुंचे तो डेरा सच्चा सौदा के सामाजिक कामों को उसकी तारीफ करना नहीं भूले.

 

पंजाब और हरियाणा के चुनावहं में डेरा सच्चा सौदा कांग्रेस पार्टी का समर्थन करता रहा है लेकिन इस बार हरियाणा विधानसभा चुनाव में बाबा राम रहीम के डेरे पर बीजेपी डोरे डालने में कामयाब रही. खास बात ये है कि डेरा का समर्थन लेने के लिए खुद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज ने बाबा राम रहीम से मुलाकात की थी. जिसके बाद डेरा सच्चा सौदा ने वहटिंग से तीन दिन पहले हरियाणा और महाराष्ट्र में बीजेपी को समर्थन देने का ऐलान किया था. डेरा के इतिहास में ये पहला मौका है जब उसने खुल कर किसी राजनीतिक दल को अपना समर्थन इस तरह दिया है.

 

बाबा गुरमीत राम रहीम ने कहा कि हमारी तरफ से संदेश था कि जो देश का भला करे जो इंसानियत का भला करे मानवता का भला करे और समाज में रह कर समाज के दुख सुन कर उसको दूर करने की कोशिश करे उनका साथ दीजिए और एफीडेविट हमने बनवाया कि वह लोग उसको पढे उस पर साइन करे आप देख सकते हैं. कि हां हम इन कामों को फालो करेंगे, जैसे नशा ना हो कन्या भ्रूण हत्या ना हो बहुत सारी ऐसी चीजें कि आप समाज में रहकर समाज के काम करें. तो आप उन सब को चुने हमारी तरफ से बस ये संदेश गया.

 

हरियाणा की कुल 90 विधानसभा सीटों में से जिन 18 सीटों पर डेरा सच्चा सौदा का ज्यादा प्रभाव माना जाता है उनमें से उचाना कला, तोहाना, अंबाला सिटी, हिसार, नरनाउंड, बवानी खेरा, भिवानी, शाहबाद, थानेसर, लाडवा, मौलाना, और पेहवा सीटों पर इस बार बीजेपी ने जीत दर्ज की है जबकि पिछले चुनाव में बीजेपी सिर्फ भिवानी सीट पर ही जीत हासिल कर सकी थी. हांलाकि डेरा के गढ़ सिरसा और फतेहबाद में बीजेपी एक भी सीट नहीं जीत सकी लेकिन यहां उसका वहट प्रतिशत जरुर बढा है. और यही वजह है कि हरियाणा के चुनाव में डेरा सच्चा सौदा की राजनीतिक ताकत देख कर विरोधी भी हैरान हैं और इसीलिए अब वह बीजेपी को समर्थन देने के पीछे बाबा राम रहीम की मंशा पर सवाल खड़े कर रहे हैं. 

 

अभय चौटाला ने कहा कि इसका कहीं ना कहीं डेरा सच्चा सौदा को फायदा होगा. इस केस में किसी तरह का फायदा उठाएंगे क्योकि सीबीआई का तो आपने देखा है कि किस तरह से कोई भी सरकार बनती है वह सीबीआई का दुरुपयोग करती है. और इनका सारा मामला सीबीआई के साथ जुड़ा हुआ है. कहीं ना कहीं इनको ये कहा गया है कि कल हम आपकी मदद करेंगे आप हमारी खुल कर के मदद करें.

 

बाबा राम रहीम के जिन मुकदमों की तरफ अभय चौटाला इशारा कर रहे हैं. वह करीब 12 साल पुराने हैं. दरअसल साल 2002 में बाबा राम रहीम पर अपने आश्रम की साध्वियों के साथ बलात्कार करने के आरोप लगे थे. सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति और डेरा के पूर्व मैनेजर रणजीत सिंह की हत्या में भी बाबा राम रहीम का हाथ होने का आरोप लगा है. हत्या और बलात्कार के इन मामलों की जांच सीबीआई कर रही है और बाबा राम रहीम इन केसों में जमानत पर है. लेकिन खुद बाबा इन सारे आरोपों से साफ इनकार करते हैं.

 

बाबा गुरमीत राम रहीम कहते हैं कि बाबा पर एक और इल्जाम है कि बाबा ने एक पत्रकार और एक डेरा मैनेजर की हत्या करवाई. सौ पर्सेंट झूठ है क्योंकि हर कोई जानता है यहां आश्रम में अगर कोबरा भी निकल आए तो उसको भी पकड़ के बोतल में डाल कर जंगल में छोड़ आते हैं. ताकि यहां जो लोग रहते हैं उनको कोई नुकसान ना हो. तो वह जीव हत्या तो हम पहले से ही सौ पर्सेंट मना कर रहे हैं. ये तो हो ही नहीं सकता कहने को कोई कुछ भी कहता रहे.

 

14 साल पहले बाबा राम रहीम उस वक्त मुश्किलों में घिर गए थे जब उनके डेरे की एक साध्वी ने प्रधानमंत्री कार्यालय को चिट्ठी लिख कर बाबा की शिकायत की थी. साध्वी ने अपने हलफनामें में खुद और आश्रम की दूसरी साध्वियों के साथ यौन शोषण का आरोप लगाया था और फिर इस मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की गई थी. अदालत के आदेश पर साल 2001 में इस पूरे मामले की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंप दिया गया था. इसी दौरान सिरसा के एक पत्रकार रामचंद्र छत्रपति ने साध्वी बलात्कार मामले का ब्यौरा जब अपने अखबार पूरा सच में छापा तो नवंबर 2002 में उनकी गोली मार कर हत्या कर दी गई. बाबा राम रहीम पर ये भी आरोप था कि उन्होंने डेरे के पूर्व प्रबंधन रंजीत सिंह की भी हत्या करवाई हैं क्योंकि वह डेरे के कई राज जान चुका था. रंजीत सिंह की 10 जुलाई 2003 को हत्या कर दी गई थी और तब इन दोनों हत्याओं में डेरा सच्चा सौदा का नाम सामने आया था. पत्राकर रामचंद्र छत्रपति के बेटे अशुंल छत्रपति अपने पिता की ये कहानी बताते हैं कि  रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने कहा कि 2000 में उन्होने पूरा सच नाम से दैनिक अखबार शुरु किया. नाम के अनुरुप उन्होने अखबार में पूरा सच छापा. 2002 में उन्होने डेरा सच्चा सौदे के खिलाफ, डेरा की साध्वियों द्वारा एक गुमनाम पत्र में जो आरोप लगाए गए थे उसके आधार पर एक न्यूज लगाई जिसमे उन्होंने डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत सिंह पर जो रेप के आरोप थे उसका खुलासा किया उसके बाद लगातार डेरा सच्चा सौदे कि तरफ से उन्हें जान से मारने की धमकी आने लगी और 24 अक्टूबर 2002 को डेरा के दंबगो ने उन पर अटैक किया और उन्हें गोलियां मारी गईं और 21 नवम्बर 2002 को 28 दिन जिन्दगी औऱ मौत से जुझते हुए उन्होंने दम तोड़ दिया.

 

साध्वी बलात्कार केस में सीबीआई ने 28 लोगों की गवाही ली थी. 2007 में सीबीआई ने हाईकोर्ट में हत्या और बलात्कार के मामलों में अपनी रिपोर्ट भी पेश कर दी थी. जिसके बाद साल 2008 में अंबाला में सीबीआई की विशेष अदालत में आईपीसी की धारा 376 और 506 के तहत बाबा के खिलाफ आरोप तय कर दिए गए थे. सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में कहा था कि बाबा राम रहीम ने साध्वियों से ना सिर्फ बलात्कार किया बल्कि उन्हें डराया धमकाया भी था कत्ल के आरोप में डेरा सच्चा सौदा के कर्मचारियों समेत नौ लोगों के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल की गई थी. 

 

बाबा गुरमीत राम रहीम ने कहा कि किसी से भी नहीं क्योंकि हम सच है हमारे पास सच है. और जिसके पास सच है उसको डर किस बात का. जब उनसे पूछा गया कि सच क्या है कि जो आरोप है वैसा आपने नहीं किया. तो बाबा ने जवाब देते हुए कहा कि कभी जिंदगी में सोचा भी नहीं करना तो दूर की बात है. जब उनसे पूछा गया कि फिर क्यों आपके साथ ऐसा हुआ. तो उन्होंने जवाब दिया कि हम आपको पहले ही बात चुके हैं. कि ड्रग माफिया ऐसा करता है और जिन लोगों को ऐसा लगता है कि गुरुजी राजा बन कर ना बैठ जाए जबकि हमारा राजनीति से कोई लेना देना नहीं है. उन लोगों को भी ये दहशत है.

 

बाबा गुरमीत राम रहीम से जब पूछा गया कि एक आपका रुप संत वाला है. अभी आपकी फिल्म भी रिलीज होने वाली है. तो ये शौक फकीरी के साथ-साथ पहले से थे या समय रहते आए. तो उन्होंने जवाब दिया कि ये शौक फकीरी के साथ आए हैं . ये शौक नहीं कहते हम इसे. हमारा ये सब करने का गाने का फिल्म में आने का एक ही मकसद है कि समाज की तमाम बुराइयों को दूर करें. यूथ में जो नशे आ रहे हैं यूथ जो बुराइयों की तरफ जा रहा है. उससे बचाने के लिए हम सब ये चीज कर रहे हैं.

 

बाबा राम रहीम अपने अनुयायियों की नजरों में एक रॉक स्टार भी है. जींस और टीशर्ट पहने जब बाबा पूरे जोश और जूनून के साथ मंच पर उतरते हैं तो किसी रॉक स्टार की तरह ही नजर आते हैं. बाबा राम रहीम अभी तक कई गाने गा चुके हैं. हाल ही में उनके छह म्यूजिक एलबम भी निकल चुके है. थैंक्यू फार दैट, नेटवर्क तेरे लव का, चश्मा यार का, लव रब से और इंसान के अलावा उनका सबसे नया म्यूजिक एलबम हाईवे लव चार्जर है. खास बात ये है कि बाबा गुरुमीत राम रहीम ना सिर्फ गाने गाते हैं बल्कि गाने लिखते भी हैं और खुद ही उनका संगीत भी तैयार करते हैं. 

 

बाबा गुरमीत राम रहीम बताते हैं कि हमनें अभी एक फिल्म में सॉंग गाया है क्योंकि हमने ये जितने भी सुने तो ये था कि लोग शराब की तारीफ कर रहे हैं कि सारी रात पियो. चार बोतलें पिओ दस बोतले पीओ पता नहीं. क्या क्या सुनने में मिलता है. तो उसके लिए एक लाइन हमारे ख्याल में हैं.

 

डेरा सच्चा सौदा की खास महफिल में बाबा राम रहीम करीब आठ घंटे का लाइव प्रोग्राम पेश करते हैं. कार्यक्रम के दौरान ही वह तीन बार अपनी ड्रेस भी बदलते हैं और तीन बार ही अलग– अलग स्टाइल में मंच पर एंट्री भी मारते हैं लेकिन शो की सबसे खास बात ये है कि इसमें बाबा राम रहीम जम कर स्टंट भी करते हैं.   

 

बाबा गुरमीत राम रहीम बताते हैं कि हम रॉक गाते हैं. उस तरह के गीत गाते हैं. जैज है, पॉप है रैप है हिप हाप है और मेलोडी है. क्लासिक है हर तरह का सांग गाते हैं भगवान के लिए ईश्वर के लिए ताकि उसको सुन के जो नौजवान है. गंदगी सुनने की बजाए अच्छी चीज सुने और वह डिमांड करते हैं हमने बोला था कि हम जो बोलेंगे वह आप मानेंगे और आप जो बोलोंगे हम मानेंगे तो यूथ ये हमसे कहता है पांच करोड़ में 70 पर्सेंट यूथ है. कि गुरुजी आप इस तरह के कपड़े पहनों, जींस पहन कर आओ आप टीशर्ट पहनों तो जैसा वह चाहते हैं रुबरु प्रोग्राम होता है हमारा. रुबरु नाइट उसमें आठ घंटे हम प्रोग्राम देते हैं.

 

हरियाणा का सिरसा जिला. और सिरसा में डेरा सच्चा सौदा का आश्रम 65 सालों से है. बाबा गुरुमीत राम रहीम सिंह इंसान इस डेरे के तीसरे गुरु हैं. डेरा सच्चा सौदा का साम्राज्य आज विदेश तक फैल चुका है. देश में डेरा के करीब 46 आश्रम हैं और उसकी शाखाएं अमेरिका, कनाडा और इंग्लैड से लेकर ऑस्ट्रेलिया और यूएई तक फैली हुई हैं. डेरा सच्चा सौदा का दावा है कि दुनिया भर में उसके करीब पांच करोड़ मानने वाले हैं जिनमें से 25 लाख अनुयायी अकेले हरियाणा में ही मौजूद है. आम तौर पर डेरा के आश्रम 10 से 40 एकड़ के एरिए में बने होते हैं लेकिन सिरसा में डेरा का ये मुख्यालय एक छोटे शहर की तरह है. दो किलोमीटर के दायरे में फैले डेरा के इस हेडक्वॉर्टर में दुकानों और रिहाइशी इमारतों के अलावा अस्पताल और सामान बनाने की फैक्ट्रियां भी मौजूद हैं. डेरा में बाबा राम रहीम खेती- किसानी में भी अपने हाथ आजमाते हैं. 65 साल के अपने सफर में डेरा सच्चा सौदा ने तीन गुरुओं का दौर देखा है.

 

बाबा गुरमीत राम रहीम ने कहा कि हमनें ही अभिनय किया है उसमें और इसका ख्याल भी यूथ को और पूरी दुनिया को बदलने के लिए ही आया है. जैसा समय होता है. रुहानी सूफी फकीर जो होता है. वह उसी अंदाज में लोगों को समझाता है. अगर हम वह क्लासिकल गाए जो पुराने समय में हमारे पुरखो ने लिखा तो आज के लोगों को समझ ही नहीं है उस चीज की. आज जो बच्चे पसंद करते हैं वह जैज करते हैं. मैलोडी करते हैं रैप करते हैं. तो क्यों ना भगवान के शब्दों को उसी अंदाज में गाया जाए. और क्यूं ना ऐसी फिल्म बनाई जाए जिसे मां बाप समेत अपनी बेटियों के साथ देख सके. और जिसे देख कर एक शिक्षा मिले इसमें हम नशे को छुड़वाने के लिए यूथ को मोटीवेट कर रहे हैं.    

 

बाबा राम रहीम अब एक्टर भी बन चुके हैं. जल्द ही उनकी फिल्म द मैसेंजर ऑफ गॉड रिलीज होने वाली है जिसमें 47 साल के बाबा ने सारे स्टंट खुद ही किए हैं. दरअसल बाबा राम रहीम खेल के मैदान से लेकर किचन के काम तक हर उस तरीके को आजमातें हैं जो उन्हें भक्तों के करीब रख सके. और यही वजह है कि वह सोशल मीडिया पर भी मौजूद हैं और उन्होंने अपना ट्वीटर एकाउंट भी बना रखा हैं. बाबा राम रहीम की ऐसी चौतरफा सक्रियता की वजह से ही डेरा सच्चा सौदा हरियाणा और पंजाब में आज एक बड़ी ताकत बन चुका है लेकिन बाबा राम रहीम किसी भी तरह की राजनीतिक महत्वकांक्षा से साफ इंकार करते हैं.

 

बाबा गुरमीत राम रहीम से पूछा गया कि लोगों का कहना है कि जिन-जिन डेरा ने या धार्मिक लोगों ने राजनीतिक तौर पर सक्रिय होने की कोशिश की है उनका प्रभाव कम होता चला गया है. तो आपको डर नहीं सताता कि आपका भी प्रभाव कम हो सकता है. तो उन्होंने जवाब दिया कि हमारे पीछे तो कब से ये बातें कहते आ रहे हैं और यहां 1990 में जो लोग जुड़े थे राम नाम से वह करीब 12 लाख थे जो आज पांच करोड़ है और हर महीने का रिकॉर्ड डबल से टूट रहा है. नशा छोड़ने वाले हर बार डबल हो रहे हैं. अगर इस महीने में पांच हजार थे तो अगले महीने दस हजार हो रहे है. यानी प्रभाव बढ़ता ही जा रहा है. क्योंकि वह हमारा नहीं भगवान का प्रभाव है हम तो उनकी चर्चा करते है.

 

बाबा राम रहीम के भक्तों का कहना है कि वह दुनिया को मोहब्बत और भाई चारे का संदेश देते हैं. लेकिन आलोचक उन पर हिंदूत्व की आस्था को तोड़ने का आरोप लगाते हैं दरअसल बाबा राम रहीम का ये संसार जितना चर्चित है उतना ही विवादित भी रहा है. बाबा राम रहीम साल 2007 में उस वक्त भी विवादों में घिर गए थे जब उन्हें एक विज्ञापन में सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह जी के लिबास में दिखाया गया था.

 

बाबा गुरमीत राम रहीम ने कहा कि हम एक रुहानी जाम पिलाया करते थे. तो उसमें वह पहना करते थे. ड्रेस गुरु साहब वालों की ड्रेस वह अभी भी तलवंडी साहब में अभी भी वहां पर है. आप चेक कर सकते हो वह ड्रेस औऱ वह ड्रेस जमीन आसमान का फर्क है. कोई मतलब ही नहीं है ना मैने कोई ऐसा बाघ पहना ना तलवार ना घोड़ा ना कोई ऐसी चीजें. अचानक किसी ने लाकर दी और वह हम 94 से पहन रहे थे. तब कोई नहीं बोला. हम तो आज भी कह रहे हैं. तब भी बोला था कि गुर साहबान तो भगवान स्वरुप है हम तो खाक है. हम तो उनके कदमों की धूल भी नहीं हम कैसे उनकी बराबरी की सोच सकते हैं.

 

सात साल पहले बाबा राम रहीम का विरोध जामे इंशा नाम की एक रीत को लेकर हुआ था. इस रीत के मुताबिक बाबा राम रहीम अपने अनुयायियों को अपने हाथों से जामे इंशा यानी शर्बत पिलाया करते थे. बाबा के जामे इंशा को ज्ञान का अमृत माना जाता है लेकिन उन पर ये आरोप था कि जिस लिबास में वह जामे इंशा की रीत निभा रहे थे वह सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह जी के पहनावे से मिलती – जुलती थी. बाबा की रीत को लेकर एतराज ये भी था कि ये रस्म गुरु गोविंद सिंह जी की पंच प्यारों की अमृत चखाने से मिलती जुलती है. ये पूरा विवाद भी लंबे वक्त तक बाबा राम रहीम का पीछा करता रहा है. 

 

बाबा गुरमीत राम रहीम से जब पूछा गया कि अकाल तख्त ने हुक्म नामा जारी कर दिया आपके खिलाफ उस सारे विवाद के बाद आपको लगा नहीं कभी कि एक फकीर को वहां जाकर बोल देना चाहिए आखिरकार किस चीज का सामाजिक बहिष्कार आपने वह पहल क्यों नहीं की. आपने सीधे अकाल तख्त पर जाने की कोशिश क्यों नहीं की. तो उन्होंने जवाब दिया कि क्योंकि किसी ने कहा ही नहीं ना हमनें सोचा इस बारे में क्योंकि हमने सोचा कि जब ये लोग चाह रहे है कि इसी से बात है तो हमें वहां जाने का ऐसा कुछ लगा नहीं. क्योंकि उन्होंने कहा कि ये लिख कर दे दो आपको कोई जरुरत नहीं है वहां जाने की. उनके खासमखास लोग ही आए थे. और उन्होंने हमसे वह लिखवाकर ले गए.

 

डेरा सच्चा सौदा आज करोडो़ लोगों की आस्था का केंद्र बन चुका है लेकिन इसके प्रमुख बाबा राम रहीम अक्सर आरोपों में घिरते रहे हैं. साल 2012 में डेरे के एक पूर्व साधू हंसराज चौहान ने बाबा राम रहीम पर डेरे के साधुओं को नपुंसक बनाने का इल्जाम लगाया था. इस मामले में भी हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की गई थी जिसमें कहा गया था कि साधुओं को नपुंसक बनने के बाद बाबा राम रहीम के जरिए ईश्वर के दर्शन का सपना दिखाया गया था और इसी झांसे में आकर डेरे के 400 साधुओं ने अपना ऑपरेशन करवा लिया था जिनमें हंस राज चौहान भी शामिल था. इस मामले में हाई कोर्ट के आदेश पर हंस राज का मेडिकल टेस्ट भी करवाया गया था.

 

वकील एस एस नरूला ने बताया कि हाईकोर्ट ने इसको भेजा जनरल हॉस्पिटल चंडीगड़ में. टेस्ट कराने के लिए तो पाया गया कि इसके टेस्टीकल्स रिमूव है. और ऐसा ही 2011 में सुसाइड किया था सिरसा कोर्ट परिसर में एक सेवादार ने विनोद कुमार उसका नाम था. गनमैन था बाबा का वह. उसका जब पोस्टमार्टम हुआ तो उसके टेस्टीकल्स रिमूव मिले. औऱ बाकी नाम सौ डेढ सौ आदमी कम से कम आज भी बाबा के डेरे में है. जो उसका बाडीगार्ड है.

  

बाबा गुरमीत राम रहीम से जब पूछा गया कि पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में आप ही के डेरे के लोग है उन्होंने पिटिशन दाखिल की थी और उसमें बड़ा घिनौना आरोप था कि नपुंसक बना दिया जाता है वहां जो लोग रहते हैं. तो उन्होंने जवाब दिया कि हम तो किसी को कभी ये शिक्षा देते ही नहीं. और सोचते भी नहीं. कोई क्या कर रहा है कहां घूम रहा है. उसका कैसे कहा जा सकता है. लेकिन हमने कभी किसी को ऐसी सतसंग में भी नहीं बोला. कि ऐसा आदमी बनना है. ना कभी पर्सनली कभी किसी से कुछ कहा.

 

सिरसा के डेरा सच्चा सौदा में बाबा राम रहीम की रिहाइश को लेकर भी अफवाहों का माहौल गर्म रहा है. कहां जाता है कि बाबा राम रहीम एक गुफा नुमा जगह में रहते हैं जहां उनके खास सेवादारों को ही अंदर जाने की इजाजत होती है. यही नहीं गुफा में बाबा की सुरक्षा में 24 घंटे महिला सेवादार तैनात रहती हैं लेकिन बाबा राम रहीम ऐसी किसी भी गुफा के होने से ही इंकार करते हैं.

  

बाबा गुरमीत राम रहीम ने बताया कि सौ फीसदी झुठ है वहां दो या तीन महीने के बाद वहां जितने भी हमारे सेवादार है तीन लाख से लेकर दस लाख तक वह सारे आते हैं और सिर्फ वह गुफा नाम रखा हुआ था. वह भी हमने चेंज किया ‘तेरह वास’ रखा उसका नाम. वह गुफा ऐसी नहीं की कोई अडंरग्राउंड चीज है वह दो मंजिले का एक मकान है. दो मकान है और उसी में हम रहते हैं. और ऐसा कुछ नहीं महिलाएं वहां आती ही नहीं है. हमारे पास दो लांगरी रहते हैं. और बाहर जो सुरक्षा वाले लोग हैं वह रहते हैं.

 

डेरा सच्चा सौदा एक आध्यात्मिक संगठन है जिसकी स्थापना शाह मस्ताना जी महाराज ने 1948 में सिरसा में की थी. डेरा सच्चा सौदा के दूसरे गुरु शाह सतनाम सिंह जी महाराज बने थे. शुरुवात में डेरा सच्चा सौदा का प्रभाव हरियाणा के सिरसा, फतेहबाद, हिसार, सोनीपत, कैथल औऱ पंजाब के मनसा, मुक्तसर औऱ भटिंडा तक ही सीमित था. लेकिन 1990 में जब बाबा राम रहीम डेरा प्रमुख बने तो उसके बाद से इसका विस्तार तेज हुआ और आज उत्तर प्रदेश के बागपत, हिमाचल प्रदेश के कांगरा और दिल्ली से लेकर राजस्थान में श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, कोटा, बीकानेर, उदयपुर, जयपुर तक डेरा की शाखाएं फैल चुकी है. मध्य प्रदेश के सीहोर, छत्तीसगढ़ के कोरबा, महाराष्ट्र के सतारा, गुजरात के भुज, कर्नाटका के मैसूर से लेकर उड़ीसा के पुरी तक डेरा सच्चा सौदा के आश्रम फैले हुए हैं. –

 

बाबा गुरमीत राम रहीम बताते हैं कि हमारा मकसद सिर्फ एक ही हैं. कि जितने लोग नशा कर रहे हैं जो बुराई के रास्ते पर चल रहे हैं. वह छोड़ के नेक इंसान बन जाए. जैसा हम नशा छुड़वाते है सफाई अभियान है. हमें कुछ बना देना या हमारे आश्रम का आकर फायदा करना या यहां आकर ऐसा कुछ करना. ऐसा कुछ नहीं है. बल्ड डोनेट करवाते हैं. और एक ही दिन में 70 हजार 700 यूनिट बल्ड डोनेट किया गया. तो होता क्या है कि जब वह लोग ये काम करते हैं तो इनकी बीमारिया दूर हो जाती है. उनकी घरेलू परेशानियां दूर हो जाती है.

 

डेरा सच्चा सौदा 104 तरह के सामाजिक कार्यक्रम चलाने का दावा करता है. डेरा के मुताबिक प्राक़ृतिक आपदा में लोगों की मदद करना, रक्त दान करना, स्वच्छता अभियान चलाना, वृक्षारोपण करना, भ्रूण हत्या और नशे के खिलाफ मुहिम चलाना उससे सबसे प्रमुख कार्य है. अनाथ बच्चों को अपनाने और वेश्यावृति उनमूलन के क्षेत्र में भी डेरा सच्चा सौदा काम करने का दावा करता है.

 

बाबा गुरमीत राम रहीम से पूछा गया कि क्या आपको लगता है कि जो आपके साथ हुआ उसके चलते आपको इतने सारे कार्यक्रम चलाने की जरुरत पड़ रही है या फिर ये एजेंडा पहले से था. तो उन्होंने जवाब दिया कि पहले से ही, 1948 से ही गुरुजी हमारे जो पहले हुए शाह मस्ताना जी महाराज. उन्होंने ही बोला कि हम आपके दोनों जहान की खबर रखेंगे. कि आगे भगवान से आपके लिए प्रार्थना करेंगे और इस जहान में जो भी बुराइयां आई उसको हटाने के लिए हम आपके साथ चलेंगे आपको रास्ता दिखाएंगे.

 

बाबा राम रहीम के डेरा सच्चा सौदा की शाखाएं पूरे देश में फैली हुई हैं. इंडियन एक्सप्रेस अखबार के मुताबिक मौजूदा साल में डेरे की कुल जायदाद 202 करोड़ रुपये बताई गई है. डेरा सच्चा सौदा की इन तमाम मिल्कियत का रख-रखाव एक ट्रस्ट के जरिए किया जाता है जिसके मुखिया बाबा राम रहीम है हांलाकि आधिकारिक तौर पर कोई भी प्रॉपर्टी बाबा रहीम के नाम पर नहीं है सिवाय उस 200 एकड़ जमीन के जो उनकी पैतृक संपत्ति है. बाबा की ये जमीन राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में है जहां उनका पुश्तैनी गांव है. इस गांव में आज भी लोग बाबा राम रहीम के बचपन के दिनों को याद करते हैं.

 

बाबा राम रहीम के स्कूल टीचर प्रगट सिंह बताते हैं कि हमने देखा है कि उनमें कोई अलग तरह कि विलक्षण प्रतिभा है और जो खेल हुए हैं उनमें सदा आगे रहते हैं. क्रिकेट के अच्छे प्लेयर थे, पहले कबड्डी भी खेलते थे. और पढ़ाई में भी अव्वल आते थे. उनका जो था वह उस समय वह कुछ अलग था दुनिया से,इतना हसमुख स्वभाव है और इतने नेक दिल थे. कभी खर्चे की परवाह नहीं करते. इकठ्ठे रहते और सबसे लगाव था, हर चीज से हर बन्दे से.

 

बाबा राम रहीम के दोस्त रुप सिंह बताते हैं कि बचपन से ही वह बहुत प्रतिभाशाली रहे हैं बहुत ही अच्छे स्टूडेंटस में रहें हैं. हर एक एक्टिविटी में पार्टिसिपेट करते थे जैसे कोई गेम्स वगैराह है. मैं कल्चर एक्टिविटी की तैयारी करवाया करता था. सांस्कृतिक कार्यक्रम का मैं इन्चार्ज था तो उनकी बड़ी सुरीली आवाज थी. मैं इनको डायरेक्टर कहकर बुलाया करता था. कोई भी सॉन्ग वगैराह की तर्ज बनानी होती थी तो मैं इन्हें डायरेक्टर कहकर बुलाता और यह कहता कि आप इसकी तर्ज बनाकर लाओ, दस मिनट में ही ये तर्ज बनाकर उसको तैयार कर देते थे.

 

श्रीगंगानगर जिले के गुरुसर मोडिया गांव में सन 1967 को बाबा राम रहीम का जन्म एक जमींदार परिवार में हुआ था. बाबा राम रहीम का कहना है कि वह पांच साल के थे जब पहली बार डेरा सच्चा सौदा के दूसरे गुरु शाह सतनाम सिंह जी के संपर्क में आए थे.

 

बाबा गुरमीत राम रहीम बताते हैं कि हम 1972 में पहली बार सिरसा हरियाणा आए थे. और हमारे ननिहाल से पहले कुछ लोगों ने गुरुमत्र लिया हुआ था. हमारी शायद नानीजी थी मामाजी थे. तो उन्होंने बोला कि ऐसे संत है महापुरुष हैं. हम तब सिर्फ पांच साल के थे. गुरुजी के पास आए तो जैसे ही गुरजी के पास आए तो जा रहे थे अपने पिताजी के साथ.

 

पांच साल के बाबा राम रहीम की गुरु सतनाम सिंह से मुलाकात का ये सिलसिला फिर कभी थमा नहीं. बाबा राम रहीम का कहना है कि वह सात साल की उम्र से ही ट्रैक्टर चलाने लगे थे औऱ लोगों का नशा छुड़वाने के लिए वह उन्हें अपने गांव से सिरसा में डेरा सच्चा सौदा ले जाया करते थे. इस तरह धीरे- धीरे उनकी संत सतनाम सिंह जी से करीबियत बढ़ती चली गई और फिर एक दिन अचानक गुरु सतनाम सिंह जी ने बाबा राम रहीम को अपनी गद्दी सौंपने का ऐलान कर दिया.

 

बाबा गुरमीत राम रहीम ने बताया कि उन्होंने हमसे बिना पूछे ही हमारा नाम बोला शाह संगत को जो खास मौअजिज लोग थे कि भई उनको बुलाना है हम गद्दी पर उनको बिठाएंगे. और वह फिर डेढ साल हमारे साथ रहे. एक साल तीन महीने ऐसा कुछ और वह बोलते रहे कि भई किसी को कुछ पूछना हो किसी को कोई गलतफहमी हो कि भई हमनें इनकों क्यूं बिठाया तो पूछ सकता है. एक दो लोगों ने पूछा भी. कि गुरुजी बहुत लोग ऐसे भी थे. तो गुरुजी ने कहा आपको पता है ये कब से सेवा कर रहे हैं. हमें पता है हमारी निगाह में थे. हम पर इनको बोलते कुछ नहीं थे. तो यही इसके काबिल हैं. तो इस तरह गुरुजी ने हमें वह गद्दी दी.

 

यूं तो बाबा राम रहीम के करोड़ो भक्तों का रुपहला संसार हैं लेकिन उनके सुनहरें दरबार में नेता, अभिनेता और क्रिकेट खिलाड़ियों से लेकर देश की तमाम दिग्गज हस्तियां हाजिरी लगाती हैं. बाबा राम रहीम का राजनीतिक रसूख भी कुछ ऐसा है कि सभी दलों के नेता डेरा सच्चा सौदा की दहलीज तक खिंचे चले आते हैं लेकिन डेरा सच्चा सौदा का जितना बड़ा नाम है उसके प्रमुख बाबा राम रहीम की झोली में उतने ही बड़े इल्जाम भी हैं. 

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