एयरफोर्स-डे: देश की सरहद को कोई छू नहीं सकता, जब निगेहबान हों ये 'आंखें'

By: | Last Updated: Thursday, 8 October 2015 3:44 AM
ABP News special: Watch how Sukhoi 30 fighter planes protect India

 

नई दिल्ली : भारतीय वायुसेना का 83वां स्थापना दिवस मनाया जा रहा है. इस अवसर पर एबीपी न्यूज ने भारतीय एयरफोर्स के के सबसे ‘फॉरवर्ड अटैक एयर बेस’ का जायजा लिया. इस बेस पर तैनात है भारत के सबसे आधुनिकतम लड़ाकू विमान सुखोई की एक पूरी स्कावर्डन.

 

देखें तस्वीरें : इंडियन एयरफोर्स पाक से डबल पावरफुल

 

वायुसेना की पश्चिमी कमांड के अंतर्गत आने वाले इस बेस की जिम्मेदारी ना केवल देश की एयर स्पेस यानि वायुसीमा को सुरक्षित रखना है बल्कि एयर-डोमिनेंन्स यानि हवा में अपनी बादशाहत कायम रखना भी है.

 

पाकिस्तान इस बेस से महज 100 किलोमीटर की दूरी पर है. और सबसे करीबी पाकिस्तानी एयर बेस से युद्ध या फिर किसी भी अप्रिय स्थिति में दुश्मन के विमान को यहां तक पहुंचने में महज 10 मिनट से भी कम समय लगता है. ऐसे में  भारतीय वायुसेना के इस फ्रंटलाइन अटैक एयर बेस की जिम्मेदारी बेहद अहम है.

 

देखें वीडियो : एबीपी न्यूज़ स्पेशल: सुखोई 30 की ताकत देखिए

 

इस बेस से हमारी हवाई-सीमाएं सुरक्षित रहतीं हैं और भारतीय वायुसेना के ‘वज्रास्त्र’ यानि सुखोई फाइटर प्लेन के डर से दुश्मन हमारी सीमाओं की तरफ आंख उठाने की जुर्रूत नहीं करता है. यह कैसे होता है इसे समझाने के लिए फ्रंटलाइन बेस ने एक मॉक ड्रिल की.

 

ड्रिल में दिखाया गया कि दुश्मन के दो (02) लड़ाकू विमान जैसे ही अंतर्राष्ट्रीय सीमा को पार कर हमारी सीमा में घुसने की कोशिश करते हैं तो रडार के जरिए उसकी जानकारी तुरंत ही ऑपरेशन्स रूम में पहुंच जाती है.

 

रडार पर आते ही हमारे दो सुखोई विमान और उनके फाइटर पाईलेट्स को अलर्ट कर दिया जाता है. महज दो मिनट के अंदर ही दोनों सु-30 विमान आसमान में दुश्मन के विमानों को व्यस्त करना शुरू कर देते हैं. सु-30 नजरों से दूर रहकर ही दोनों दुश्मन के विमानों को वहां भगाने में कामयाब हो जाते हैं.

 

वायुसेना की पश्चिमी कमांड के प्रवक्ता, ग्रुप कैप्टन सुदीप मेहता ने एबीपी न्यूज को बताया की आज के समय में युद्ध बहुत अलग प्रक्रिया है. हवा में लड़ाई आमने सामने की बजाय दूर रहकर ही लड़ी जाती है. ऐसे युद्ध के लिए सुखाई विमान का दुनिया में कोई सानी नहीं है.

 

सु-30 ऐसे आधुनिक हथियारों, मिसाइल और बमों से लैस है जो एक बार टारगंट को लॉक कर दे तो उसे नेस्तानबूत करके ही दम रखता है. इसके लिए उसे दुश्मन के जहाज के पास जाने की भी जरूरत नहीं पड़ती.

 

200-300 किलोमीटर दूर से ही वो अपने टारगेट को लॉक यानि सटीक निशाना साध सकता है. अगर किसी वजह से सु-30 की नजरों से बचकर दुश्मन के लड़ाकू विमान बेस तक पहुंचने की कोशिश करते हैं तो उससे बचने के साथ ही नष्ट किया जा सकता है.

इसके लिए बेस पर TWCC यानि Terminal Weapons Command Centre बनाया गया है. सामरिक और सुरक्षा कारणों से इस ऑपरेशन्स रूम के अंदर कैमरा ले जाना मना था. हमें बताया कि इसके लिए तीन-चार तरह की खास मिसाइल-सिस्टम और आर्टलैरी गन तैनात की गईं हैं. करीब 20-25 किलोमीटर की रेंज के लिए पिचोरा और आकाश मिसाइल तैनात की गईं हैं.

 

उसके बाद अगर दुश्मन और करीब आ जाता है तो उसके लिए ओसा मिसाइल होती है और उसके बाद कंधे पर रखने वाला इग्ला मिसाइल लांचर होता है. अगर इन सब से भी टारगेट बच गया तो सेना की खास Artillery गन काम करती हैं. भारत ने सुखोई-30 प्लेन 2002 में रशिया से लिए थे और उसके बाद हिंदुस्तान एरोनोटिकल लिमिटेड (एचएएल) इनका निर्माण करती है.

 

सही मायने में सुखोई एक मल्टी-रोल 4th-generation एयरक्राफ्ट है जो आवाज की गति से भी दुगनी स्पीड से उड़ता है और पलक झपकते ही दुश्मन को ध्वस्त कर सकता है. सु-30 एक घंटे में 2000 किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है और एक बार में 3000 किलोमीटर तक उड़ सकता है. अगर हवा में ही सुखोई में रिफयूलिंग हो जाए तो करीब 10 हजार किलोमीटर तक बिना रुके उड़ सकता है.

यानि सुखोई दुनिया के किसी भी कोने में एक बार में पहुंच सकता है. इसमें करीब आठ टन के 12 मिसाइल और बम एक साथ लगाए जा सकते हैं. सबसे भारी बम करीब 500 किलो का होता है जो अगर जमीन पर गिरा दिया जाए तो करीब 250 मीटर के एरिया को चंद सैकेंड में नष्ट कर देता है.

 

इसमें लेजर गाईडेड मिसाइल लगीं होतीं हैं. यानि फाइटर पायलेट और वैपेन सिस्टम ओपरेटर हवा में उड़ते हुए ही टारगेट को लॉक कर नेस्तानबूत कर देता है. हालांकि, सुखाई विमानों को भारतीय वायुसेना में 2002 मे शामिल किया गया था. लेकिन पिछले 12-13 सालों में ही दुनिया इस फाइटर प्लेन का लोहा मान चुकी है.

 

कुछ साल पहले अमेरिका मे हुई ‘रेड-फ्लैग युद्धभ्यास’ और इस साल ब्रिटेन में हुई ‘इंद्र-धनुष एक्सरसाइज’ में सुखोई अपना जौहर दिखा चुका है. सुखोई विमान दिन के साथ-साथ रात में भी ऑपरेशन करने में सक्षम है. 1965 के पाकिस्तान युद्ध (हाल ही में स्वर्ण जयंती बीती है) में जब भारतीय वायुसेना ने आजादी के बाद पहली बार किसी युद्ध में हिस्सा लिया था तब भारत के पास रात में फ्लाई करने वाले प्लेन नहीं थे.

जिसके चलते भारत को काफी नुकसान हुआ था. लेकिन 50 साल बाद स्थिति बिल्कुल बदल चुकी है. आज भारत के पास सुखोई जैसे अत्यधुनिक विमान हैं जो रात में भी ठीक वैसे ही ऑपरेशन को अंजाम देने में सक्षम हैं जैसे दिन में. सुखोई का नेविगेशन सिस्टम ऐसा है जिसके चलते इसे ऑपरेट करने में फाइटर पायलेट को खासी दिक्कत नहीं होती है.

 

इसके अलावा हर किसी मौसम (बारिश इत्यादि) में ये ऑपरेशन करने में पूरी तरह सक्षम है. यहां तक की बादलों के बीच में भी ये टारगेट को आसानी से नष्ट कर सकता है. जल्द ही सुखोई विमान में सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल लखने वाली है. इसके लगने से सुखोई की घातक क्षमता कई गुना बढ़ जायेगी.

 

जल्द ही सुखोई विमान के पायलट के हेलमेट पर हवा में उड़ते हुए पूरा नेविगेशन सिस्टम डिस्पले हो सकेगा. इसे ‘सुपर-30 प्रोजेक्ट’ का नाम दिया गया है जो अगले 5 साल में पूरा हो जायेगा. तब ये 4.5 जेनेरेशन एयरक्राफ्ट बन जायेगा.

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Web Title: ABP News special: Watch how Sukhoi 30 fighter planes protect India
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